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Fatehabad News: जिले में 1096 आंगनबाड़ी केंद्र, आधे से अधिक बदहाल
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फतेहाबाद। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की सेहत सुधार से लेकर प्ले ग्रुप मॉड्यूल के तहत सरकार स्कूल पूर्व शिक्षा बड़े-बड़े दावे तो कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे इतर है। हालात यह है कि जिले के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवन में चल रहे हैं, जिनमें कहीं बिजली, पानी की सुविधा का अभाव है तो कहीं टॉयलेट की दिक्कत। कहीं बच्चे तिरपाल पर बैठने को मजबूर हैं तो कहीं भवन इतने छोटे हैं कि वहां पर बच्चे आसानी से बैठ भी नहीं सकते।
जिले में 1096 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें बच्चों की तादाद काफी अधिक है। जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 366 आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी इमारतों में चल रहे हैं। वहीं 34 केंद्र चौपालों में, 115 स्कूलों में, 328 गुरुद्वारों या मंदिरों में चल रहे हैं। 365 आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर चल रहे हैं। वहीं अभी भी 26 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आंगनबाड़ी वर्करों की कमी है। हालांकि विभाग ाकी ओर से किराये का भवन लेकर केंद्र संचालित किए जाने की व्यवस्था है, लेकिन एक बड़ा कमरा, बड़ा किचन, टॉयलेट बाथरूम की सुविधा वाले भवन के लिए विभाग को किराया देना पड़ रहा है। किराये का भवन होने के कारण अधिकांश केंद्रों पर कहीं रोशनी का अभाव रहता है तो कहीं समुचित पेयजल की समस्या से बच्चे जूझते हैं।
जर्जर हालात में गांव अकांवाली का आंगनबाड़ी केंद्र
फतेहाबाद के गांव अकांवाली के आंगनबाड़ी केंद्र की हालात काफी जर्जर हो चुकी है। यह भवन कभी भी गिर सकता है और बच्चों को नुकसान हो सकता है। गांव के सरपंच मोहन गढ़वाल ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र की हालत काफी जर्जर है, अगर इसे ठीक नहीं किया गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसी प्रकार गांव मताना में तो आंगनबाड़ी केंद्र का गेट ही नहीं है। गेट न होने के कारण बच्चों को सरकारी स्कूल के अंदर से जाना पड़ता है। गांव के सरपंच दलबीर मताना ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है। इसके लिए कई बार प्रशासन को लिखा जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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कोट
शहर व गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों में जो भी परेशानियां आ रही हैं, उसे दूर किया जाएगा। जर्जर हालात के आंगनबाड़ी केंद्रों को दुरुस्त करवाने का काम भी किया जाएगा।
-मनदीप कौर, उपायुक्त, फतेहाबाद
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जिले में 1096 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें बच्चों की तादाद काफी अधिक है। जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में 366 आंगनबाड़ी केंद्र सरकारी इमारतों में चल रहे हैं। वहीं 34 केंद्र चौपालों में, 115 स्कूलों में, 328 गुरुद्वारों या मंदिरों में चल रहे हैं। 365 आंगनबाड़ी केंद्र किराए पर चल रहे हैं। वहीं अभी भी 26 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए आंगनबाड़ी वर्करों की कमी है। हालांकि विभाग ाकी ओर से किराये का भवन लेकर केंद्र संचालित किए जाने की व्यवस्था है, लेकिन एक बड़ा कमरा, बड़ा किचन, टॉयलेट बाथरूम की सुविधा वाले भवन के लिए विभाग को किराया देना पड़ रहा है। किराये का भवन होने के कारण अधिकांश केंद्रों पर कहीं रोशनी का अभाव रहता है तो कहीं समुचित पेयजल की समस्या से बच्चे जूझते हैं।
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जर्जर हालात में गांव अकांवाली का आंगनबाड़ी केंद्र
फतेहाबाद के गांव अकांवाली के आंगनबाड़ी केंद्र की हालात काफी जर्जर हो चुकी है। यह भवन कभी भी गिर सकता है और बच्चों को नुकसान हो सकता है। गांव के सरपंच मोहन गढ़वाल ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र की हालत काफी जर्जर है, अगर इसे ठीक नहीं किया गया तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसी प्रकार गांव मताना में तो आंगनबाड़ी केंद्र का गेट ही नहीं है। गेट न होने के कारण बच्चों को सरकारी स्कूल के अंदर से जाना पड़ता है। गांव के सरपंच दलबीर मताना ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है। इसके लिए कई बार प्रशासन को लिखा जा चुका है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
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शहर व गांवों में आंगनबाड़ी केंद्रों में जो भी परेशानियां आ रही हैं, उसे दूर किया जाएगा। जर्जर हालात के आंगनबाड़ी केंद्रों को दुरुस्त करवाने का काम भी किया जाएगा।
-मनदीप कौर, उपायुक्त, फतेहाबाद