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शनिवार सुबह बढ़ गया घग्गर का जलस्तर
Updated Sun, 02 Jul 2017 12:31 AM IST
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घग्घर में बढ़ा पानी, जिले के 106 गांव पर खतरा
शनिवार की सुबह बढ़ा घग्घर नदी का जलस्तर
मानसून आते ही भयभीत हो जाते हैं घग्घर के तटवर्ती क्षेत्रों में बसे किसान
अब तक 10 बार विनाशलीला दिखा चुकी है बाढ़
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
मानसून के आते ही फतेहाबाद से होकर बहने वाली घग्घर नदी में पानी बढ़ गया है। नदी में ऊफान आने से तटवर्ती क्षेत्र पर बसे गांव के लोग भयभीत हो जाते हैं। कारण घग्घर में आने वाली बाढ़ से होने वाला विनाश है। घग्घर के तटबंध कमजोर होने से बाढ़ जिले में करीब 10 बार अपनी विनाशलीला दिखा चुकी है। बाढ़ से यहां 106 गांवों की आबादी के अलावा हजारों एकड़ जमीन जलमग्न हो जाती है। हालांकि, इस बार जिला प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर लिया है।
इसके अलावा ऐहतियात के तौर पर कंट्रोल रूम भी स्थापित कर दिया है। शुक्रवार को घग्घर नदी में पानी आ गया है, जो शाम को खनौरी साइफन में 1100 व चांदपुरा में 500 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। पीछे से बरसात होने से शनिवार सुबह घग्घर का जलस्तर बढ़ गया। शनिवार को गुहला चीका में 13860 खनौरी में 6425 और फतेहाबाद के चांदपुरा में 3120 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। सिंचाई विभाग के तारबाबू ने इसकी पुष्टि की हैं।
कहां से निकलती है घग्घर नदी
हिमाचल प्रदेश की शिवालिक की पहाड़ियों में बरसात होती है, तो उसका पानी कालका में बने गड्ढ़े में गिरता है। यहां से शुरू होती है घग्घर नदी जो कालता से चलकर पंजाब के पटियाला, गुहला चीमा, कैथल, खनौरी से होते हुए फतेहाबाद जिले में प्रवेश करती है। यहां टोहाना, जाखल, चांदपुरा, रतिया से होते हुए सिरसा से पाकिस्तान की ओर निकलत जाती है। फतेहाबाद में घग्गर के तटवर्ती क्षेत्रों पर बसे 60 गांव ऐसे हैं, जो 1962 के बाद 10 बार बाढ़ की विभीषिका झेल चुके हैं। समय पर मरम्मत नहीं होने से रिंग बांध चूहे खोखला कर देते हैं। मानसून के समय जब पानी का बहाव तेज होता है, तो घग्घर के तटबंध टूट जाते हैं और पानी खेतों के साथ गांवों की आबादी में भी अपना तांडव मचाता है। फतेहाबाद के उपमंडल रतिया व फतेहाबाद के अलावा जाखल की ग्रामीण आबादी इससे ज्यादा प्रभावित होती है। प्रशासन हर वर्ष तटबंध मजबूत होने का दावा करता है, लेकिन जब भी तेज बारिश हुई तो यहां पर बाढ़ अवश्य आई।
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कब-कब आई बाढ़
फतेहाबाद में वर्ष 1962, 1976, 1977, 1983, 1988, 1993, 1995, 1998 और 2010 में बाढ़ अपनी विनाशलीला दिखा चुकी है। इन गांवों के बुजुर्ग उन दिनों को कभी नहीं भूले हैं। गांव मामूपुर के किसान एवं पूर्व विधायक सरकार निशान सिंह ने बताया कि 1998 में आई ने उसके आसपास के 20 गांवों को चपेट में ले लिया था। गांवों की ढाणियों के अंदर रहने वाले गरीब लोगों के पास पीने को पानी तक नहीं था। गांव की कुल आबादी के लोग यहां से पलायन करके सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। खेतों में धान की फसल के बाद गेहूं की बिजाई भी नहीं हो पाई थी। इस बाढ़ से दो फसलें प्रभावित हुई थी। 11 जुलाई 2010 में फतेहाबाद से गुजर रही घग्गर के चांपुरा साइफन में रिकॉर्ड तोड़ बहता था। यहां 21 हजार क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया था, जबकि इसकी क्षमता 20 हजार क्यूसेक है। सामान्य तौर पर यहां पर 4 हजार क्यूसेक का बहाव रहता है।
ये गांव बाढ़ से होते हैं प्रभावित
संभावित बाढ़ से प्रभावित 106 गांवों को प्रशासन चिह्नित कर चुका है। इनमें रजाबाद, धिड़, माजरा, बरसीन, बिसला, खानपुर, हिजरावांकलां, खान मोहम्मद, भड़ोलांवाली, बैजलपुर, बहलभोमिया, रामपुरा, भिरडाना, ढाणी मसीता, चेतनपुरा, मल्हड़, काताखेड़ी, बोसवाल, अयाल्की, ढाणी ठोबा, दौलतपुर ढाणी, छतरियां, ढाणी ढाका, ढाणी ईस्सर, हिजरावांखुर्द, नकटा, रत्ताटिब्बा, अहलीसदर, भट्टूखुर्द, बहबलपुर और इसके अलावा जाखल के 30, रतिया के 28 और फतेहाबाद के 37 गांव शामिल हैं। फतेहाबाद से गुजर रही रंगोई खरीफ चैनल की क्षमता सात हजार और साढ़े आठ हजार क्यूसेक थी। 2010 की बाढ़ को देखते हुए सरकार ने इसकी क्षमता 500 से 675 क्यूसेक बढ़ा दी है। इसके अलावा प्रशासन के पास डीजल पंप, वाटर बोट, रेत के भरे कट्टों का प्रबंध है। जिला प्रशासन के पास इस समय 78 पंप सैट, 18 बिजली चलित पंप और 165 मिट्टी तेल चलित पंप हैं। टोहाना में पिछले दिनों दो नई किश्तियां भी मंगवाई गई हैं।
बाढ़ से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध हैं। सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। रंगोई नाले की क्षमता पहले ही बढ़ा दी गई थी। एहतियात के तौर पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को मिट्टी का तेल, आटा, खाने का तेल इत्यादि जरूरी सामान रिजर्व रखने के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग को मलेरिया व अन्य दवाओं का स्टॉक रखने को कहा गया है। घग्घर में पानी के बहाव पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। तीनों सब डीविजनों में कंट्रोल बनाया गया है। यहां पर वायरलेस रूम भी है।
विजेंद्र भारद्वाज, जिला राजस्व अधिकारी
बाढ़ की आशंका के चलते सिंचाई विभाग में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। 40 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। तहसील कार्यालय में भी कंट्रोल बनाया गया है।
सरजीत नैन, एसडीएम टोहाना
सभी ड्रेनों की सफाई करवा दी गई है। 20 हजार खाली कट्टे घग्घर के लिए आ रहे हैं। खनौरी व चांदपुरा में वायरलेस सेट स्थापित किया गया है, जहां पर सिंचाई व पुलिस के कर्मचारी दिन रात ड्यूटी दे रहे हैं।
भूप सिंह, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग
08,09 पहाड़ों पर हुई बरसात के बाद यहां से गुजर रही घग्घर नदी में बढ़ा जलस्तर।
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शनिवार की सुबह बढ़ा घग्घर नदी का जलस्तर
मानसून आते ही भयभीत हो जाते हैं घग्घर के तटवर्ती क्षेत्रों में बसे किसान
अब तक 10 बार विनाशलीला दिखा चुकी है बाढ़
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहाबाद।
मानसून के आते ही फतेहाबाद से होकर बहने वाली घग्घर नदी में पानी बढ़ गया है। नदी में ऊफान आने से तटवर्ती क्षेत्र पर बसे गांव के लोग भयभीत हो जाते हैं। कारण घग्घर में आने वाली बाढ़ से होने वाला विनाश है। घग्घर के तटबंध कमजोर होने से बाढ़ जिले में करीब 10 बार अपनी विनाशलीला दिखा चुकी है। बाढ़ से यहां 106 गांवों की आबादी के अलावा हजारों एकड़ जमीन जलमग्न हो जाती है। हालांकि, इस बार जिला प्रशासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर लिया है।
इसके अलावा ऐहतियात के तौर पर कंट्रोल रूम भी स्थापित कर दिया है। शुक्रवार को घग्घर नदी में पानी आ गया है, जो शाम को खनौरी साइफन में 1100 व चांदपुरा में 500 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। पीछे से बरसात होने से शनिवार सुबह घग्घर का जलस्तर बढ़ गया। शनिवार को गुहला चीका में 13860 खनौरी में 6425 और फतेहाबाद के चांदपुरा में 3120 क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया। सिंचाई विभाग के तारबाबू ने इसकी पुष्टि की हैं।
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कहां से निकलती है घग्घर नदी
हिमाचल प्रदेश की शिवालिक की पहाड़ियों में बरसात होती है, तो उसका पानी कालका में बने गड्ढ़े में गिरता है। यहां से शुरू होती है घग्घर नदी जो कालता से चलकर पंजाब के पटियाला, गुहला चीमा, कैथल, खनौरी से होते हुए फतेहाबाद जिले में प्रवेश करती है। यहां टोहाना, जाखल, चांदपुरा, रतिया से होते हुए सिरसा से पाकिस्तान की ओर निकलत जाती है। फतेहाबाद में घग्गर के तटवर्ती क्षेत्रों पर बसे 60 गांव ऐसे हैं, जो 1962 के बाद 10 बार बाढ़ की विभीषिका झेल चुके हैं। समय पर मरम्मत नहीं होने से रिंग बांध चूहे खोखला कर देते हैं। मानसून के समय जब पानी का बहाव तेज होता है, तो घग्घर के तटबंध टूट जाते हैं और पानी खेतों के साथ गांवों की आबादी में भी अपना तांडव मचाता है। फतेहाबाद के उपमंडल रतिया व फतेहाबाद के अलावा जाखल की ग्रामीण आबादी इससे ज्यादा प्रभावित होती है। प्रशासन हर वर्ष तटबंध मजबूत होने का दावा करता है, लेकिन जब भी तेज बारिश हुई तो यहां पर बाढ़ अवश्य आई।
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कब-कब आई बाढ़
फतेहाबाद में वर्ष 1962, 1976, 1977, 1983, 1988, 1993, 1995, 1998 और 2010 में बाढ़ अपनी विनाशलीला दिखा चुकी है। इन गांवों के बुजुर्ग उन दिनों को कभी नहीं भूले हैं। गांव मामूपुर के किसान एवं पूर्व विधायक सरकार निशान सिंह ने बताया कि 1998 में आई ने उसके आसपास के 20 गांवों को चपेट में ले लिया था। गांवों की ढाणियों के अंदर रहने वाले गरीब लोगों के पास पीने को पानी तक नहीं था। गांव की कुल आबादी के लोग यहां से पलायन करके सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। खेतों में धान की फसल के बाद गेहूं की बिजाई भी नहीं हो पाई थी। इस बाढ़ से दो फसलें प्रभावित हुई थी। 11 जुलाई 2010 में फतेहाबाद से गुजर रही घग्गर के चांपुरा साइफन में रिकॉर्ड तोड़ बहता था। यहां 21 हजार क्यूसेक पानी का बहाव दर्ज किया गया था, जबकि इसकी क्षमता 20 हजार क्यूसेक है। सामान्य तौर पर यहां पर 4 हजार क्यूसेक का बहाव रहता है।
ये गांव बाढ़ से होते हैं प्रभावित
संभावित बाढ़ से प्रभावित 106 गांवों को प्रशासन चिह्नित कर चुका है। इनमें रजाबाद, धिड़, माजरा, बरसीन, बिसला, खानपुर, हिजरावांकलां, खान मोहम्मद, भड़ोलांवाली, बैजलपुर, बहलभोमिया, रामपुरा, भिरडाना, ढाणी मसीता, चेतनपुरा, मल्हड़, काताखेड़ी, बोसवाल, अयाल्की, ढाणी ठोबा, दौलतपुर ढाणी, छतरियां, ढाणी ढाका, ढाणी ईस्सर, हिजरावांखुर्द, नकटा, रत्ताटिब्बा, अहलीसदर, भट्टूखुर्द, बहबलपुर और इसके अलावा जाखल के 30, रतिया के 28 और फतेहाबाद के 37 गांव शामिल हैं। फतेहाबाद से गुजर रही रंगोई खरीफ चैनल की क्षमता सात हजार और साढ़े आठ हजार क्यूसेक थी। 2010 की बाढ़ को देखते हुए सरकार ने इसकी क्षमता 500 से 675 क्यूसेक बढ़ा दी है। इसके अलावा प्रशासन के पास डीजल पंप, वाटर बोट, रेत के भरे कट्टों का प्रबंध है। जिला प्रशासन के पास इस समय 78 पंप सैट, 18 बिजली चलित पंप और 165 मिट्टी तेल चलित पंप हैं। टोहाना में पिछले दिनों दो नई किश्तियां भी मंगवाई गई हैं।
बाढ़ से निपटने के लिए पुख्ता प्रबंध हैं। सभी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। रंगोई नाले की क्षमता पहले ही बढ़ा दी गई थी। एहतियात के तौर पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को मिट्टी का तेल, आटा, खाने का तेल इत्यादि जरूरी सामान रिजर्व रखने के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग को मलेरिया व अन्य दवाओं का स्टॉक रखने को कहा गया है। घग्घर में पानी के बहाव पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है। तीनों सब डीविजनों में कंट्रोल बनाया गया है। यहां पर वायरलेस रूम भी है।
विजेंद्र भारद्वाज, जिला राजस्व अधिकारी
बाढ़ की आशंका के चलते सिंचाई विभाग में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। 40 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। तहसील कार्यालय में भी कंट्रोल बनाया गया है।
सरजीत नैन, एसडीएम टोहाना
सभी ड्रेनों की सफाई करवा दी गई है। 20 हजार खाली कट्टे घग्घर के लिए आ रहे हैं। खनौरी व चांदपुरा में वायरलेस सेट स्थापित किया गया है, जहां पर सिंचाई व पुलिस के कर्मचारी दिन रात ड्यूटी दे रहे हैं।
भूप सिंह, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग
08,09 पहाड़ों पर हुई बरसात के बाद यहां से गुजर रही घग्घर नदी में बढ़ा जलस्तर।