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Fatehabad News: अहलीसदर के 101 साल के चंबाराम ने दी परीक्षा, बोले- निक्के-वड्डे सारे पढ़न

Mon, 23 Sep 2024 05:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 23 Sep 2024 05:08 AM IST
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101 year old Chambaram of Ahlisadar gave the exam, said - Nikke-vadde, all the studies
गांव अहलीसदर में केंद्र पर परीक्षा देते हुए चंबाराम
फतेहाबाद। शिक्षा विभाग की तरफ से रविवार को उल्लास कार्यक्रम के तहत सर्वे के दौरान मिले निरक्षरों को ज्ञान देने के बाद परीक्षा का आयोजन किया गया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल द्वारा जिले में बने 256 केंद्रों पर परीक्षा ली गई।
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परीक्षा में गांव अहलीसदर के 101 साल के चंबाराम रोल मॉडल रहे। चंबाराम खुद पैदल चलकर गांव के सरकारी स्कूल में बनाए गए केंद्र में पहुंचे और परीक्षा दी। इससे पहले उल्लास कार्यक्रम के जिला समन्वयक पवन सागर और शिक्षकों ने माला डालकर उनका स्वागत किया। चंबाराम ने अपने जीवनकाल में पहली बार डेस्क पर बैठकर परीक्षा दी।
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परीक्षा को लेकर चंबाराम बच्चों की तरह उत्साहित दिखे। परीक्षा के बाद चंबाराम ने जोश से सिर्फ एक ही बात कही की सारे पढ़न, निके-वडे सारे पढ़न। चंबाराम के पोते हंसराज ने बताया कि सरकारी स्कूल के शिक्षक ने घर आकर मोटिवेट किया और इसके बाद वह पढ़ने के लिए तैयार हो गए। पड़ोस के निजी स्कूल की शिक्षक संदीप कौर की स्वयंसेवी शिक्षिका के रूप में ड्यूटी लगी। जिसने दादा को पढ़ना सिखाया। दादा ने पूरी रुचि लेकर पढ़ना शुरू किया।
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बेटा चलाता है टोहाना में निजी स्कूल
चंबाराम के पोते हंसराज ने बताया कि दादा के तीन बेटों में से दो की मौत हो चुकी है। एक बेटा भजनलाल टोहाना में निजी स्कूल चलाते हैं। दादा के चार पोते और दो दोहते व दो दोहती हैं। इनके आगे सभी के दो-दो बच्चे हैं। सभी पढ़े-लिखे हैं। दादा खेत की जिम्मेदारी के कारण पढ़ नहीं पाए। अब इस उम्र वे अपने इस सपने को पूरा कर रहे हैं। दादा उन्हें बताते कि पढ़ना लिखना नहीं आने के कारण जीवन में कई परेशानियां झेली हैं। पहले कोई चिट्ठी भी पढ़ानी होती थी तो गांव में पढ़ा-लिखा व्यक्ति ढूंढना पड़ता था।
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