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मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर होता है ‘खेल’
Faridabad
Updated Sat, 11 May 2013 05:30 AM IST
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फरीदाबाद। कुछ ही वर्षों में चंद कमरों के कैंपस को विशाल फाइव स्टार कैंपस में बदलने वाले इंजीनियरिंग कॉलेजों का असली खेल मैनेजमेंट कोटे पर चल रहा है। इसमें वे अपनी शर्तों पर एडमिशन करते हैं और डोनेशन के नाम पर मनमानी कमाई करते हैं। इस शहर में दो डीम्ड यूनिवर्सिटी व एक दर्जन से अधिक इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट कॉलेज हैं। इनमें 75 फीसदी सीटें हरियाणा स्टेट टेक्निकल एजुकेशन सोसायटी के काउंसिलिंग द्वारा भरी जाती हैं। शेष 25 फीसदी सीटें मैनेजमेंट कोटे से भरी जाती हैं। इन्हीं सीटों के लिए सिफारिश से लेकर मोटे डोनेशन तक का खेल चलता है। डोनेशन हजार या लाख में नहीं, बल्कि लाखों में होता है। हरियाणा अभिभावक एकता मंच के प्रदेश महासचिव कैलाश शर्मा कहते हैं कि मैनेजमेंट कोटा के नाम पर विद्यार्थियों से काफी ज्यादा रकम वसूली जाती है। जो ज्यादा रकम देता है उसका दाखिला हो जाता है। जिसका एडमिशन कहीं नहीं हो पाता उसके अभिभावक मजबूरी में पैसे देते हैं। सरकार इसके लिए नियम बनाए कि मैनेजमेंट कोटा में भी तय फीस से ज्यादा फीस नहीं ली जाएगी।
वहीं डीम्ड विश्वविद्यालयों में तो शत प्रतिशत काउंसिलिंग प्रबंधन खुद करता है। इनमें दाखिले की मेरिट कोई सोसायटी न बनाकर खुद प्रबंधन बनाता है। लिहाजा यहां पर भी डोनेशन का खुला खेल चलता है।
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वहीं डीम्ड विश्वविद्यालयों में तो शत प्रतिशत काउंसिलिंग प्रबंधन खुद करता है। इनमें दाखिले की मेरिट कोई सोसायटी न बनाकर खुद प्रबंधन बनाता है। लिहाजा यहां पर भी डोनेशन का खुला खेल चलता है।
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