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तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट पर होगी तोड़फोड़
Faridabad
Updated Tue, 30 Apr 2013 05:30 AM IST
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फरीदाबाद। नीलम-बाटा रोड स्थित भवन नियमावली का उल्लंघन करने वाले होटल संचालक नए-नए बहाने खोजकर तोड़फोड़ से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
अवैध रूप से बने हिस्से को खुद तोड़ने के लिए होटल संचालकों को समय दिया गया था, लेकिन तोड़फोड़ करने में संचालकों को मोह लग रहा है। उन्हें लग रहा है जिसे उन्होंने इतना पैसा लगाकर बनाया, उसे अपने हाथों कैसे तोड़ दें। खुद तोड़ने की मियाद खत्म हो गई, तो संचालकों ने कहा कि अवैध हिस्सा तोड़ने से पूरा स्ट्रक्चर हिल जाएगा।
नगर निगम प्रशासन ने तोड़फोड़ के बाबत सलाह लेने के लिए एक तकनीकी कमेटी गठित कर दी है। इसमें कार्यकारी अभियंता अनिल मेहता, डीआर भास्कर और रमेश बंसल शामिल हैं। इनकी रिपोर्ट पर ही तोड़फोड़ के बारे में कुछ तय हो पाएगा। ये बताएंगे कि क्या होटलों का अवैध हिस्सा तोड़ने से ज्यादा नुकसान तो नहीं हो जाएगा।
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि यदि कमेटी कहती है कि तोड़फोड़ करना खतरनाक है, जानमाल की हानि हो सकती है, तो निगम का अगला कदम होटल मालिकों को इससे भी ज्यादा परेशान कर सकता है, क्योंकि कार्रवाई तो करनी ही है।
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निगम के संयुक्त आयुक्त मुकेश सोलंकी का कहना है कि जितना अवैध निर्माण जुर्माना लगाने के बाद नियमित होने वाला था, उतना तो होटल संचालकों ने पैसा देकर नियमित करवा लिया है। अब वह अवैध निर्माण बच रहा है, जो जुर्माना देकर भी नियमित नहीं किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि सूचना अधिकार कार्यकर्ता केएल गेरा की याचिका पर बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने वाले होटलों पर शिकंजा कसा जा रहा है।
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अवैध रूप से बने हिस्से को खुद तोड़ने के लिए होटल संचालकों को समय दिया गया था, लेकिन तोड़फोड़ करने में संचालकों को मोह लग रहा है। उन्हें लग रहा है जिसे उन्होंने इतना पैसा लगाकर बनाया, उसे अपने हाथों कैसे तोड़ दें। खुद तोड़ने की मियाद खत्म हो गई, तो संचालकों ने कहा कि अवैध हिस्सा तोड़ने से पूरा स्ट्रक्चर हिल जाएगा।
नगर निगम प्रशासन ने तोड़फोड़ के बाबत सलाह लेने के लिए एक तकनीकी कमेटी गठित कर दी है। इसमें कार्यकारी अभियंता अनिल मेहता, डीआर भास्कर और रमेश बंसल शामिल हैं। इनकी रिपोर्ट पर ही तोड़फोड़ के बारे में कुछ तय हो पाएगा। ये बताएंगे कि क्या होटलों का अवैध हिस्सा तोड़ने से ज्यादा नुकसान तो नहीं हो जाएगा।
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नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि यदि कमेटी कहती है कि तोड़फोड़ करना खतरनाक है, जानमाल की हानि हो सकती है, तो निगम का अगला कदम होटल मालिकों को इससे भी ज्यादा परेशान कर सकता है, क्योंकि कार्रवाई तो करनी ही है।
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निगम के संयुक्त आयुक्त मुकेश सोलंकी का कहना है कि जितना अवैध निर्माण जुर्माना लगाने के बाद नियमित होने वाला था, उतना तो होटल संचालकों ने पैसा देकर नियमित करवा लिया है। अब वह अवैध निर्माण बच रहा है, जो जुर्माना देकर भी नियमित नहीं किया जा सकता है। उल्लेखनीय है कि सूचना अधिकार कार्यकर्ता केएल गेरा की याचिका पर बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करने वाले होटलों पर शिकंजा कसा जा रहा है।