निगम की बैठक का बहिष्कार

Faridabad Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
फरीदाबाद। सौ करोड़ का हिसाब न देने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के तीनों पार्षद शुक्रवार को नगर निगम की बैठक का बहिष्कार कर निकल गए।
नगर निगम की बैठक के शुरू होते ही भाजपा पार्षदों ने मांग की विकास के लिए आए 60 करोड़ व अन्य मदों से आए 40 करोड़ रुपये नगर निगम ने कहां खर्च किए, इसका हिसाब दिया जाए। भाजपा पार्षद ओमप्रकाश रक्षवाल, अजय और कुलदीप तेवतिया की इस मांग का अन्य पार्षदों ने भी समर्थन किया और कहा कि इस बारे में अध्यक्ष और निगम अधिकारियों को बताना चाहिए कि वह पैसा कहां खर्चा किया गया। इस पर अध्यक्ष अशोक अरोड़ा और निगम अधिकारियों ने कहा कि यह मुद्दा एजेंडे में शामिल नहीं है, इसलिए वह इस समय यह नहीं बता सकते कि पैसा कहां खर्च हुआ है। अध्यक्ष अरोड़ा ने कहा कि इस बारे में मंगलवार तक जवाब दे दिया जाएगा। लेकिन भाजपा पार्षदों ने कहा कि वह इसका जवाब मिले बगैर सदन नहीं चलने देंगे।
मेयर ने कहा कि एजेंडे से बैठक शुरू की जाए, इस पर पार्षद शोर करने लगे। बाद में अन्य पार्षदों ने भी एजेंडे पर बहस की अनुमति दे दी और भाजपा पार्षद बैठक का बहिष्कार कर चले गए। बहिष्कार में किसी अन्य पार्षद ने भाजपा पार्षदों का साथ नहीं दिया।

कुछ पार्षदों ने भी दी बहिष्कार की धमकी
पार्षद धीरेंद्र प्रताप ने प्रस्ताव रखा कि नगर निगम द्वारा सफाई का ठेका जोन के बजाय वार्ड वाइज किया जाए। जिससे सफाई व्यवस्था बेहतर हो। इस पर संयुक्त आयुक्त अनीता यादव ने कहा कि निगमायुक्त की मौजूदगी में ही इस पर विचार हो सकता है। पार्षद इस बात पर अड़ गए कि पहले इस प्रस्ताव को पास किया जाए और बाद में निगमायुक्त की मौजूदगी में चर्चा कर ली जाए। संयुक्त आयुक्त द्वारा निगमायुक्त की मौजूदगी में ही प्रस्ताव पास करने की बात कहने पर ज्यादातर पार्षद खड़े हो गए और कहा कि जब निगमायुक्त की मौजूदगी में ही प्रस्ताव होगा तो बैठक का औचित्य ही क्या है। ऐसे में वे बहिष्कार करते हैं। बाद में इस प्रस्ताव को पास कर दिया गया।

जमीन बेचने का हुआ विरोध
बैठक में पार्षद जगन डागर ने बुढैना में जमीन बेचे जाने का विरोध करते हुए कहा कि बगैर सदन में पास हुए नगर निगम ने इस जमीन की नीलामी कैसे कर दी। अन्य पार्षदों ने भी नगर निगम की जमीन बेचे जाने का विरोध किया। इस पर मेयर अरोड़ा ने कहा कि जमीन बेचने के प्रस्ताव पर पार्षदों के हस्ताक्षर हैं, जोकि नगर निगम बैठक में न कराकर बाहर कराए गए हैं। लेकिन वह यह नहीं बता पाए कि कौन-कौन से पार्षदों के इस पर हस्ताक्षर हैं।

हम नहीं रहना चाहते हरियाणा में
एनसीआर में होने के बाद भी फरीदाबाद में विकास न कराने का आरोप लगाते हुए पार्षद जगन डागर और धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि एनसीआर में होने का फरीदाबाद को कोई लाभ नहीं है। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि फरीदाबाद को हरियाणा में न रखा जाए, क्योंकि इसके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। अब वह हरियाणा में नहीं रहना चाहते। फरीदाबाद को दिल्ली में शामिल कराया जाए। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रपति के नाम एक पत्र निगमायुक्त की अनुपस्थित में उनकी जिम्मेदारी निभा रहीं संयुक्त आयुक्त को सौंपा।

मेयर ने ही जमा नहीं किया होर्डिंग टैक्स
सत्तारूढ़ दल से होर्डिंग टैक्स वसूलने की हिम्मत नगर निगम में नहीं है। इसका खुलासा नगर निगम की बैठक में शुक्रवार को तब हुआ, जब एक सवाल के जवाब में पता चला कि मेयर ने भी होर्डिंग लगाने का टैक्स नगर निगम में जमा नहीं किया। पार्षद रक्षवाल ने सवाल किया कि पंजाबी सम्मेलन के लिए मेयर द्वारा जो होर्डिंग्स लगाए गए थे, उनका कितना टैक्स नगर निगम को दिया तो मेयर अशोक अरोड़ा का जवाब था कि एक पैसा भी नहीं दिया। इस पर पार्षद ने कहा कि जब मेयर खुद टैक्स चोरी कर रहे हैं तो आम लोगों से क्या उम्मीद की जा सकती है। बाद में मेयर ने कहा कि वह इस टैक्स को नगर निगम में जमा करेंगे।

पांच लाख तक नहीं होंगे ई टेंडर
पार्षद योगेश ढींगड़ा ने कहा कि नगर निगम ने ई टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन बहुत से ठेकेदारों के हस्ताक्षर ही नगर निगम के पास नहीं हैं। जिसकी वजह से ई टेंडर नहीं हो पा रहे हैं और कई जरूरी कामों के लिए जनता परेशान हो रही है। ढींगड़ा ने कहा कि उनके वार्ड में ही ट्यूबवैल लगना है और आज उसकी टेंडर की आखिरी तारीख है। लेकिन ठेकेदारों के हस्ताक्षर न होने से कोई भी ठेका नहीं ले पाया। अब इसमें फिर से टेंडर की प्रक्रिया होगी और लोग पानी के लिए परेशान होंगे। योगेश ने मांग की कि छोटे कार्यों के लिए ई टेंडर आवश्यक न किया जाए और इसके टेंडर समाचार पत्रों में ही निकाल दिए जाए। इस पर निर्णय लिया कि पांच लाख रुपये तक के कार्य के ई टेंडर नहीं निकाले जाएंगे।

काम नहीं, वेतन नहीं की मांग
पार्षद योगेश ढींगड़ा ने कहा कि नगर निगम में कई दिनों से कर्मचारी धरने पर बैठे हैं। यह बताया जाए कि क्या धरने पर बैठे दिनों का भी इन कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। अन्य पार्षदों ने भी कहा कि कर्मचारी जिस दिन काम न करें, उस दिन का वेतन न दिया जाए।

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