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नहरें आने के बाद जलघर टैंकों को भरने की कवायद शुरू, आज से नहीं पीना पड़ेगा ट्यूबवेल का पानी
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फोटो-17 नालके जरिये जलघर टैंक में गिरता नहरी पानी।
- फोटो : CharkhiDadri
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पिछले करीब एक सप्ताह से पेयजल संकट झेल रहे शहरवासियों के लिए राहत भरी खबर है। नहरी पानी आने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग ने जलघरों के टैंकों को भरने की कवायद शुरू कर दी है। विभाग इस समय चंपापुरी जलघर के दो टैंकों को भरने में जुटा हुआ है। वहीं, वाटर स्टोरेज टैंकों में पानी पहुंचने से आज से विभाग सुचारु पेयजल आपूर्ति शुरू कर देगा और अब लोगों को ट्यूबवेल का पानी सप्लाई में नहीं दिया जाएगा।
पिछले एक सप्ताह से शहर में पेयजल का संकट बना हुआ था। कुछ दिन तो विभाग ने बोरिंग ट्यूबवेल के जरिए पानी की सप्लाई शुरू की लेकिन उसके बाद इस सप्लाई में भी कटौती करनी शुरू कर दी। विभाग ने शहर के दोनो जलघरों में एक दर्जन ट्यूबवेल बोरिंग कर रखे हैं। जब भी जलघर के वाटर टैंक पानी से खाली हो जाते हैं तो इन ट्यूबवेल के जरिए पानी की सप्लाई की जाती है। ट्यूबवेल के पानी में टीडीएस की मात्रा संतुलित रूप में नहीं होती जो स्वास्थ्य के लिहाज से अनुकूल नहीं माना जाता। शहर में दो जलघर हैं जिनमें गांव रामनगर और चंपापुरी कालोनी का जलघर शामिल है। चंपापुरी जलघर में लोहारू नहर के जरिए पानी डाला जाता है और बधवाना नहर से रामनगर जलघर में पानी डाला जाता है। चंपापुरी जलघर की क्षमता 2450 लाख लीटर और रामनगर जलघर की क्षमता 1250 लाख लीटर है। ऐसे में 10 रोज में दोनो जलघर पानी से फूल होने की उम्मीद है।
शनिवार से नियमित होगी पेयजल आपूर्ति
शहर में शनिवार से नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू हो जाएगी। शहर में छह बूस्टिंग स्टेशन हैं। रात के समय इन बूस्टिंग में पानी डाला जाता है ताकि सुबह घरों में पानी की सप्लाई की जा सके। विभाग सुबह साढ़े चार बजे ही पेयजल की आपूर्ति शुरू कर देता है जो देर रात 10 बजे तक जारी रहती है। एक दिन छोड़कर जोन वाइज पानी की आपूर्ति की जाती है। वहीं जिले में 58 जलघर हैं। विभाग इन सभी जलघरों में पानी पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। यह सभी जलघर नहरों से नालों के जरिए कनेक्ट हैं। नालों व अंडरग्राउंड पाइप लाइन के जरिए इन जलघरों में पानी डाला जाता है। पिछले मानसून सीजन में जिले की नहरों में लगातार 73 दिनों तक पानी चला था।
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जलघरों के टैंकों में नहरी पानी डालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शनिवार से शहर में नहरी पानी की सप्लाई ही की जाएगी। आगामी दस दिन के अंदर वाटर स्टोरेज टैंक पानी से लबालब हो जाएंगे।
पीके बंसल, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग
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पिछले एक सप्ताह से शहर में पेयजल का संकट बना हुआ था। कुछ दिन तो विभाग ने बोरिंग ट्यूबवेल के जरिए पानी की सप्लाई शुरू की लेकिन उसके बाद इस सप्लाई में भी कटौती करनी शुरू कर दी। विभाग ने शहर के दोनो जलघरों में एक दर्जन ट्यूबवेल बोरिंग कर रखे हैं। जब भी जलघर के वाटर टैंक पानी से खाली हो जाते हैं तो इन ट्यूबवेल के जरिए पानी की सप्लाई की जाती है। ट्यूबवेल के पानी में टीडीएस की मात्रा संतुलित रूप में नहीं होती जो स्वास्थ्य के लिहाज से अनुकूल नहीं माना जाता। शहर में दो जलघर हैं जिनमें गांव रामनगर और चंपापुरी कालोनी का जलघर शामिल है। चंपापुरी जलघर में लोहारू नहर के जरिए पानी डाला जाता है और बधवाना नहर से रामनगर जलघर में पानी डाला जाता है। चंपापुरी जलघर की क्षमता 2450 लाख लीटर और रामनगर जलघर की क्षमता 1250 लाख लीटर है। ऐसे में 10 रोज में दोनो जलघर पानी से फूल होने की उम्मीद है।
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शनिवार से नियमित होगी पेयजल आपूर्ति
शहर में शनिवार से नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू हो जाएगी। शहर में छह बूस्टिंग स्टेशन हैं। रात के समय इन बूस्टिंग में पानी डाला जाता है ताकि सुबह घरों में पानी की सप्लाई की जा सके। विभाग सुबह साढ़े चार बजे ही पेयजल की आपूर्ति शुरू कर देता है जो देर रात 10 बजे तक जारी रहती है। एक दिन छोड़कर जोन वाइज पानी की आपूर्ति की जाती है। वहीं जिले में 58 जलघर हैं। विभाग इन सभी जलघरों में पानी पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। यह सभी जलघर नहरों से नालों के जरिए कनेक्ट हैं। नालों व अंडरग्राउंड पाइप लाइन के जरिए इन जलघरों में पानी डाला जाता है। पिछले मानसून सीजन में जिले की नहरों में लगातार 73 दिनों तक पानी चला था।
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जलघरों के टैंकों में नहरी पानी डालने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। शनिवार से शहर में नहरी पानी की सप्लाई ही की जाएगी। आगामी दस दिन के अंदर वाटर स्टोरेज टैंक पानी से लबालब हो जाएंगे।
पीके बंसल, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग