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Charkhi Dadri News: 74 मिमी बारिश से 99,000 हेक्टेयर में खड़ी फसलों में 50 प्रतिशत तक नुकसान

Wed, 18 Sep 2024 06:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Wed, 18 Sep 2024 06:06 AM IST
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Up to 50 percent loss in standing crops
चरखी दादरी। जिले में 13 सितंबर को हुई 74 मिमी बारिश से 99,000 एकड़ क्षेत्र में खरीफ सत्र की विभिन्न फसलों में 50 प्रतिशत तक नुकसान होने का अनुमान है। सबसे ज्यादा नुकसान कपास की फसल में हुआ है। इस कारण किसानाें पर आर्थिक मार पड़ेगी। कृषि विभाग ने नुकसान के आकलन के लिए एडीओ, बीएओ और अन्य कर्मचारियों की 45 सदस्यीय टीम सर्वे के लिए लगी है। जल्द ही सर्वे रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी।
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बारिश से 43 गांवों में फसलों में ज्यादा नुकसान हुआ है लेकिन 14 सितंबर के बाद मौसम साफ हो गया था। अब दो दिन से पश्चिमी हवाएं चलने लगी हैं। पश्चिमी हवाओं को सभी प्रकार की फसलों के लिए फायदेमंद माना जाता है। इस हवा के चलते से फसलोंं को रोगों से छुटकारा मिल सकेगा। वहीं, फसलों का विकास एवं वृद्धि भी ठीक प्रकार से हो सकेगी।
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कपास के साथ बाजरा और धान का रकबा प्रभावित
जिले में बारिश से धान, बाजरा और कपास का रकबा प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग से मिली प्रारंभिक रिपोर्ट में कपास का 14,000 एकड़ क्षेत्र प्रभावित हुआ है। धान और बाजरा का रकबा इससे अधिक है।
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किस फसल में कितने नुकसान का आकलन
कपास में 25 से 50 प्रतिशत तक नुकसान का अनुमान है। इसी प्रकार बाजरा का 60,000 एकड़ क्षेत्र बारिश से प्रभावित हुआ है। बाजरा में 25 प्रतिशत के बीच नुकसान होने का आकलन कृषि विभाग ने किया है। इसी प्रकार 25,000 एकड़ में खड़ी धान की फसल में 25 प्रतिशत नुकसान होने का अनुमान है। धान का रकबा दादरी और बौंद कलां क्षेत्र में ज्यादा है। यह तराई क्षेत्र है। इस प्रकार जिले का कुल 99,000 एकड़ क्षेत्र बारिश से प्रभावित हुआ है।



- इन गांवों में ज्यादा नुकसान
गांव मौड़ी, बलकरा, मकड़ाना, मकड़ानी, रासीवास, पांडवान, चिड़िया, मंदोला आदि गांवों में फसलों में ज्यादा नुकसान का आकलन जताया जा रहा है। इन गांवों में बरसात में सबसे ज्यादा बारिश हुई है। इन गांवों में फसलें खेतों में बिछ गईं। जलभराव होने पर इन फसलों के गलने यानी नष्ट होने की आशंका है।

- विशेषज्ञ राय: तीन तक पानी भरा रहे तो खराब हो जाती है फसल
कृषि विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सिहाग के अनुसार कपास की फसल में यदि लगातार तीन दिन तक पानी का जमाव बना रहता है तो फसल नष्ट हो जाती है। नुकसान का आकलन करने के लिए कृषि विभाग ने 167 गांवों में 45 कर्मचारियों की टीम भेजी है। जल्द ही नुकसान की रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी।





कपास में सर्वाधिक 50 प्रतिशत तक नुकसान होने का अनुमान है। बाजरा में 25 प्रतिशत तक ही नुकसान का आकलन है। नुकसान का आकलन करने के लिए विभाग के 45 कर्मचारी खेतों में सर्वे कर रहे हैं। सर्वे पूरा होते ही इसकी रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेज दी जाएगी। - डॉ. जितेंद्र सिहाग, बीएओ, कृषि विभाग, चरखी दादरी।
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