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Charkhi Dadri News: स्वयं सहायता समूह की सदस्य महिलाओं को दिया लेखांकन का प्रशिक्षण

Tue, 19 Nov 2024 01:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Tue, 19 Nov 2024 01:09 AM IST
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Training on accounting was given to women
महिला क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण में मौजूद महिलाएं और अधिकारी।
बाढड़ा। हरियाणा आजीविका मिशन के तहत खंड बाढड़ा के गांवों में गठित स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस दौरान एबी फैलो नीति आयोग से मनीप्रकाश मुख्य वक्ता रहे। ट्रेनिंग का उद्देश्य समूह में शामिल महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ समूहों का लेखा-जोखा रखने के लिए प्रशिक्षित करना रहा।
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इस अवसर पर जिला प्रोग्राम एसोसिएट आजीविका मिशन से कविता ने महिलाओं का नॉलेज असेस्मेंट टेस्ट लिया। इसके तहत इस क्षेत्र में उनकी जानकारी का आकलन किया गया। तत्पश्चात उन्हें लेखांकन का प्रशिक्षण दिया गया। मनी प्रकाश ने कहा कि इस वर्ष 60 स्वयं सहायता समूहों के गठन का लक्ष्य दिया हुआ है। इसमें से अब तक 24 समूह ही बने हैं। वहीं, ब्लॉक की रिवॉल्विंग फंड की दर 81 प्रतिशत पाई गई है। कैश क्रेडिट लिंकेज के लिए केवल 21 समूहों ने ही आवेदन किया हुआ है।
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धान की पराली मिट्टी में मिलाने से होगी उपजाऊ शक्ति में बढ़ोतरी : उपायुक्त
चरखी दादरी। उपायुक्त मुनीष शर्मा ने जिले के किसानों का आह्वान किया कि वे फसल अवशेष प्रबंधन योजना का पूर्ण लाभ उठाएं। किसान कृषि यंत्रों से धान की पराली को मिट्टी में मिलाकर भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ा सकते हैं या स्ट्राबेलर मशीन से पराली की गांठें बनाकर सरकार की ओर से दी जा रही एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकते हैं। फसल अवशेष प्रबंधन की नीति अपनाकर आय का अतिरिक्त स्रोत बना सकते हैं।
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उन्होंने कहा कि किसानों को फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है। इस योजना के तहत किसानों को कृषि यंत्र सुपर सीडर, जीरो टीलेज मशीन, स्ट्राचोपर, हैपीसीडर एवं रिवर्सिबल प्लो अनुदान पर दिए जाते हैं। किसान इन कृषि यंत्रों का प्रयोग करके पराली को मिट्टी में मिलाकर जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ा सकते हैं या स्ट्रा बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाकर सरकार की ओर से दी जा रही एक हजार रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का लाभ उठा सकते हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे फसल अवशेष नहीं जलाएं, बल्कि, इसका समुचित प्रबंधन करके प्रति एकड़ एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में पाएं।
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