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सिविल अस्पताल समेत तीन सीएसची और 14 पीएचसी की बढ़ी 10 से 20 फीसदी ओपीडी
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सिविल अस्पताल में पहुंचे मरीज बारी आने का इंतजार करते हुए।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। बारिश के बाद से जिले के स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी बढ़ी गई है। प्रतिदिन सिविल अस्पताल समेत तीन सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और 14 पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) पर 500 से अधिक खांसी, जुकाम, बुखार और चर्म रोग से पीड़ित मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों की पिछले एक सप्ताह से ओपीडी सामान्य से 10 से 20 फीसदी बढ़ी है। सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी पिछले एक सप्ताह से 600 से पार चल रही है। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग ने बरसात के मौसम में लोगों से विशेष सावधानियां बरतने की अपील की है।
गत 17, 18 और 19 जुलाई को जिले में झमाझम बारिश हुई थी। इसके चलते गांवों के अलावा शहर के कई स्थानों पर जलभराव हो गया था। शहरी क्षेत्र के ज्यादातर लोगों को तो जलभराव की समस्या से निजात मिल चुकी है, लेकिन कई गांवों में अभी भी जलभराव की स्थिति बरकरार है। एक सप्ताह तक जलभराव होने से इस पर मच्छर पनप रहे हैं, जिससे जलजनित बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। बारिश के बाद जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी बढ़ गई है।
सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी गत 18 जुलाई के बाद 600 से अधिक चल रही है जबकि सामान्य दिनों में यह 450 से 500 के बीच रहती थी। छह सौ मरीजों में से प्रतिदिन 200 से अधिक खांसी, जुकाम, बुखार और चर्म रोग से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। वहीं, गोपी, बौंदकलां और झोझूकलां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की दैनिक ओपीडी पिछले एक सप्ताह से 80 के पार है जबकि सामान्य दिनों में यह 55 से 60 के बीच सीमित रहती है। बरसात के मौसम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की दैनिक ओपीडी भी 30 से पार चल रही है जबकि सामान्य दिनों में यहां ओपीडी संख्या बीस रहती है।
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विशेषज्ञों की खल रही कमी, जिला अस्पताल बना रेफर केंद्र
दादरी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दरकार है। जिले में विशेषज्ञों के दस पद खाली पड़े हैं। लंबे समय से इन पर नियुक्ति का इंतजार है। विशेषज्ञों के अभाव में दादरी जिला अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है। सड़क हादसे या गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीज को प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद रोहतक पीजीआई या अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।
जिले में 50 मरीज मिल रहे चर्मरोग के
जिले में प्रतिदिन चर्म रोग के 50 मरीज सामने आ रहे हैं। ये जिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उपचार ले रहे हैं। जलभराव भी बीमारियां बढ़ने का मुख्य कारण है। पिछले पांच दिनों में सिविल अस्पताल में 190 चर्म रोग से पीड़ित मरीज उपचार के लिए आ चुके हैं। प्रतिदिन इनकी संख्या 25 से 30 के बीच होती है।
बरसात के मौसम में क्या बरतें सावधानियां
- घर के चारों ओर पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें और रुकी हुई नालियों को साफ करें।
- अगर पानी जमा होने से रोकना संभव नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डाल दें।
- रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें।
- डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।
- स्वास्थ्य संबंधी कोई भी तकलीफ होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लें।
बरसात के मौसम में दैनिक ओपीडी का ग्राफ बढ़ा है। खांसी, जुकाम और बुखार के अलावा चर्म रोग के मरीज आ रहे हैं, जिन्हें सिविल अस्पताल में उपचार मिल रहा है। विशेषज्ञों की तैनाती के लिए डिमांड हमने हेड ऑफिस भेज रखी है।
-डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ
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गत 17, 18 और 19 जुलाई को जिले में झमाझम बारिश हुई थी। इसके चलते गांवों के अलावा शहर के कई स्थानों पर जलभराव हो गया था। शहरी क्षेत्र के ज्यादातर लोगों को तो जलभराव की समस्या से निजात मिल चुकी है, लेकिन कई गांवों में अभी भी जलभराव की स्थिति बरकरार है। एक सप्ताह तक जलभराव होने से इस पर मच्छर पनप रहे हैं, जिससे जलजनित बीमारियों को बढ़ावा मिल रहा है। बारिश के बाद जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी बढ़ गई है।
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सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी गत 18 जुलाई के बाद 600 से अधिक चल रही है जबकि सामान्य दिनों में यह 450 से 500 के बीच रहती थी। छह सौ मरीजों में से प्रतिदिन 200 से अधिक खांसी, जुकाम, बुखार और चर्म रोग से पीड़ित मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। वहीं, गोपी, बौंदकलां और झोझूकलां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की दैनिक ओपीडी पिछले एक सप्ताह से 80 के पार है जबकि सामान्य दिनों में यह 55 से 60 के बीच सीमित रहती है। बरसात के मौसम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की दैनिक ओपीडी भी 30 से पार चल रही है जबकि सामान्य दिनों में यहां ओपीडी संख्या बीस रहती है।
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विशेषज्ञों की खल रही कमी, जिला अस्पताल बना रेफर केंद्र
दादरी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दरकार है। जिले में विशेषज्ञों के दस पद खाली पड़े हैं। लंबे समय से इन पर नियुक्ति का इंतजार है। विशेषज्ञों के अभाव में दादरी जिला अस्पताल रेफर केंद्र बनकर रह गया है। सड़क हादसे या गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीज को प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद रोहतक पीजीआई या अन्य अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।
जिले में 50 मरीज मिल रहे चर्मरोग के
जिले में प्रतिदिन चर्म रोग के 50 मरीज सामने आ रहे हैं। ये जिला अस्पताल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी उपचार ले रहे हैं। जलभराव भी बीमारियां बढ़ने का मुख्य कारण है। पिछले पांच दिनों में सिविल अस्पताल में 190 चर्म रोग से पीड़ित मरीज उपचार के लिए आ चुके हैं। प्रतिदिन इनकी संख्या 25 से 30 के बीच होती है।
बरसात के मौसम में क्या बरतें सावधानियां
- घर के चारों ओर पानी जमा न होने दें, गड्ढों को मिट्टी से भर दें और रुकी हुई नालियों को साफ करें।
- अगर पानी जमा होने से रोकना संभव नहीं है तो उसमें पेट्रोल या केरोसिन ऑयल डाल दें।
- रूम कूलरों, फूलदानों का सारा पानी हफ्ते में एक बार और पक्षियों को दाना-पानी देने के बर्तन को रोज पूरी तरह से खाली करें, उन्हें सुखाएं और फिर भरें।
- डेंगू के मच्छर साफ पानी में पनपते हैं, इसलिए पानी की टंकी को अच्छी तरह बंद करके रखें।
- स्वास्थ्य संबंधी कोई भी तकलीफ होने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर चिकित्सक से परामर्श लें।
बरसात के मौसम में दैनिक ओपीडी का ग्राफ बढ़ा है। खांसी, जुकाम और बुखार के अलावा चर्म रोग के मरीज आ रहे हैं, जिन्हें सिविल अस्पताल में उपचार मिल रहा है। विशेषज्ञों की तैनाती के लिए डिमांड हमने हेड ऑफिस भेज रखी है।
-डॉ. संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ