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Charkhi Dadri News: अंकों की दौड़, नौकरी की चिंता और सोशल मीडिया का दबाव
Sat, 10 Oct 2026 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 10 Oct 2026 01:40 AM IST
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चरखी दादरी। चेहरे पर मुस्कान, हाथ में मोबाइल और आंखों में बड़े सपने…बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई देता हैं, लेकिन भीतर ही भीतर कोई युवा परीक्षा में अच्छे अंक लाने, मनचाही नौकरी पाने और भविष्य संवारने की चिंता से जूझ रहा होता है। किसी पर परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरने का दबाव है तो कोई सोशल मीडिया पर दूसरों की सफलता देखकर खुद को पीछे महसूस कर रहा है।
सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. प्रवेश विजय से बातचीत में उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे यही दबाव मानसिक तनाव का रूप ले सकता है। परेशानी तब बढ़ती है जब युवा अपनी तकलीफ किसी से साझा करने के बजाय उसे छिपाने लगते हैं। यह सवाल अहम है कि क्या हम अपने आसपास के लोगों के मन की परेशानी को पहचान पा रहे हैं। पिछले एक दो साल में सिविल अस्पताल में आने वाले अधिकतर मानसिक रोगियों में युवा शामिल हैं।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
मानसिक तनाव के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य थकान या खराब दिन समझकर टाल दिए जाते हैं। बार-बार नींद टूटना या नींद न आना, लगातार उदास रहना, चिड़चिड़ापन, लोगों से दूरी बनाना, पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि कम होना और एकाग्रता में कमी ऐसे संकेत हैं, जिन पर ध्यान देना चाहिए। कुछ लोगों को बेचैनी, घबराहट या लगातार नकारात्मक विचार भी परेशान कर सकते हैं।
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मोबाइल की चमक के पीछे छिपी तुलना भी बढ़ा रही परेशानी
मोबाइल और सोशल मीडिया ने लोगों को जोड़ने का काम किया है लेकिन इनका अत्यधिक इस्तेमाल तनाव का कारण भी बन सकता है। सोशल मीडिया पर अक्सर दूसरों की जिंदगी के अच्छे पल ही दिखाई देते हैं। युवा इन तस्वीरों और उपलब्धियों की तुलना अपनी वास्तविक जिंदगी से करने लगते हैं। इससे हीनभावना और असंतोष बढ़ सकता है। देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद का नियमित क्रम भी बिगड़ सकता है।
समय पर मदद लेना कमजोरी नहीं, समझदारी
मानसिक परेशानी का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति कमजोर है। जिस तरह शारीरिक बीमारी होने पर डॉक्टर से सलाह ली जाती है, उसी तरह लगातार मानसिक परेशानी होने पर विशेषज्ञ की मदद लेना भी जरूरी है। मनोचिकित्सक से बातचीत, काउंसिलिंग और जरूरत के अनुसार उपचार से तनाव से निपटने, नकारात्मक विचारों को समझने और रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इलाज हर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
मन की परेशानी को छिपाएं नहीं
सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. प्रवेश विजय से बातचीत के आधार पर मानसिक स्वास्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि परेशानी को शुरुआती स्तर पर पहचानना और समय रहते सहायता लेना जरूरी है। युवाओं को अपनी दिनचर्या नियमित रखने, पर्याप्त नींद लेने, संतुलित खानपान अपनाने, शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालने और अपनी भावनाएं विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करने की आदत डालनी चाहिए। पढ़ाई या कॅरिअर में असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने के रास्ते में आने वाली चुनौती है।
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सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. प्रवेश विजय से बातचीत में उन्होंने बताया कि धीरे-धीरे यही दबाव मानसिक तनाव का रूप ले सकता है। परेशानी तब बढ़ती है जब युवा अपनी तकलीफ किसी से साझा करने के बजाय उसे छिपाने लगते हैं। यह सवाल अहम है कि क्या हम अपने आसपास के लोगों के मन की परेशानी को पहचान पा रहे हैं। पिछले एक दो साल में सिविल अस्पताल में आने वाले अधिकतर मानसिक रोगियों में युवा शामिल हैं।
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इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
मानसिक तनाव के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य थकान या खराब दिन समझकर टाल दिए जाते हैं। बार-बार नींद टूटना या नींद न आना, लगातार उदास रहना, चिड़चिड़ापन, लोगों से दूरी बनाना, पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि कम होना और एकाग्रता में कमी ऐसे संकेत हैं, जिन पर ध्यान देना चाहिए। कुछ लोगों को बेचैनी, घबराहट या लगातार नकारात्मक विचार भी परेशान कर सकते हैं।
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मोबाइल की चमक के पीछे छिपी तुलना भी बढ़ा रही परेशानी
मोबाइल और सोशल मीडिया ने लोगों को जोड़ने का काम किया है लेकिन इनका अत्यधिक इस्तेमाल तनाव का कारण भी बन सकता है। सोशल मीडिया पर अक्सर दूसरों की जिंदगी के अच्छे पल ही दिखाई देते हैं। युवा इन तस्वीरों और उपलब्धियों की तुलना अपनी वास्तविक जिंदगी से करने लगते हैं। इससे हीनभावना और असंतोष बढ़ सकता है। देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद का नियमित क्रम भी बिगड़ सकता है।
समय पर मदद लेना कमजोरी नहीं, समझदारी
मानसिक परेशानी का मतलब यह नहीं कि व्यक्ति कमजोर है। जिस तरह शारीरिक बीमारी होने पर डॉक्टर से सलाह ली जाती है, उसी तरह लगातार मानसिक परेशानी होने पर विशेषज्ञ की मदद लेना भी जरूरी है। मनोचिकित्सक से बातचीत, काउंसिलिंग और जरूरत के अनुसार उपचार से तनाव से निपटने, नकारात्मक विचारों को समझने और रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इलाज हर व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय किया जाता है।
मन की परेशानी को छिपाएं नहीं
सिविल अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. प्रवेश विजय से बातचीत के आधार पर मानसिक स्वास्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि परेशानी को शुरुआती स्तर पर पहचानना और समय रहते सहायता लेना जरूरी है। युवाओं को अपनी दिनचर्या नियमित रखने, पर्याप्त नींद लेने, संतुलित खानपान अपनाने, शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालने और अपनी भावनाएं विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करने की आदत डालनी चाहिए। पढ़ाई या कॅरिअर में असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने के रास्ते में आने वाली चुनौती है।