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Charkhi Dadri News: पैर में गोली मारने से पहले सोनू की आंखों पर पुलिस ने बांधी थी पट्टी

Mon, 08 Jan 2024 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Mon, 08 Jan 2024 11:24 PM IST
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The police had blindfolded Sonu's eyes.
 चरखी दादरी में एसपी को शिकायत सौंपकर बाहर आए सोनू व कुलदीप के परिजन और ग्रामीण। 
चरखी दादरी। बौंदकलां थाना में दर्ज हुई एफआईआर नंबर 209 में सोमवार को दादरी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। ये सवाल और किसी ने नहीं बल्कि एफआईआर के आरोपी सोनू के परिजनों ने उठाए है। उनका कहना है कि पुलिस ने सोची-समझी साजिश के तहत पहले सोनू के पैर में गोली मारी और फिर इसे मुठभेड़ का नाम देकर वाहवाही लूटी।
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बिजेंद्र ने बताया कि उसके बेटे सोनू ने घटनाक्रम उन्हें बताया जिसके अनुसार सोनू की आंख पर पट्टी बांधकर उसे भागने के लिए कहा गया और मना करने पर पैर चौड़े करवाकर गोली मार दी गई। इन आरोपों में कितनी सच्चाई है इसका पता तो निष्पक्ष जांच के बाद ही लग पाएगा।
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आरोपी सोनू के पिता बिजेंद्र और कुलदीप के चचेरे भाई मनजीत ने बताया कि 14 नवंबर को साक्षी और मोहित को गोली मारने के बाद कुलदीप, सोनू और परमजीत उर्फ तोता फरार हो गए। इसके बाद पुलिस ने साक्षी के पिता कुलदीप की मां सवालो देवी, कुलदीप की पत्नी सुशीला, कुलदीप की बहन और बहनोई और घर में काम करने वाले अन्य व्यक्तियों को भी उठा लिया। वहीं, दूसरे आरोपी परमजीत की मां और दोनों बहन को भी पुलिस अपने साथ ले गयी और पूरी रात थाने मे रखा। अगले दिन गांव के मौजिज लोगों ने पुलिस के साथ बातचीत की और कहा कि जब भी आरोपी संपर्क मे आएंगे, उन्हें गिरफ्तार करवा देंगे। इस पर पुलिस ने आरोपियों के परिजनों को छोड़ दिया। इसके बाद पुलिस आरोपी कुलदीप के चाचा के लड़के अमित उर्फ मोनू को 15 नवंबर को अपने साथ थाने ले गई और उसी शाम उसे छोड़ दिया।
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बिजेंद्र और मनजीत ने बताया कि 18 नवंबर को उन्हें पता चला कि कुलदीप उसके मामा के लड़के राजा के घर गांव नौगांवा में ठहरा हुआ है। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचित किया। इसके बाद आरोपियों के परिजन ग्रामीणों व पुलिस टीम के साथ नौगांवा क्षेत्र पहुंचे और वहां कुलदीप मिल गया। इसके बाद सोनू और परमजीत उर्फ तोता को भी वहां बुलाया गया व परिजनों ने दिन के समय ही तीनों को पुलिस के हवाले कर दिया।

- 19 नवंबर को कुलदीप से करवाई फोन पर बात, फिर 10 लाख मांगे
शिकायतकर्ता बिजेंद्र ने बताया कि स्पेशल स्टाफ प्रभारी बलवान सिंह ने 19 नवंबर को कुलदीप की बात उसके चाचा संजय पुत्र मौजीराम से करवाई। कुलदीप ने कहा कि आप इमलोटा रोड पर आ जाओ, पुलिस के साथ कुछ सेटिंग की बात करनी है। उसके बाद संजय ने अपने भाई समुंदर पुत्र मौजीराम, फूल कुमार पुत्र ईश्वर, जगबीर पुत्र भरत सिंह वासी पिलाना और जय भगवान पुत्र रणधीर वासी अकेड़ी मदनपुर को पूरी बात बताई और ये चारों इमलोटा गए। वहां एक प्लॉट में उन्हें कुलदीप और चार-पांच पुलिसकर्मी मिले जिनमें इंस्पेक्टर बलवान सिंह व मंजीत ढाका भी थे। उस दौरान दस लाख रुपये मांगे गए और पुलिस कर्मचारियों की ओर से कहा गया कि कुलदीप, सोनू और परमजीत के अलावा इस मामले में अन्य किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

- शाम को ही इंस्पेक्टर को दे दिए रुपये
सोनू के पिता बिजेंद्र और कुलदीप के परिजनों ने बताया कि 19 नवंबर की शाम को ही उन्होंने इंस्पेक्टर बलवान सिंह को 10 लाख रुपये दे दिए। उस दौरान बलवन सिंह ने कहा कि ये रकम अधिकारियों को देनी है। पैसे देने वालों मे फूल कुमार, जगबीर व सतपाल वासी पिलाना और अकेड़ी मदनपुर निवासी जयभगवान थे। ये चारों स्पेशल स्टाफ प्रभारी को रुपये देकर वहां से आ गए।



- इन्हें भी भेजी शिकायत की प्रति
शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से एडवोकेट संजीव तक्षक ने बताया कि एसपी को भेजी गई शिकायत की प्रति आईजी, डीजीपी, मुख्यमंत्री, गृहमंत्री व केंद्र सरकार को भेजी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने झूठा मुकदमा बनाकर, बेवजह गोलियां चलाकर और डरा धमकाकर परिवार से नाजायज 10 लाख रुपये ऐंठे हैं जिस कारण परिजनों में रोष है। पुलिस के इस दमनकारी रवैये को देखकर वे चुप नहीं बैठेंगे। अगर उपरोक्त पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो दादरी की सामाजिक संगठनों एवं प्रतिनिधियों सहित सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।


- ये है पूरा मामला
पिलाना निवासी साक्षी ने उण निवासी मोहित से 6 मई को प्रेम विवाह किया था। इससे आहत साक्षी का पिता कुलदीप 14 नवंबर को सोनू व परमजीत उर्फ तोता को साथ लेकर उण स्थित मोहित के घर पहुंचा। वहां मोहित पर फायरिंग की गई और इसके बाद साक्षी को गोली मारने के बाद आरोपी उसे साथ ले गए। रास्ते में साक्षी को और गोलियां मारी गई और इसके बाद आरोपी उसे छोड़कर फरार हो गए। इस मामले में 18 नवंबर की रात पुलिस ने सोनू की गिरफ्तारी मुठभेड़ में दिखाई जबकि परिजनों के अनुसार उसे दिन में ही पुलिस के हवाले कर दिया था।
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