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Charkhi Dadri News: लाडो लक्ष्मी योजना के सत्यापन की रफ्तार धीमी
Mon, 29 Dec 2025 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 29 Dec 2025 01:56 AM IST
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जिला समाज कल्याण विभाग कार्यालय।
चरखी दादरी। सरकार की महत्वाकांक्षी दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के पंजीकरण को जिले में शुरू हुए तीन महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक पंजीकरण की स्थिति संतोषजनक नहीं मानी जा रही। सरकार की ओर से योजना के तहत दो किस्तें भी लाभार्थियों के खातों में डाली जा चुकी हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो योजना के तहत पात्र महिलाओं की संख्या करीब 38 हजार 100 है, जबकि अभी तक केवल 15 हजार 188 महिलाओं के आवेदनों का ही सत्यापन हो पाया है। यह आंकड़ा कुल पात्र लाभार्थियों का 50 प्रतिशत भी नहीं पहुंच पाया है। इसके कारण योजना के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए शुरू की थी योजना
दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं और महिलाओं को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। सरकार की मंशा है कि इस योजना के माध्यम से समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो और महिला सशक्तीकरण को मजबूती मिले। बावजूद इसके, जिले में पंजीकरण की धीमी गति योजना की सफलता में बड़ी बाधा बनती नजर आ रही है।
महिलाओं में जागरूकता की कमी
जानकारों का मानना है कि पंजीकरण कम होने का सबसे बड़ा कारण महिलाओं में जागरूकता की कमी है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अभी भी बड़ी संख्या में महिलाएं योजना की शर्तों, लाभ और पंजीकरण प्रक्रिया से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। कई महिलाओं को यह तक जानकारी नहीं है कि वे इस योजना के लिए पात्र हैं या उन्हें किन दस्तावेजों की आवश्यकता है। इसके अलावा डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया भी कुछ महिलाओं के लिए परेशानी बनी हुई है।
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प्रचार-प्रसार की कमी
सरकारी स्तर पर योजना को लेकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित दिखाई दे रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वयं सहायता समूहों और पंचायत स्तर पर बैठकों के माध्यम से महिलाओं को जागरूक करने की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि इन माध्यमों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए तो पंजीकरण की संख्या में तेजी लाई जा सकती है।
सत्यापन की प्रक्रिया लगातार चल रही है और आने वाले समय में आंकड़ों में सुधार की उम्मीद है। सत्यापन का काम मुख्यालय से होता है। वेरिफाई होने के बाद ही दादरी में डेटा मिलता है। जल्द यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है।
- जितेंद्र कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी, दादरी।
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महिलाओं को आर्थिक तौर पर मजबूत करने के लिए शुरू की थी योजना
दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की बालिकाओं और महिलाओं को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। सरकार की मंशा है कि इस योजना के माध्यम से समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हो और महिला सशक्तीकरण को मजबूती मिले। बावजूद इसके, जिले में पंजीकरण की धीमी गति योजना की सफलता में बड़ी बाधा बनती नजर आ रही है।
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महिलाओं में जागरूकता की कमी
जानकारों का मानना है कि पंजीकरण कम होने का सबसे बड़ा कारण महिलाओं में जागरूकता की कमी है। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अभी भी बड़ी संख्या में महिलाएं योजना की शर्तों, लाभ और पंजीकरण प्रक्रिया से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। कई महिलाओं को यह तक जानकारी नहीं है कि वे इस योजना के लिए पात्र हैं या उन्हें किन दस्तावेजों की आवश्यकता है। इसके अलावा डिजिटल पंजीकरण प्रक्रिया भी कुछ महिलाओं के लिए परेशानी बनी हुई है।
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प्रचार-प्रसार की कमी
सरकारी स्तर पर योजना को लेकर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित दिखाई दे रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वयं सहायता समूहों और पंचायत स्तर पर बैठकों के माध्यम से महिलाओं को जागरूक करने की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि इन माध्यमों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाए तो पंजीकरण की संख्या में तेजी लाई जा सकती है।
सत्यापन की प्रक्रिया लगातार चल रही है और आने वाले समय में आंकड़ों में सुधार की उम्मीद है। सत्यापन का काम मुख्यालय से होता है। वेरिफाई होने के बाद ही दादरी में डेटा मिलता है। जल्द यह आंकड़ा बढ़ने की उम्मीद है।
- जितेंद्र कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी, दादरी।