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Charkhi Dadri News: 360 एमएम की जगह अब तक जिले में हुई 279 एमएम बारिश
Mon, 07 Sep 2026 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 07 Sep 2026 01:22 AM IST
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गांव मांढी हरिया के खेतों में बाजरे की फसल।
चरखी दादरी। मानसून सीजन समाप्त होने में अब करीब एक सप्ताह शेष रह गया है। अब तक जिले में मात्र 279 एमएम बारिश दर्ज हुई है जबकि इस समय तक 360 एमएम बारिश होनी चाहिए थी। ऐसे में जिला सामान्य बारिश से 81 एमएम पीछे चल रहा है।
वहीं, मानसून की विदाई का समय भी अब 15 सितंबर तक माना जा रहा है। यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के पकाव से लेकर अगली रबी फसलों की बिजाई तक किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जिले में पिछले 22 दिनों से बारिश नहीं हुई है। लंबे समय से आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे किसानों को अब बारिश का इंतजार है। खेतों में खड़ी बाजरा, ग्वार, धान, कपास व मूंग की फसलों का पकाव प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
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कई क्षेत्रों में फसलें पकने की अवस्था में हैं जबकि पर्याप्त नमी नहीं मिलने से दाने पकने और फसल के विकास पर असर पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि यदि अब बारिश होती है तो खरीफ फसलों को काफी राहत मिल सकती है जबकि बारिश नहीं होने पर उत्पादन में कमी आने की आशंका है।
बारिश न होने से हालत खराब
किसान सुरेंद्र शर्मा, ढिल्लू राम, चांद सिंह व कलेराम ने बताया कि पकाव के समय बारिश नहीं होने से हालात खराब हो गए हैं। इसका पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अगर सितंबर माह में भी इंद्र देव नहीं बरसे तो अगली रबी की फसलों की बिजाई करना भी मुश्किल हो जाएगा। किसानों को सिंचाई यानी पलाव कर बिजाई करनी पड़ेगी जिससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ जाएगा। किसानों का कहना है कि जिले में नहरी पानी का पहले ही संकट बना रहता है।
इस समय पकाव के समय बारिश नहीं होने से औसत पैदावार घट सकती है। इस बार सामान्य से कम बारिश हुई है। इस समय बारिश की जरूरत है।
- डॉ.चंद्रभान, कृषि वैज्ञानिक।
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वहीं, मानसून की विदाई का समय भी अब 15 सितंबर तक माना जा रहा है। यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के पकाव से लेकर अगली रबी फसलों की बिजाई तक किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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जिले में पिछले 22 दिनों से बारिश नहीं हुई है। लंबे समय से आसमान की ओर टकटकी लगाए बैठे किसानों को अब बारिश का इंतजार है। खेतों में खड़ी बाजरा, ग्वार, धान, कपास व मूंग की फसलों का पकाव प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
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कई क्षेत्रों में फसलें पकने की अवस्था में हैं जबकि पर्याप्त नमी नहीं मिलने से दाने पकने और फसल के विकास पर असर पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि यदि अब बारिश होती है तो खरीफ फसलों को काफी राहत मिल सकती है जबकि बारिश नहीं होने पर उत्पादन में कमी आने की आशंका है।
बारिश न होने से हालत खराब
किसान सुरेंद्र शर्मा, ढिल्लू राम, चांद सिंह व कलेराम ने बताया कि पकाव के समय बारिश नहीं होने से हालात खराब हो गए हैं। इसका पैदावार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। अगर सितंबर माह में भी इंद्र देव नहीं बरसे तो अगली रबी की फसलों की बिजाई करना भी मुश्किल हो जाएगा। किसानों को सिंचाई यानी पलाव कर बिजाई करनी पड़ेगी जिससे प्रति एकड़ लागत खर्च बढ़ जाएगा। किसानों का कहना है कि जिले में नहरी पानी का पहले ही संकट बना रहता है।
इस समय पकाव के समय बारिश नहीं होने से औसत पैदावार घट सकती है। इस बार सामान्य से कम बारिश हुई है। इस समय बारिश की जरूरत है।
- डॉ.चंद्रभान, कृषि वैज्ञानिक।