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Charkhi Dadri News: आज से शुरू होगा 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट मेला
Fri, 30 Jan 2026 07:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 30 Jan 2026 07:22 PM IST
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चरखी दादरी। भारतीय हस्तशिल्प, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने वाला 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट मेला 31 से 15 फरवरी तक फरीदाबाद के सूरजकुंड परिसर में आयोजित किया जाएगा। हर वर्ष की भांति इस बार भी यह मेला भारत की सांस्कृतिक विविधता और शिल्प कौशल का भव्य उत्सव बनेगा।
उपायुक्त डाॅ. मुनीश नागपाल ने बताया कि इस वर्ष मेले की केंद्रीय थीम लोकल टू ग्लोबल रखी गई है, जिसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, पारंपरिक शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। यह थीम वोकल फॉर लोकल, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहलों की भावना को भी सशक्त रूप से दर्शाती है।
-- थीम कंट्री मिस्र, थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय
इस वर्ष मेले की थीम कंट्री के रूप में मिस्र को आमंत्रित किया गया है, जो अपनी प्राचीन सभ्यता, पिरामिड, कला, वास्तुकला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मिस्र से आए कलाकार और शिल्पकार अपने देश की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मेले को अंतरराष्ट्रीय रंग प्रदान करेंगे। थीम स्टेट के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करेंगे।
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-- हस्तशिल्प, संस्कृति और खानपान का अनूठा संगम
सूरजकुंड मेला केवल खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि भारत और विश्व की लोक संस्कृतियों का जीवंत संगम है। मेले में देश के विभिन्न राज्यों और अनेक विदेशी देशों से आए हजारों शिल्पकार अपनी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। मिट्टी, लकड़ी, धातु, वस्त्र, बांस, पत्थर और कांच से बने हस्तनिर्मित उत्पाद दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेंगे। इसके साथ ही मेले में लोकनृत्य, लोकसंगीत, सांस्कृतिक संध्या, लाइव क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन, कला कार्यशालाएं और पारंपरिक व्यंजनों के फूड कोर्ट आगंतुकों को भारत और विश्व के स्वादों से रूबरू कराएंगे।
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उपायुक्त डाॅ. मुनीश नागपाल ने बताया कि इस वर्ष मेले की केंद्रीय थीम लोकल टू ग्लोबल रखी गई है, जिसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, पारंपरिक शिल्पकारों, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। यह थीम वोकल फॉर लोकल, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया जैसी राष्ट्रीय पहलों की भावना को भी सशक्त रूप से दर्शाती है।
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इस वर्ष मेले की थीम कंट्री के रूप में मिस्र को आमंत्रित किया गया है, जो अपनी प्राचीन सभ्यता, पिरामिड, कला, वास्तुकला और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। मिस्र से आए कलाकार और शिल्पकार अपने देश की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से मेले को अंतरराष्ट्रीय रंग प्रदान करेंगे। थीम स्टेट के रूप में उत्तर प्रदेश और मेघालय अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करेंगे।
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सूरजकुंड मेला केवल खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि भारत और विश्व की लोक संस्कृतियों का जीवंत संगम है। मेले में देश के विभिन्न राज्यों और अनेक विदेशी देशों से आए हजारों शिल्पकार अपनी पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। मिट्टी, लकड़ी, धातु, वस्त्र, बांस, पत्थर और कांच से बने हस्तनिर्मित उत्पाद दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेंगे। इसके साथ ही मेले में लोकनृत्य, लोकसंगीत, सांस्कृतिक संध्या, लाइव क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन, कला कार्यशालाएं और पारंपरिक व्यंजनों के फूड कोर्ट आगंतुकों को भारत और विश्व के स्वादों से रूबरू कराएंगे।