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Charkhi Dadri News: अब राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को वाद्य यंत्र कला में बनाया जाएगा निपुण्
Sat, 12 Oct 2024 04:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 12 Oct 2024 04:31 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। अब राजकीय स्कूलों में कक्षा नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को वाद्य यंत्र बजाना सिखाया जाएगा। इसे ऑर्केस्ट्रा नाम दिया गया है। इन वाद्य यंत्रों में बांसुरी, तबला, हार्मोनियम आदि शामिल हैं। दो-दो विद्यार्थियों के समूह बनाकर वाद्य यंत्र बजाने की कला सिखाई जाएगी।
पहले स्कूली स्तर पर यह स्पर्धा शुरू होगी। उसके बाद जिला व राज्यस्तर पर करवाई जाएगी। कक्षा नौवीं से बारहवीं में विद्यार्थियों की कुल संख्या करीब पांच हजार है। जिले में इन स्कूलों की संख्या 64 है। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय की ओर से पत्र जारी किया गया है।
दरअसल, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए इस दिशा में विभाग काम शुरू करने जा रहा है। अब तक विद्यार्थी पाठयक्रम तक सीमित रहे हैं। अब उनको सभी प्रकार की सहगामी क्रियाओं में शामिल किया जा रहा है। ताकि, उनमें हर प्रकार का कला कौशल विकसित किया जा सके। दो साल पहले स्कूलों में संगीत का सामान पहुंचा था। अब इस सामान का सदुपयोग हो सकेगा। आमतौर पर विद्यार्थी संगीत विषय में खासी रुचि लेते हैं। संगीत से शरीर का हार्मोन भी संतुलित रहता है। यह तनाव को दूर भगाता है। आज विद्यार्थी पर मनोवैज्ञानिक दबाव ज्यादा बना हुआ है। माता-पिता की बढ़ती अपेक्षाओं के चलते उस पर पढ़ाई का ज्यादा दबाव बना हुआ है। इस लिहाज से ऐसी शिक्षण गतिविधियां जरूरी हो जाती हैं।
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चरखी दादरी। अब राजकीय स्कूलों में कक्षा नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को वाद्य यंत्र बजाना सिखाया जाएगा। इसे ऑर्केस्ट्रा नाम दिया गया है। इन वाद्य यंत्रों में बांसुरी, तबला, हार्मोनियम आदि शामिल हैं। दो-दो विद्यार्थियों के समूह बनाकर वाद्य यंत्र बजाने की कला सिखाई जाएगी।
पहले स्कूली स्तर पर यह स्पर्धा शुरू होगी। उसके बाद जिला व राज्यस्तर पर करवाई जाएगी। कक्षा नौवीं से बारहवीं में विद्यार्थियों की कुल संख्या करीब पांच हजार है। जिले में इन स्कूलों की संख्या 64 है। इस संबंध में शिक्षा निदेशालय की ओर से पत्र जारी किया गया है।
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दरअसल, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए इस दिशा में विभाग काम शुरू करने जा रहा है। अब तक विद्यार्थी पाठयक्रम तक सीमित रहे हैं। अब उनको सभी प्रकार की सहगामी क्रियाओं में शामिल किया जा रहा है। ताकि, उनमें हर प्रकार का कला कौशल विकसित किया जा सके। दो साल पहले स्कूलों में संगीत का सामान पहुंचा था। अब इस सामान का सदुपयोग हो सकेगा। आमतौर पर विद्यार्थी संगीत विषय में खासी रुचि लेते हैं। संगीत से शरीर का हार्मोन भी संतुलित रहता है। यह तनाव को दूर भगाता है। आज विद्यार्थी पर मनोवैज्ञानिक दबाव ज्यादा बना हुआ है। माता-पिता की बढ़ती अपेक्षाओं के चलते उस पर पढ़ाई का ज्यादा दबाव बना हुआ है। इस लिहाज से ऐसी शिक्षण गतिविधियां जरूरी हो जाती हैं।
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