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Haryana: चरखी दादरी में 64 गांवों में लिंगानुपात 1000 पार, अन्य गांवों के लिए पेश की नजीर

Wed, 05 Oct 2022 08:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह हनी सोनी, संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा)
हनी सोनी, संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Wed, 05 Oct 2022 08:01 AM IST
सार

जागरूकता के कारण लिंगानुपात में सुधार हुआ है।, 2021 में चरखी दादरी जिले को प्रदेश में दूसरा स्थान मिला था। इस साल 9 माह के अंदर 2054 लड़कों और 1907 लड़कियों ने जन्म लिया है। 

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Sex ratio crosses 1000 in 64 villages in Charkhi Dadri
लिंगानुपात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लिंगानुपात में हरियाणा के चरखी दादरी जिले के 64 गांवों ने प्रदेश और देश के अन्य गांवों के लिए नजीर पेश की है। ये वो गांव हैं जिनमें जागरूकता के कारण पिछले 9 माह में लिंगानुपात एक हजार से पार है। नौसवा ऐसा गांव है जहां बेटों के मुकाबले इस साल आठ गुना अधिक बेटियां जन्मी हैं। लिंगानुपात में जिले के 18 गांवों में ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि यहां आंकड़े 500 से नीचे हैं।

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महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल जनवरी से सितंबर 2022 तक जिले में 3961 बच्चों ने जन्म लिया है। इनमें 2054 लड़के और 1907 लड़कियां हैं। इस साल अब तक जिले का लिंगानुपात 928 है। पिछले पांच सालों की तुलना में दादरी जिले का लिंगानुपात डेढ़ गुना बढ़ा है।
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संवाददाता ने वर्ष 2021 में जिले के लिंगानुपात के आंकड़े जुटाए तो सामने आया कि गत वर्ष जिले में 6982 बच्चों ने जन्म लिया था। इनमें लड़कों की संख्या 3666 व लड़कियों की संख्या 3316 रही। पिछले वर्ष जिले का लिंगानुपात 905 था और प्रदेश में दादरी जिला दूसरे नंबर पर रहा था। लिंगानुपात में सुधार होने पर जिला महिला एवं बाल विकास विभाग को आठ मार्च को आयोजित कार्यक्रम में राज्य मंत्री कमलेश ढांडा ने सम्मानित किया था।
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अब अगर इस साल की स्थिति देखें तो लिंगानुपात 905 से बढ़कर 928 पहुंचा है। इस साल के 9 माह में जिले के चार गांवों में एक भी बेटा नहीं जन्मा है जबकि इन गांवों में आठ बेटियों ने जन्म लिया है। वहीं, तीन गांव ऐसे हैं जहां एक भी बेटी नहीं जन्मी है जबकि यहां जन्मे लड़के की संख्या तीन है। संवाद

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नौसवा में इस साल सबसे अधिक तो गोविंदपुरा, बिंद्रावन व हड़ौद खुर्द में सबसे कम लिंगानुपात
जिले के गांव नौसवा में जनवरी से सितंबर तक एक बेटा और आठ बेटियां जन्मी हैं। यहां लिंगानुपात 8000 है।  अख्त्यारपुरा में एक बेटा और छह बेटियां जन्मी हैं। छिल्लर में इस साल दो बेटे व सात बेटियां जन्मी हैं। गोविंदपुरा, बिंद्रावन व हड़ौदा खुर्द में इस साल लिंगानुपात जीरो है।

तीनों गांवों में गत 9 माह में एक-एक लड़के ने जन्म लिया है, जबकि लड़की एक भी पैदा नहीं हुई। 2021 के आंकड़ों पर गौर करें तो बिंद्रावन में 4 लड़कें व दो लड़कियां, हड़ौदा खुर्द में एक लड़का, जबकि गोविंदपुरा में 6 लड़के व चार लड़कियां पैदा हुई थीं।


इन गांवों में 500 से भी कम है लिंगानुपात
खेड़ी बूरा में लिंगानुपात 471, सांवड़ में 467, सौंप में 455, कासनी में 444, मंदोली में 438, बडेसरा, विकास नगर और पिचोपा कलां में 333, काकड़ोली हट्ठी में 286, मोरवाला, भारीवास, सिरसली और मांढी केहर में 250, मांढी हरिया में 222 और कारीदास में 111 है। वहीं, गोविंदपुरा, बिंद्रावन और हड़ौदा खुर्द में लिंगानुपात जीरो है।
 
लिंगानुपात बढ़ाने के लिए विभाग ने ये किए प्रयास

  •  जहां लिंगानुपात कम था और वहां जागरूकता अभियान चलाया।
  •  बेटियों को आंगनबाड़ी केंद्र पर सामूहिक जन्मदिन मनाया गया।
  •  कोरोना काल में भी कन्या जन्म पर जच्चा-बच्चा को स्वास्थ्य केंद्र पर सम्मानित किया।


2021 के मुकाबले 2022 में जिले के लिंगानुपात की स्थिति सुधरी है। 2021 में लिंगानुपात 905 था जो 2022 में सितंबर तक 925 है। जिन गांवों में  लिंगानुपात काफी कम है, उन पर विभाग का फोकस रहेगा। इन गांवों में जागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधियां करवाई जाएंगी। जिला प्रशासन के सहयोग से महिला एवं बाल विकास विभाग लिंगानुपात की स्थिति को और बेहतर करने के लिए प्रयासरत है।  - गीता सहारण, सीडीपीओ, महिला एवं बाल विकास विभाग

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