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Charkhi Dadri News: सैटेलाइट से हुई खरीफ की फसलों की गिरदावरी, अब पटवारी पाए जाने वाले अंतर का करेंगे मिलान
Mon, 14 Sep 2026 12:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 14 Sep 2026 12:33 AM IST
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एक खेत में तिल की फसल।
चरखी दादरी। जिले में खरीफ फसलों की सैटेलाइट गिरदावरी का कार्य पूरा हो गया है। अब पटवारी सैटेलाइट विवरण और जमीन के विवरण में अंतर का मिलान करेंगे। फर्क पाए जाने पर खेत में जाकर बोई गई फसल की पुष्टि की जाएगी। इस बार क्षेत्र में एक लाख 51 हजार 869 एकड़ में बाजरा की सर्वाधिक फसल है।
धान और कपास का रकबा करीब 38 हजार एकड़ है। मूंग, ग्वार, ग्वारी, कपास और ज्वार के अलावा सब्जी की खेती भी की गई है। सरकार ने पहले डिजिटल फसल सर्वेक्षण करवाना चाहा था। पटवारियों ने इसका विरोध करते हुए हड़ताल कर दी थी। इस कारण सरकार को डिजिटल फसल सर्वेक्षण का निर्णय वापस लेना पड़ा।
धान के खेतों में पानी के अधिक ठहराव से फसल सर्वेक्षण संभव नहीं हो सका। राजस्व विभाग हर साल रबी और खरीफ फसलों की गिरदावरी करवाता है। इसका उद्देश्य बिजाई का आंकड़ा तैयार करना है।
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कृषि योग्य रकबा और प्रमुख फसलें
जिला का कुल कृषि योग्य रकबा दो लाख 73 हजार एकड़ है। इसमें से दो लाख 60 हजार एकड़ क्षेत्र में खरीफ की फसलें बोई गई हैं। बाजरा की बिजाई एक लाख 51 हजार 869 एकड़ में की गई है। धान और कपास दोनों की बिजाई 19-19 हजार एकड़ में हुई है। किसान धान, मूंग, ज्वार, बाजरा, ग्वार और कपास जैसी फसलें उगाते हैं। अब बागवानी के प्रति भी किसानों का रुझान बढ़ रहा है। काफी संख्या में किसानों ने बाग लगा रखे हैं।
भूमि की प्रकृति और सिंचाई
जिले का 55 फीसदी क्षेत्र रेतीला है। रेतीले भागों में मूंग, ग्वार, कपास, ज्वार और बाजरा की फसलें होती हैं। शेष तराई क्षेत्र में खरीफ सीजन में धान की बिजाई की जाती है। रेतीले भागों में बिजली नलकूपों से सिंचाई की जाती है। वहीं, तराई भागों में नहरी पानी से सिंचाई हो जाती है। जिले की भूमि काफी उपजाऊ मानी जाती है।
गिरदावरी का महत्व और पंजीकरण
खरीफ की सभी फसलों की बिजाई 15 जुलाई 2026 तक पूरी हो चुकी थी। राजस्व विभाग ने अब सभी फसलों की गिरदावरी का काम पूरा कर लिया है। गिरदावरी रिपोर्ट से सरकार के पास कुल बिजाई का आंकड़ा पहुंचता है। इससे अनुमानित औसत पैदावार का आकलन भी होता है। फसलों का विवरण पोर्टल पर अपलोड है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज विवरण के अनुसार सरकार फसलों की सरकारी खरीद करती है। इस बार पोर्टल पर दो लाख चार हजार एकड़ का ही पंजीकरण हुआ है।
सैटेलाइट से खरीफ फसलों की गिरदावरी हो चुकी है। अब कुछ फसल के बिजाई के विवरण का मिलान न होने की वजह से पटवारी मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे।
- राजेश कुमार, सदर कानूनगो, राजस्व विभाग ।
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धान और कपास का रकबा करीब 38 हजार एकड़ है। मूंग, ग्वार, ग्वारी, कपास और ज्वार के अलावा सब्जी की खेती भी की गई है। सरकार ने पहले डिजिटल फसल सर्वेक्षण करवाना चाहा था। पटवारियों ने इसका विरोध करते हुए हड़ताल कर दी थी। इस कारण सरकार को डिजिटल फसल सर्वेक्षण का निर्णय वापस लेना पड़ा।
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धान के खेतों में पानी के अधिक ठहराव से फसल सर्वेक्षण संभव नहीं हो सका। राजस्व विभाग हर साल रबी और खरीफ फसलों की गिरदावरी करवाता है। इसका उद्देश्य बिजाई का आंकड़ा तैयार करना है।
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कृषि योग्य रकबा और प्रमुख फसलें
जिला का कुल कृषि योग्य रकबा दो लाख 73 हजार एकड़ है। इसमें से दो लाख 60 हजार एकड़ क्षेत्र में खरीफ की फसलें बोई गई हैं। बाजरा की बिजाई एक लाख 51 हजार 869 एकड़ में की गई है। धान और कपास दोनों की बिजाई 19-19 हजार एकड़ में हुई है। किसान धान, मूंग, ज्वार, बाजरा, ग्वार और कपास जैसी फसलें उगाते हैं। अब बागवानी के प्रति भी किसानों का रुझान बढ़ रहा है। काफी संख्या में किसानों ने बाग लगा रखे हैं।
भूमि की प्रकृति और सिंचाई
जिले का 55 फीसदी क्षेत्र रेतीला है। रेतीले भागों में मूंग, ग्वार, कपास, ज्वार और बाजरा की फसलें होती हैं। शेष तराई क्षेत्र में खरीफ सीजन में धान की बिजाई की जाती है। रेतीले भागों में बिजली नलकूपों से सिंचाई की जाती है। वहीं, तराई भागों में नहरी पानी से सिंचाई हो जाती है। जिले की भूमि काफी उपजाऊ मानी जाती है।
गिरदावरी का महत्व और पंजीकरण
खरीफ की सभी फसलों की बिजाई 15 जुलाई 2026 तक पूरी हो चुकी थी। राजस्व विभाग ने अब सभी फसलों की गिरदावरी का काम पूरा कर लिया है। गिरदावरी रिपोर्ट से सरकार के पास कुल बिजाई का आंकड़ा पहुंचता है। इससे अनुमानित औसत पैदावार का आकलन भी होता है। फसलों का विवरण पोर्टल पर अपलोड है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज विवरण के अनुसार सरकार फसलों की सरकारी खरीद करती है। इस बार पोर्टल पर दो लाख चार हजार एकड़ का ही पंजीकरण हुआ है।
सैटेलाइट से खरीफ फसलों की गिरदावरी हो चुकी है। अब कुछ फसल के बिजाई के विवरण का मिलान न होने की वजह से पटवारी मौके पर जाकर सत्यापन करेंगे।
- राजेश कुमार, सदर कानूनगो, राजस्व विभाग ।