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आरटीए टीम से मारपीट के बाद प्रशासन बैकफुट पर, 26 दिनों में एक भी ओवरलोड का चालान नहीं
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माह की शुरूआत में ओवरलोड वाहनों की चेकिंग करने वाली आरटीए टीम से मारपीट के बाद जिले में ओवरलोड वाहनों की चेकिंग थम गई है। घटना के 26 दिन बाद भी आरटीए ने किसी भी ओवरलोड वाहन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है जबकि शहर में खनन सामग्री की ढुलाई करने वाले वाहन धड़ल्ले से ओवरलोडिंग कर रहे हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर आरटीए सचिव का कहना है कि एडीसी के मौखिक आदेश पर ओवरलोड वाहनों की चेकिंग नहीं की जा रही है। ओवरलोडिंग करने वाले वाहन चालकों से भ
गौरतलब है कि गत तीन जुलाई को आरटीए टीम के साथ फॉरच्यूनर सवार कुछ लोगों ने मारपीट की थी। इस दौरान आरटीए दस्ते के वाहन चालक को घसीटकर नीचे उतारने के बाद मारपीट की गई थी जबकि सरकारी गाड़ी की चाबी भी छीनी गई थी। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी और टीम को अपने साथ लाई थी। पुलिस ने इस संबंध में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के चलते आरटीए स्टाफ फील्ड में नहीं जा रहा है। वहीं, आरटीए सचिव जिले सिंह का कहना है कि उन्हें एडीसी ने कुछ समय के लिए कार्रवाई न करने के आदेश दे रखे हैं।
ओवरलोडिंग को लेकर चरखी दादरी जिला पहले भी सुर्खियां बटोर चुका है। ओवरलोडिंग मामले में तत्कालीन अतिरिक्त उपायुक्त और उपायुक्त तक पर आरोप लगे थे। सीएम फ्लाइंग ने मिलीभगत के इस खेल का भांडाफोड़ किया था जिसमें तत्कालीन आरटीए सहायक सचिव मनीष मदान व क्लर्क की गिरफ्तारी हुई थी। गत तीन जुलाई को हुई मारपीट के बाद से प्रशासन ने ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से आरटीए ऑफिस के सामने से ही गुजर रहे हैं।
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अब चौबीसों घंटे हो रही ओवरलोडिंग : टीम के कार्रवाई न करने के चलते अब जिले में चौबीसों घंटे ओवरलोडिंग हो रही है। आलम यह है कि आरटीए विभाग के दफ्तर के सामने से सुबह, दोपहर, शाम और रात को ओवरलोड वाहन गुजरते हैं लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं की जा रही। जिले में प्रतिदिन करीब सात से आठ हजार डंपर चलते हैं जबकि चालान आठ से दस के ही होते हैं। वहीं, पिछले 26 दिनों से एक भी चालान नहीं हुआ है।
यूं हुआ एक करोड़ के सरकारी राजस्व का नुकसान : गत 24 जून से अगर तीन जुलाई तक 10 दिनों में चालीस लाख 48 हजार 300 रुपये का जुर्माना ओवरलोड वाहनों के मालिकों से वसूला गया। इस लिहाज से 26 दिनों में एक करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। प्रशासन के कार्रवाई न करने से ओवरलोड माफिया और सक्रिय है।
24 जून से तीन जुलाई तक ये है चालान की स्थिति
दिनांक - चालान संख्या- जुर्माना राशि
24 जून- 02- एक लाख
25 जून-10- छह लाख 88 हजार
26 जून-03- एक लाख 46 हजार 500
27 जून-08- चार लाख 96 हजार 500
29 जून--01- साठ हजार 500
30 जून-15- दस लाख 30 हजार 500
1 जुलाई-03- एक लाख 88 हजार
2 जुलाई-21- 14 लाख 79 हजार 500
3 जुलाई-2- 78 हजार
प्रशासन के बार-बार मौका देने का उठा रहे फायदा : जिला प्रशासन पिछले छह माह में क्रशर और ट्रांसपोर्टरों से दो बैठक कर चुका है। इस दौरान ओवरलोडिंग न करने संबंधी निर्देश भी दिए जा चुके हैं। गत दिनों बैठक में भी डीसी ने ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे लेकिन इसके बाद भी टीम ग्राउंड पर ही नहीं उतरी है। प्रशासन के सुधार कराने के लिए कार्रवाई करने की बजाय बार-बार मौका देने का ओवरलोड माफिया फायदा उठा रहे हैं।
मारपीट प्रकरण के बाद मुझे एडीसी ने कुछ दिनों तक ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई न करने के आदेश दिए थे। मारपीट प्रकरण के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के चलते टीम में शामिल अन्य कर्मचारियों ने भी कार्रवाई के लिए जाने से मना कर दिया है। -जिले सिंह, आरटीए सचिव।
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गौरतलब है कि गत तीन जुलाई को आरटीए टीम के साथ फॉरच्यूनर सवार कुछ लोगों ने मारपीट की थी। इस दौरान आरटीए दस्ते के वाहन चालक को घसीटकर नीचे उतारने के बाद मारपीट की गई थी जबकि सरकारी गाड़ी की चाबी भी छीनी गई थी। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी और टीम को अपने साथ लाई थी। पुलिस ने इस संबंध में विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के चलते आरटीए स्टाफ फील्ड में नहीं जा रहा है। वहीं, आरटीए सचिव जिले सिंह का कहना है कि उन्हें एडीसी ने कुछ समय के लिए कार्रवाई न करने के आदेश दे रखे हैं।
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ओवरलोडिंग को लेकर चरखी दादरी जिला पहले भी सुर्खियां बटोर चुका है। ओवरलोडिंग मामले में तत्कालीन अतिरिक्त उपायुक्त और उपायुक्त तक पर आरोप लगे थे। सीएम फ्लाइंग ने मिलीभगत के इस खेल का भांडाफोड़ किया था जिसमें तत्कालीन आरटीए सहायक सचिव मनीष मदान व क्लर्क की गिरफ्तारी हुई थी। गत तीन जुलाई को हुई मारपीट के बाद से प्रशासन ने ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई नहीं की है। ऐसे में ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से आरटीए ऑफिस के सामने से ही गुजर रहे हैं।
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अब चौबीसों घंटे हो रही ओवरलोडिंग : टीम के कार्रवाई न करने के चलते अब जिले में चौबीसों घंटे ओवरलोडिंग हो रही है। आलम यह है कि आरटीए विभाग के दफ्तर के सामने से सुबह, दोपहर, शाम और रात को ओवरलोड वाहन गुजरते हैं लेकिन इन पर कार्रवाई नहीं की जा रही। जिले में प्रतिदिन करीब सात से आठ हजार डंपर चलते हैं जबकि चालान आठ से दस के ही होते हैं। वहीं, पिछले 26 दिनों से एक भी चालान नहीं हुआ है।
यूं हुआ एक करोड़ के सरकारी राजस्व का नुकसान : गत 24 जून से अगर तीन जुलाई तक 10 दिनों में चालीस लाख 48 हजार 300 रुपये का जुर्माना ओवरलोड वाहनों के मालिकों से वसूला गया। इस लिहाज से 26 दिनों में एक करोड़ से अधिक के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है। प्रशासन के कार्रवाई न करने से ओवरलोड माफिया और सक्रिय है।
24 जून से तीन जुलाई तक ये है चालान की स्थिति
दिनांक - चालान संख्या- जुर्माना राशि
24 जून- 02- एक लाख
25 जून-10- छह लाख 88 हजार
26 जून-03- एक लाख 46 हजार 500
27 जून-08- चार लाख 96 हजार 500
29 जून--01- साठ हजार 500
30 जून-15- दस लाख 30 हजार 500
1 जुलाई-03- एक लाख 88 हजार
2 जुलाई-21- 14 लाख 79 हजार 500
3 जुलाई-2- 78 हजार
प्रशासन के बार-बार मौका देने का उठा रहे फायदा : जिला प्रशासन पिछले छह माह में क्रशर और ट्रांसपोर्टरों से दो बैठक कर चुका है। इस दौरान ओवरलोडिंग न करने संबंधी निर्देश भी दिए जा चुके हैं। गत दिनों बैठक में भी डीसी ने ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए थे लेकिन इसके बाद भी टीम ग्राउंड पर ही नहीं उतरी है। प्रशासन के सुधार कराने के लिए कार्रवाई करने की बजाय बार-बार मौका देने का ओवरलोड माफिया फायदा उठा रहे हैं।
मारपीट प्रकरण के बाद मुझे एडीसी ने कुछ दिनों तक ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई न करने के आदेश दिए थे। मारपीट प्रकरण के आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के चलते टीम में शामिल अन्य कर्मचारियों ने भी कार्रवाई के लिए जाने से मना कर दिया है। -जिले सिंह, आरटीए सचिव।