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Charkhi Dadri News: प्रोफेसर्स ने नारेबाजी कर किया रोष प्रदर्शन
Thu, 27 Mar 2025 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 27 Mar 2025 01:25 AM IST
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चरखी दादरी। जनता महाविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर्स ने हरियाणा कॉलेज टीचर एसोसिएशन के बैनर तले काला फीता लगाकर लगातार तीसरे दिन भी प्रदर्शन किया। प्रदर्शन ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ यूनिवर्सिटी और कॉलेज टीचर्स आर्गेनाइजेशन के आह्वान पर किया गया। प्रदर्शनकारी खेमा ने नारेबाजी कर रोष जताया।
प्रांतीय महासचिव एवं जनता कॉलेज टीचर एसोसिएशन के प्रधान डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि विरोध प्रदर्शन समस्त भारत में किया जा रहा है। शिक्षकों की लंबे समय से बहुत अधिक मांगें विचाराधीन हैं। सरकार गंभीर नहीं है।
इन मांगों में विशेष रूप से पुरानी पेंशन योजना, एमफिल और पीएचडी की एडवांस इंक्रीमेंट से संबंधित मामला, एसोसिएट और प्रोफेसर के प्रमोशन में पीएचडी की अनिवार्यता को हटाना आदि शामिल हैं।
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महाविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के रेजोल्यूशन 2025 और नई शिक्षा नीति 2020 को वापस लेना जैसी समस्याओं के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करना भी प्रदर्शन का उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में टीचिंग और नॉन टीचिंग के हजारों पद खाली होने की वजह से गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।
इस अवसर पर डॉ. सुशील बंसल, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. समीना, डॉ. सुनीता धतरवाल, डॉ. नीरज गर्ग, डॉ. राजकुमार गर्ग, डॉ. जयवीर सिंह, डॉ. सुशीला सैनी व डॉ. रोशनलाल आदि मौजूद रहे।
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प्रांतीय महासचिव एवं जनता कॉलेज टीचर एसोसिएशन के प्रधान डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि विरोध प्रदर्शन समस्त भारत में किया जा रहा है। शिक्षकों की लंबे समय से बहुत अधिक मांगें विचाराधीन हैं। सरकार गंभीर नहीं है।
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इन मांगों में विशेष रूप से पुरानी पेंशन योजना, एमफिल और पीएचडी की एडवांस इंक्रीमेंट से संबंधित मामला, एसोसिएट और प्रोफेसर के प्रमोशन में पीएचडी की अनिवार्यता को हटाना आदि शामिल हैं।
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महाविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ. सुरेंद्र सिंह ने कहा कि यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के रेजोल्यूशन 2025 और नई शिक्षा नीति 2020 को वापस लेना जैसी समस्याओं के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करना भी प्रदर्शन का उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में टीचिंग और नॉन टीचिंग के हजारों पद खाली होने की वजह से गुणात्मक शिक्षा को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता।
इस अवसर पर डॉ. सुशील बंसल, डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. समीना, डॉ. सुनीता धतरवाल, डॉ. नीरज गर्ग, डॉ. राजकुमार गर्ग, डॉ. जयवीर सिंह, डॉ. सुशीला सैनी व डॉ. रोशनलाल आदि मौजूद रहे।