{"_id":"67d30f9c414f40a2630198d7","slug":"problem-of-jamabandi-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1001-133306-2025-03-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: जमीन जमाबंदी में त्रुटियांं ठीक करवाने के लिए अब तक 4500 लोग खर्च कर चुके 45 लाख रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: जमीन जमाबंदी में त्रुटियांं ठीक करवाने के लिए अब तक 4500 लोग खर्च कर चुके 45 लाख रुपये
Thu, 13 Mar 2025 10:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 13 Mar 2025 10:32 PM IST
विज्ञापन
फोटो 01चरखी दादरी तहसील कार्यालय भवन। संवाद
::::::::::::::::::::
अमर उजाला विशेष:
अब तक जिले की जमाबंदी में हो चुके 4500 संशोधन, ऑनलाइन करते समय 2019 तक का पुराना ऑफलाइन रिकाॅर्ड अपलोड करने से बनी है दिक्कत, आमजन भुगत रहा खामियाजा
:::::::::::
चरखी दादरी। पिछले करीब पांच साल में जिले के 4500 लोग जमीन की जमाबंदी की त्रुटियां ठीक करवा चुके हैं। इसके एवज में उन्हें जेब ढीली करते हुए करीब 45 लाख रुपये खर्च करने पड़े। वहीं, वर्ष 2019 में जिले की जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया गया था। इसके बाद से लोग लगातार त्रुटियां ठीक करवा रहे हैं।
दरअसल, रिकॉर्ड ऑनलाइन करते हुए वर्ष 2019 तक का पुराना रिकॉर्ड अपडेट हुआ और उसके बाद के रिकार्ड को अपडेट नहीं किया गया। जमाबंदी तैयार करते समय भी पुराना रिकाॅर्ड लिया गया। इस वजह से जमाबंदी में हजारों त्रुटियां व खामियां रह गईं। इन खामियों की वजह से किसी की जमीन का रकबा कम तो किसी का ज्यादा दिखाया जा रहा है। लोगों को आए दिन संशोधन यानी बदर लिखवाकर खामियों को दूर करवाना पड़ रहा है।
वहीं, पटवारी से बदर लिखवाने के लिए फीस भी वहन करनी पड़ती है। एक बदर लिखवाने के लिए एक हजार से 1300 रुपये तक खर्च करना पड़ता है। ऐसे में 4500 जिलावासी अपनी जमीन के रिकाॅर्ड को ठीक करवाने के एवज में करीब 45 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं।
विज्ञापन
यह सिलसिला अभी जारी है। आए दिन पटवारियों के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं। उसके बाद तहसीलदार के बदर पर हस्ताक्षर होते हैं। फिर ये ऑनलाइन अपलोड होती है। तब जाकर जमाबंदी का रिकाॅर्ड ठीक हो पाता है।
- प्रतिदिन होती हैं 25 रजिस्ट्री
तहसीलदार कार्यालय में प्रतिदिन 20 से 25 जमीन एवं मकानों की रजिस्ट्री होती हैं। रजिस्ट्री बनवाने से पहले जमीन का पूरा रिकाॅर्ड तैयार करवाना होता है। ऐसे में रकबा कम या ज्यादा मिलने पर उसे ठीक करवाना पड़ता है। काफी संख्या में तो ऐसे मामले हैं, जो वास्तविक मालिक होते हुए भी राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में नहीं हैं। अब तक 4500 खामियां सामने आ चुकी हैं। बहुत सारे लोगों को तो इसका पता ही नहीं चल सका है। जब उन्हें जमीन से संबंधित कोई वास्ता पड़ता है तब उन्हें इसका आभास होता है।
- आमजन व राजस्व विभाग के लिए बनी सिरदर्द
किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जमीन की रजिस्ट्री बनवाने व खरीद-फरोख्त में बेहद कठिनाइयां आ रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऋण आदि के लिए जमाबंदी का होना जरूरी है। जमाबंदी में खामियों के चलते विभाग व प्रशासन भी तंग आ चुका है क्योंकि ऑनलाइन रिकाॅर्ड में डाटा फीड करने में दिक्कतें आती हैं। विभाग इस काम में तत्परता से जुटा है। जिले में करीब 12 ऐसे गांव हैं, जिनमें आजादी के दशक के बाद से ही चकबंदी ही नहीं हुई है। पुराना रिकाॅर्ड उर्दू में होने की वजह से नए पटवारी व गिरदावर को भी इसे समझने में दिक्कतें आ रही हैं। किसानों को आए दिन कृषि व राजस्व विभाग कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
- जहां चकबंदी कार्य पूरा, वहां रिकॉर्ड दुरुस्त
जिन गांवों में हाल ही चकबंदी का कार्य पूरा हो चुका है, उनका ऑनलाइन रिकाॅर्ड तो अपडेट हो गया है और उसमें कोई खामियां नहीं हैं। जमाबंदी का रिकाॅर्ड समय-समय पर अपडेट करना भी होता है क्योंकि जमीन की खरीद-फरोख्त भी होती रहती है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उम्मीदवार को दस्तावेज के रूप में मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री, इंतकाल व जमाबंदी भी जमा करवानी होती है। नगर परिषद से मकान के ऋण व अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए जमाबंदी की फर्द अवश्य जमा करवानी होती है तब जाकर उसे इन सुविधाओं का लाभ मिल पाता है।
वर्सन
जमाबंदी में जो खामियां हैं, उन्हें बदर लिखवाकर ठीक करवाया जा रहा है। जब 2019 में ऑफलाइन रिकार्ड को ऑनलाइन किया गया तब 2019 तक का केवल पुराना रिकाॅर्ड ही अपडेट कर दिया गया। इस वजह से यह समस्या बन रही है। जिस व्यक्ति को भी परेशानी आती है वह विभाग अधिकारियों से मिले। किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
-सज्जन कुमार, तहसीलदार, राजस्व विभाग
फोटो-
तहसील कार्यालय या दादरी शहर पटवारी कार्यालय
विज्ञापन
::::::::::::::::::::
अमर उजाला विशेष:
अब तक जिले की जमाबंदी में हो चुके 4500 संशोधन, ऑनलाइन करते समय 2019 तक का पुराना ऑफलाइन रिकाॅर्ड अपलोड करने से बनी है दिक्कत, आमजन भुगत रहा खामियाजा
:::::::::::
चरखी दादरी। पिछले करीब पांच साल में जिले के 4500 लोग जमीन की जमाबंदी की त्रुटियां ठीक करवा चुके हैं। इसके एवज में उन्हें जेब ढीली करते हुए करीब 45 लाख रुपये खर्च करने पड़े। वहीं, वर्ष 2019 में जिले की जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन किया गया था। इसके बाद से लोग लगातार त्रुटियां ठीक करवा रहे हैं।
दरअसल, रिकॉर्ड ऑनलाइन करते हुए वर्ष 2019 तक का पुराना रिकॉर्ड अपडेट हुआ और उसके बाद के रिकार्ड को अपडेट नहीं किया गया। जमाबंदी तैयार करते समय भी पुराना रिकाॅर्ड लिया गया। इस वजह से जमाबंदी में हजारों त्रुटियां व खामियां रह गईं। इन खामियों की वजह से किसी की जमीन का रकबा कम तो किसी का ज्यादा दिखाया जा रहा है। लोगों को आए दिन संशोधन यानी बदर लिखवाकर खामियों को दूर करवाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
वहीं, पटवारी से बदर लिखवाने के लिए फीस भी वहन करनी पड़ती है। एक बदर लिखवाने के लिए एक हजार से 1300 रुपये तक खर्च करना पड़ता है। ऐसे में 4500 जिलावासी अपनी जमीन के रिकाॅर्ड को ठीक करवाने के एवज में करीब 45 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं।
विज्ञापन
यह सिलसिला अभी जारी है। आए दिन पटवारियों के चक्कर भी लगाने पड़ते हैं। उसके बाद तहसीलदार के बदर पर हस्ताक्षर होते हैं। फिर ये ऑनलाइन अपलोड होती है। तब जाकर जमाबंदी का रिकाॅर्ड ठीक हो पाता है।
- प्रतिदिन होती हैं 25 रजिस्ट्री
तहसीलदार कार्यालय में प्रतिदिन 20 से 25 जमीन एवं मकानों की रजिस्ट्री होती हैं। रजिस्ट्री बनवाने से पहले जमीन का पूरा रिकाॅर्ड तैयार करवाना होता है। ऐसे में रकबा कम या ज्यादा मिलने पर उसे ठीक करवाना पड़ता है। काफी संख्या में तो ऐसे मामले हैं, जो वास्तविक मालिक होते हुए भी राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में नहीं हैं। अब तक 4500 खामियां सामने आ चुकी हैं। बहुत सारे लोगों को तो इसका पता ही नहीं चल सका है। जब उन्हें जमीन से संबंधित कोई वास्ता पड़ता है तब उन्हें इसका आभास होता है।
- आमजन व राजस्व विभाग के लिए बनी सिरदर्द
किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जमीन की रजिस्ट्री बनवाने व खरीद-फरोख्त में बेहद कठिनाइयां आ रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऋण आदि के लिए जमाबंदी का होना जरूरी है। जमाबंदी में खामियों के चलते विभाग व प्रशासन भी तंग आ चुका है क्योंकि ऑनलाइन रिकाॅर्ड में डाटा फीड करने में दिक्कतें आती हैं। विभाग इस काम में तत्परता से जुटा है। जिले में करीब 12 ऐसे गांव हैं, जिनमें आजादी के दशक के बाद से ही चकबंदी ही नहीं हुई है। पुराना रिकाॅर्ड उर्दू में होने की वजह से नए पटवारी व गिरदावर को भी इसे समझने में दिक्कतें आ रही हैं। किसानों को आए दिन कृषि व राजस्व विभाग कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
- जहां चकबंदी कार्य पूरा, वहां रिकॉर्ड दुरुस्त
जिन गांवों में हाल ही चकबंदी का कार्य पूरा हो चुका है, उनका ऑनलाइन रिकाॅर्ड तो अपडेट हो गया है और उसमें कोई खामियां नहीं हैं। जमाबंदी का रिकाॅर्ड समय-समय पर अपडेट करना भी होता है क्योंकि जमीन की खरीद-फरोख्त भी होती रहती है। सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उम्मीदवार को दस्तावेज के रूप में मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री, इंतकाल व जमाबंदी भी जमा करवानी होती है। नगर परिषद से मकान के ऋण व अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए जमाबंदी की फर्द अवश्य जमा करवानी होती है तब जाकर उसे इन सुविधाओं का लाभ मिल पाता है।
वर्सन
जमाबंदी में जो खामियां हैं, उन्हें बदर लिखवाकर ठीक करवाया जा रहा है। जब 2019 में ऑफलाइन रिकार्ड को ऑनलाइन किया गया तब 2019 तक का केवल पुराना रिकाॅर्ड ही अपडेट कर दिया गया। इस वजह से यह समस्या बन रही है। जिस व्यक्ति को भी परेशानी आती है वह विभाग अधिकारियों से मिले। किसी भी व्यक्ति को परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
-सज्जन कुमार, तहसीलदार, राजस्व विभाग
फोटो-
तहसील कार्यालय या दादरी शहर पटवारी कार्यालय