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मन की बात: आप अच्छा काम कर रहे हो प्रदीप, लगे रहो, जुटे रहो... PM ने बढ़ाया चरखी दादरी के प्रदीप मनोबल
Mon, 01 May 2023 02:18 AM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Mon, 01 May 2023 02:18 AM IST
सार
झोझूकलां के प्रदीप सांगवान ने हिमाचल-प्रदेश के 15 गांवों के लोगों को कचरा निस्तारण के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बोलेरो तक बेची लेकिन मुहिम रुकने नहीं दी। 2020 में पीएम नरेंद्र मोदी ने प्रदीप सांगवान की मुहिम का जिक्र किया था, इस बार दस मिनट तक फोन पर की बात।
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मन की बात कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करने वाले प्रदीप सांगवान।
- फोटो : संवाद
विस्तार
चरखी दादरी के झोझूकलां निवासी प्रदीप सांगवान को 30 अप्रैल का दिन सदा याद रहेगा। हिमाचल-प्रदेश में कचरा निस्तारण मुहिम चलाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में प्रदीप सांगवान से 10 मिनट फोन पर बात कर उनका मनोबल बढ़ाया। पीएम ने प्रदीप से कहा कि आप अच्छा काम कर रहे हो। लगे रहो, जुटे रहो।
संवाददाता से बातचीत में प्रदीप सांगवान ने बताया कि 2020 में आयोजित मन की बात कार्यक्रम में भी उनकी मुहिम का पीएम ने जिक्र किया था, लेकिन उस दौरान पीएम से बात नहीं हुई थी। इस बार यह मौका मिला और पीएम के मनोबल बढ़ाने से वो बेहद गदगद हैं।
प्रदीप सांगवान ने बताया कि 2016 में उन्होंने हिमाचल-प्रदेश में कचरा निस्तारण का काम शुरू किया था। शुरुआत में काफी अड़चनें आईं, लेकिन हार नहीं मानी। 2020 के बाद राह आसान होती चली गई और अब तक उनकी संस्था हीलिंग हिमालय हिमाचल-प्रदेश में पांच एमआरएफ (मेटिरियल रिकवरी फेसिलिटी) सेंटर बना चुकी हैं। इन पांचों सेंटर में प्रतिदिन हिमाचल-प्रदेश के 15 गांवों का कचरा रिसाइकिल होता है और इसके बाद ग्राम पंचायत को आर्थिक फायदा होता है।
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सेना में जाने का था सपना, प्रकृति से था विशेष लगाव
प्रदीप सांगवान ने बताया कि पिता सूरजभान की तरह वो भी सेना में एनडीए के जरिये जाना जाते थे। किन्हीं कारणों से ये सपना पूरा नहीं हो पााया। प्रदीप ने बताया कि उन्हें प्रकृति से बेहद लगाव है और इसके चलते उन्होंने हिमाचल-प्रदेश से कचरा निस्तारण की मुहिम शुरू की।
हरियाणा में रहेगा अगला फोकस, एमआरएफ सेंटर की तैयारी
प्रदीप सांगवान का कहना है कि हिमाचल-प्रदेश के बाद उनका अब हरियाणा पर फोकस है। हरियाणा में भी इसी तर्ज पर संगठन काम करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत पैतृक गांव झोझूकलां से होगी। इसके लिए घरों से डोर-टू-डोर कचरा उठान के लिए वाहनों की खरीद की जा चुकी है। अगस्त तक एमआरएफ सेंटर शुरू करने की योजना है और यह संगठन का प्रदेश में पहला प्रयास होगा।
दोस्तों से मांगी मदद, बोलेरो तक बेची, प्रदीप ने नहीं रुकने दी मुहिम
मन में कुछ करने की चाहत हो तो विकट परिस्थितियां भी आड़े नहीं आतीं। हिमाचल-प्रदेश में कचरा निस्तारण के क्षेत्र में काम करने वाले झोझूकलां निवासी प्रदीप सांगवान इसकी बानगी हैं। प्रदीप ने विकट परिस्थितियों से गुजरते हुए पर्यावरण हित के लिए जो काम किया, उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुरीद हो गए। उन्होंने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में प्रदीप सांगवान से दस मिनट तक फोन पर बात की।
प्रदीप सांगवान ने बताया कि 2016 में उन्होंने पहाड़ों से कचरा एकत्र करने की मुहिम शुरू की। शुरुआत में इस मुहिम से लोगों को जोड़ने में काफी दिक्कतें आईं। इतना ही नहीं आर्थिक संकट भी रहा। इसके बावजूद कुछ साथियों के सहयोग से मुहिम जारी रखी। प्रदीप के अनुसार 2020 तक हीलिंग हिमालय फाउंडेशन टीम ने काफी कचरा एकत्र कर लिया। इसके बाद एमआरएफ (मेटिरियल रिकवरी फेसिलिटी) सेंटर लगाने की कवायद शुरू की गई। इसके लिए दोस्तों से मदद मांगी, जबकि प्रदीप को अपनी बोलेरो तक बेचनी पड़ गई।
प्रदीप सांगवान ने बताया कि उनकी फाउंडेशन हिमाचल-प्रदेश के किन्नौर में दो, नारकंडा, ताबो, मंसारी में एक-एक मेटिरियल रिकवरी फेस्लिटी (एमआरएफ) सेंटर स्थापित कर चुकी है। हिमाचल-प्रदेश में छठा एमआरएफ सेंटर कसोल में शुरू करने की योजना है। प्रदीप ने बताया कि इन पांचों एमआरएफ सेंटर से हिमाचल-प्रदेश के 15 गांव जुड़े हैं। इन गांवों से एमआरएफ सेंटर पर अब जो कचरा पहुंचता है और 100 प्रतिशत पृथक होता है जिससे उसके निस्तारण में काफी आसानी होती है।
जुलाई से वर्किंग में हैं सभी एमआरएफ सेंटर
प्रदीप सांगवान ने बताया कि हिमाचल-प्रदेश में स्थापित किए गए एमआरएफ सेंटर गत जुलाई से वर्किंग में हैं। यहां प्रतिदिन साढ़े 4 टन कचरा निस्तारित होता है। पिछले करीब 9 माह में फाउंडेशन 1400 टन कचरे का निस्तारण करवा चुकी है, जो अपने आप में बड़ी बात है।
झोझूकलां में भी संगठन करेगा मुहिम शुरू
प्रदीप सांगवान ने बताया कि अपने पैतृक गांव झोझूकलां में भी उनकी एमआरएफ सेंटर बनाने की योजना है। इसके तहत घरों से डोर-टू-कचरा उठाने के लिए वाहन खरीदे जा चुके हैं। फिलहाल एमआरएफ सेंटर के लिए जगह चयन की कोशिश जारी है। फाउंडेशन का प्रयास है कि झोझूकलां में 12 गांवों का कलस्टर बनाकर एमआरएफ सेंटर अगस्त तक शुरू कर दिया जाए।
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संवाददाता से बातचीत में प्रदीप सांगवान ने बताया कि 2020 में आयोजित मन की बात कार्यक्रम में भी उनकी मुहिम का पीएम ने जिक्र किया था, लेकिन उस दौरान पीएम से बात नहीं हुई थी। इस बार यह मौका मिला और पीएम के मनोबल बढ़ाने से वो बेहद गदगद हैं।
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प्रदीप सांगवान ने बताया कि 2016 में उन्होंने हिमाचल-प्रदेश में कचरा निस्तारण का काम शुरू किया था। शुरुआत में काफी अड़चनें आईं, लेकिन हार नहीं मानी। 2020 के बाद राह आसान होती चली गई और अब तक उनकी संस्था हीलिंग हिमालय हिमाचल-प्रदेश में पांच एमआरएफ (मेटिरियल रिकवरी फेसिलिटी) सेंटर बना चुकी हैं। इन पांचों सेंटर में प्रतिदिन हिमाचल-प्रदेश के 15 गांवों का कचरा रिसाइकिल होता है और इसके बाद ग्राम पंचायत को आर्थिक फायदा होता है।
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सेना में जाने का था सपना, प्रकृति से था विशेष लगाव
प्रदीप सांगवान ने बताया कि पिता सूरजभान की तरह वो भी सेना में एनडीए के जरिये जाना जाते थे। किन्हीं कारणों से ये सपना पूरा नहीं हो पााया। प्रदीप ने बताया कि उन्हें प्रकृति से बेहद लगाव है और इसके चलते उन्होंने हिमाचल-प्रदेश से कचरा निस्तारण की मुहिम शुरू की।
हरियाणा में रहेगा अगला फोकस, एमआरएफ सेंटर की तैयारी
प्रदीप सांगवान का कहना है कि हिमाचल-प्रदेश के बाद उनका अब हरियाणा पर फोकस है। हरियाणा में भी इसी तर्ज पर संगठन काम करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसकी शुरुआत पैतृक गांव झोझूकलां से होगी। इसके लिए घरों से डोर-टू-डोर कचरा उठान के लिए वाहनों की खरीद की जा चुकी है। अगस्त तक एमआरएफ सेंटर शुरू करने की योजना है और यह संगठन का प्रदेश में पहला प्रयास होगा।
दोस्तों से मांगी मदद, बोलेरो तक बेची, प्रदीप ने नहीं रुकने दी मुहिम
मन में कुछ करने की चाहत हो तो विकट परिस्थितियां भी आड़े नहीं आतीं। हिमाचल-प्रदेश में कचरा निस्तारण के क्षेत्र में काम करने वाले झोझूकलां निवासी प्रदीप सांगवान इसकी बानगी हैं। प्रदीप ने विकट परिस्थितियों से गुजरते हुए पर्यावरण हित के लिए जो काम किया, उसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मुरीद हो गए। उन्होंने रविवार को मन की बात कार्यक्रम में प्रदीप सांगवान से दस मिनट तक फोन पर बात की।
प्रदीप सांगवान ने बताया कि 2016 में उन्होंने पहाड़ों से कचरा एकत्र करने की मुहिम शुरू की। शुरुआत में इस मुहिम से लोगों को जोड़ने में काफी दिक्कतें आईं। इतना ही नहीं आर्थिक संकट भी रहा। इसके बावजूद कुछ साथियों के सहयोग से मुहिम जारी रखी। प्रदीप के अनुसार 2020 तक हीलिंग हिमालय फाउंडेशन टीम ने काफी कचरा एकत्र कर लिया। इसके बाद एमआरएफ (मेटिरियल रिकवरी फेसिलिटी) सेंटर लगाने की कवायद शुरू की गई। इसके लिए दोस्तों से मदद मांगी, जबकि प्रदीप को अपनी बोलेरो तक बेचनी पड़ गई।
प्रदीप सांगवान ने बताया कि उनकी फाउंडेशन हिमाचल-प्रदेश के किन्नौर में दो, नारकंडा, ताबो, मंसारी में एक-एक मेटिरियल रिकवरी फेस्लिटी (एमआरएफ) सेंटर स्थापित कर चुकी है। हिमाचल-प्रदेश में छठा एमआरएफ सेंटर कसोल में शुरू करने की योजना है। प्रदीप ने बताया कि इन पांचों एमआरएफ सेंटर से हिमाचल-प्रदेश के 15 गांव जुड़े हैं। इन गांवों से एमआरएफ सेंटर पर अब जो कचरा पहुंचता है और 100 प्रतिशत पृथक होता है जिससे उसके निस्तारण में काफी आसानी होती है।
जुलाई से वर्किंग में हैं सभी एमआरएफ सेंटर
प्रदीप सांगवान ने बताया कि हिमाचल-प्रदेश में स्थापित किए गए एमआरएफ सेंटर गत जुलाई से वर्किंग में हैं। यहां प्रतिदिन साढ़े 4 टन कचरा निस्तारित होता है। पिछले करीब 9 माह में फाउंडेशन 1400 टन कचरे का निस्तारण करवा चुकी है, जो अपने आप में बड़ी बात है।
झोझूकलां में भी संगठन करेगा मुहिम शुरू
प्रदीप सांगवान ने बताया कि अपने पैतृक गांव झोझूकलां में भी उनकी एमआरएफ सेंटर बनाने की योजना है। इसके तहत घरों से डोर-टू-कचरा उठाने के लिए वाहन खरीदे जा चुके हैं। फिलहाल एमआरएफ सेंटर के लिए जगह चयन की कोशिश जारी है। फाउंडेशन का प्रयास है कि झोझूकलां में 12 गांवों का कलस्टर बनाकर एमआरएफ सेंटर अगस्त तक शुरू कर दिया जाए।