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Charkhi Dadri News: खरीफ सीजन में गत वर्ष की तुलना में 69 हजार एकड़ फसल का पंजीकरण हुआ कम
Wed, 09 Sep 2026 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 09 Sep 2026 01:22 AM IST
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चरखी दादरी। खरीफ सीजन में गत वर्ष की तुलना में 69 हजार एकड़ फसल का पंजीकरण कम हुआ है। इस बार मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल कम समय तक खुलने की वजह से यह दिक्कत आई है। मौजूदा सीजन में 47,593 किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण हुआ है।
इस प्रकार कुल दो लाख चार हजार 838 एकड़ फसल का पंजीकरण हुआ है जबकि जिले का कुल कृषि योग्य रकबा दो लाख 73 हजार एकड़ है। बाजरा का सर्वाधिक एक लाख 51 हजार 869 एकड़ रकबा पंजीकृत हुआ है। कपास 19 हजार 836 व धान की फसल का पंजीकरण 19 हजार एकड़ का हुआ है। उधर, किसान संगठनों ने पोर्टल फिर से खोलने की मांग की है।
सरकार की ओर से अब फसलों की गिरदावरी करवाई जानी है ताकि फसल की वास्तविकता का पता चल सके। इसके तहत फसल की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर ही सरकार विभिन्न फसलों की सरकारी खरीद की व्यवस्था करती है। ऐसे में किसानों के लिए फसल का पंजीकरण करवाना जरूरी होता है। पंजीकरण में फसल का गलत विवरण दर्ज होने या मौके पर फसल नहीं होने की स्थिति में सरकारी खरीद से संबंधित प्रक्रिया में परेशानी आती है।
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सैटेलाइट का लिया जा रहा सहारा
फसल पंजीकरण के डाटा के मिलान के लिए सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और पटवारी के रिकार्ड का सहारा लिया जा रहा है। सैटेलाइट के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि जिस खेत में फसल का पंजीकरण दर्शाया गया है वहां वास्तव में खेती की गई है या नहीं। जिले में खरीफ सीजन के दौरान बाजरा, धान, ज्वार, ग्वार, मूंग, कपास और तिलहन समेत कई फसलों की खेती की जाती है।
इनमें बाजरा प्रमुख फसल है और इस बार बाजरा एक लाख 51 हजार 869 एकड़ क्षेत्र में है। इसके अलावा किसानों ने कपास, ग्वार, मूंग, ज्वार और तिलहन की भी खेती की है। इन फसलों का सही रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विभाग की ओर से डाटा मिलान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
सरकारी खरीद के लिए जरूरी है सही डाटा
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल सरकार के लिए किसानों और उनकी फसलों का रिकॉर्ड तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी डाटा के आधार पर सरकारी खरीद की जाती हैं। इसलिए विभाग का प्रयास है कि पोर्टल पर दर्ज प्रत्येक किसान की फसल और क्षेत्रफल का सत्यापन किया जाए। सरकार जब भी मुआवजा देती है तो इसी डाटा को आधार माना जाता है। इस बार गत साल की तुलना में 69 हजार एकड़ फसल का पंजीकरण कम हुआ है।
कोट
इस संबंध में भाकियू के अध्यक्ष हरपाल सिंह भांडवा का कहना है कि सरकार को फसल पंजीकरण के लिए पोर्टल फिर से खोलना चाहिए ताकि वंचित रहे किसान फसल का विवरण दर्ज करवा सकें।
वर्सन:
इस बार गत वर्ष की तुलना पंजीकरण कम हुआ है। सरकारी खरीद इसी डाटा के आधार पर होगी। किसानों को समय रहते फसल का पंजीकरण करवाना चाहिए था।-- विनय कुमार, आंकड़ा विश्लेषक, कृषि विभाग।
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इस प्रकार कुल दो लाख चार हजार 838 एकड़ फसल का पंजीकरण हुआ है जबकि जिले का कुल कृषि योग्य रकबा दो लाख 73 हजार एकड़ है। बाजरा का सर्वाधिक एक लाख 51 हजार 869 एकड़ रकबा पंजीकृत हुआ है। कपास 19 हजार 836 व धान की फसल का पंजीकरण 19 हजार एकड़ का हुआ है। उधर, किसान संगठनों ने पोर्टल फिर से खोलने की मांग की है।
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सरकार की ओर से अब फसलों की गिरदावरी करवाई जानी है ताकि फसल की वास्तविकता का पता चल सके। इसके तहत फसल की स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के आधार पर ही सरकार विभिन्न फसलों की सरकारी खरीद की व्यवस्था करती है। ऐसे में किसानों के लिए फसल का पंजीकरण करवाना जरूरी होता है। पंजीकरण में फसल का गलत विवरण दर्ज होने या मौके पर फसल नहीं होने की स्थिति में सरकारी खरीद से संबंधित प्रक्रिया में परेशानी आती है।
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सैटेलाइट का लिया जा रहा सहारा
फसल पंजीकरण के डाटा के मिलान के लिए सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और पटवारी के रिकार्ड का सहारा लिया जा रहा है। सैटेलाइट के माध्यम से यह पता लगाया जाता है कि जिस खेत में फसल का पंजीकरण दर्शाया गया है वहां वास्तव में खेती की गई है या नहीं। जिले में खरीफ सीजन के दौरान बाजरा, धान, ज्वार, ग्वार, मूंग, कपास और तिलहन समेत कई फसलों की खेती की जाती है।
इनमें बाजरा प्रमुख फसल है और इस बार बाजरा एक लाख 51 हजार 869 एकड़ क्षेत्र में है। इसके अलावा किसानों ने कपास, ग्वार, मूंग, ज्वार और तिलहन की भी खेती की है। इन फसलों का सही रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विभाग की ओर से डाटा मिलान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
सरकारी खरीद के लिए जरूरी है सही डाटा
मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल सरकार के लिए किसानों और उनकी फसलों का रिकॉर्ड तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसी डाटा के आधार पर सरकारी खरीद की जाती हैं। इसलिए विभाग का प्रयास है कि पोर्टल पर दर्ज प्रत्येक किसान की फसल और क्षेत्रफल का सत्यापन किया जाए। सरकार जब भी मुआवजा देती है तो इसी डाटा को आधार माना जाता है। इस बार गत साल की तुलना में 69 हजार एकड़ फसल का पंजीकरण कम हुआ है।
कोट
इस संबंध में भाकियू के अध्यक्ष हरपाल सिंह भांडवा का कहना है कि सरकार को फसल पंजीकरण के लिए पोर्टल फिर से खोलना चाहिए ताकि वंचित रहे किसान फसल का विवरण दर्ज करवा सकें।
वर्सन:
इस बार गत वर्ष की तुलना पंजीकरण कम हुआ है। सरकारी खरीद इसी डाटा के आधार पर होगी। किसानों को समय रहते फसल का पंजीकरण करवाना चाहिए था।