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200 लोहे के पोल बदलने की योजना ठंडे बस्ते में, बारिश के मौसम में हो रहे हादसे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 23 Aug 2021 01:38 AM IST
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Plan to replace 200 iron poles in cold storage, accidents happening in rainy season
शहर में सड़क पर लगा लोहे का पोल। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। जिले में 200 लोहे के पोल बदलने की योजना लंबा समय बीतने के बाद भी बिजली निगम अधिकारी परवान नहीं चढ़ा पाए हैं। इस समय यह योजना ठंडे बस्ते में है और अधिकारियों की इस योजना की मौजूदा स्थिति की जानकारी नहीं है। दूसरी ओर लोहे के पोल में करंट आने से बारिश के मौसम में हादसे भी हो रहे हैं। पिछले डेढ़ माह के अंदर बिजली करंट लगने से पांच गोवंश की मौत हो चुकी है। वहीं, निगम एक्सईएन का कहना है कि जल्द ही इसकी वो अपडेट लेंगे और इस योजना को जल्द से जल्द सिरे चढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
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बारिश के मौसम में लोहे के पोल में करंट का खतरा बना रहता है। इसी को देखते हुए बिजली निगम ने करीब एक साल पहले जिला में 200 लोहे के पोल और उनकी तारें बदलने की योजना तैयार की थी। अब तक योजना फाइलों में ही सीमित है। दूसरी ओर शहर के विभिन्न भागों के अलावा गांवों में लगे बिजली पोल से हादसे को रहे हैं और लोग निगम अधिकारियों से लगातार इन पोल को बदलने की मांग उठा रहे हैं। कई पोल तो 45 से 50 साल पुराने हैं जो जंग खा चुके हैं।
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पुराने लोहे के पोल की वजह से समय-समय पर बिजली आपूर्ति में व्यवधान आता है। ग्रामीण क्षेत्र के लोग इस समस्या से परेशान हैं और वो कई बार निगम अधिकारियों से खेत या अन्य सार्वजनिक जगहों पर लगे लोहे के पोल को बदलने की मांग कर चुके हैं। ग्रामीणों की मांग पर ही बिजली निगम ने कंडम और लोहे के पोल को बदलने के लिए सर्वेक्षण करवाया था। संवाददाता ने बिजली निगम एक्सईएन से इस प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत की तो उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले ही दादरी एक्सईएन का चार्ज संभाला है। यह योजना उनसे पहले तैयार की गई थी। जल्द ही वो इसकी स्टेट्स रिपोर्ट लेंगे।
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सीमेंट के लगने हैं पोल
सर्वे के बाद निगम ने पोल बदलने के लिए एस्टीमेट तैयार किया था। इस योजना के तहत जिला में करीब 200 लोहे के जंग खा चुके पोल बदले जाने हैं। इनके साथ नई तारें भी लगाई जानी हैं ताकि लंबे समय तक इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके। लोहे की बजाय अब निगम की ओर से सीमेंट से बने पोल लगाए जाएंगे। लोहे के पोल में बिजली करंट का भी खतरा बना रहता है। ऐसे में यह समस्या भी दूर हो जाएगी। सीमेंट के एक पोल की कीमत करीब 2100 रुपये आंकी जा रही है। इसी प्रकार तारें भी आधुनिक तकनीक की लगाई जानी हैं। नई तकनीक की तारें लंबे तक समय वर्किंग में बनी रहती हैं।
हिसार मुख्यालय की ओर से करवाया जाना है काम
निगम सूत्रों के अनुसार इस योजना की फाइल तैयार कर स्वीकृति के लिए हिसार हेड ऑफिस भेजी गई थी। यह कार्य हेड ऑफिस की ओर से ही करवाया जाना है। जिला अधिकारियों ने इसका प्रारूप और एस्टीमेट तैयार किए थे। शहर में लोहे के पोल की संख्या 30 से अधिक है।

यह फाइल कहां अटकी है, इसकी फिलहाल मुझे जानकारी नहीं है। जल्द ही मैं इसकी स्टेट्स रिपोर्ट लूंगा और फिर मुख्यालय से इस संबंध में संपर्क किया जाएगा। जल्द से जल्द लोहे के पोल को बदलवाने का हमारा प्रयास रहेगा।
सचिन यादव, एक्सईएन, बिजली निगम
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