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Charkhi Dadri News: पैरा एथलीट 'सुरक्षा' ने दूर की असुरक्षा की भावना, जीत रही पदक
Mon, 10 Feb 2025 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 10 Feb 2025 12:43 AM IST
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पदक जीतने के बाद माला पहने हुए पैरा एथलीट सुरक्षा। स्रोत: कोच
गौरव यही हैं कल के
चरखी गांव की रहने वाली 12वीं की छात्रा सुरक्षा एक पैर-एक हाथ कमजोर होने के बावजूद शॉटपुट और डिस्कस थ्रो में जीत रही पदक
पैरा एथलीट की प्रेरणा से 13 वर्ष की आयु में शुरू किया खेलना, अब राष्ट्रीय स्तर तक दिखा रही प्रतिभा
चरखी दादरी। दिव्यांग व्यक्ति का दुखी रहना स्वाभाविक है। गांव चरखी निवासी सुरक्षा एक हाथ-एक पैर से कमजोर होने के साथ ही ठीक से बोल भी नहीं पाती है। उसकी दो बहनें फुटबाल खेलती हैं। उन्हें खेलते देखकर वह निराश रहती थी। एक पैरा एथलीट की प्रेरणा से उसने अपने मन में बैठी असुरक्षा की भावना को दूर किया। आज सुरक्षा राष्ट्रीय पैरा एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीत रही है।
सुरक्षा गांव चरखी निवासी किसान कृष्ण कुमार की बेटी है। कृष्ण कुमार के पांच बच्चे हैं। इनमें चार बेटियां और एक बेटा है। उनकी बड़ी बेटी घर पर रहती है। दूसरे नंबर की निशा, मंझली सुरक्षा और छोटी दिव्या खेल क्षेत्र में भविष्य बना रही हैं। निशा और दिव्या फुटबाल टीम में शामिल हैं।
सुरक्षा 12वीं की छात्रा है। उसने साल 2022 में खेलना शुरू किया। इससे पहले वह खुद को कमजोर मानती थी। अपनी बहनों को खेलते देखकर उसके मन में भी खेलने की इच्छा होती थी। लेकिन, वह खेलने में असमर्थ थी।
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वर्ष 2022 में गांव चरखी में फुटबाल स्पर्धा थी। उस दौरान पैरा खिलाड़ी व कोच विक्की कुमार वहां गए थे। उन्होंने सुरक्षा को मैदान में देखा। उसकी इच्छा जानी और खेलने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद सुरक्षा उनके पास शॉटपुट व डिस्कस थ्रो के अभ्यास के लिए आने लगी। संवाद
- जन्म से ही पैर व हाथ में है दिक्कत
कोच विक्की कुमार ने बताया कि सुरक्षा जन्म से ही दिव्यांग है। उसका दाहिना हाथ व पैर अच्छे से काम नहीं करता। इस कारण उसे चलने-फिरने में दिक्कत होती है। साथ ही वह खुलकर बोल भी नहीं पाती है। लेकिन, उसने अपनी कमजोरियों को हराकर प्रतिभा को निखरने का मौका दिया है।
- पहली बार में ही जीता था स्वर्ण पदक
सुरक्षा ने फरवरी-2023 में सोनीपत में पहली बार शॉटपुट व डिस्कस थ्रो दो इवेंट में भाग लिया। इसमें उसने दोनों स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक हासिल किए। इसके बाद मई-2023 में दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लिया। यहां दो पदक जीतने पर उसका हौसला बढ़ा। अब वह निरंतर कामयाबी के पथ पर अग्रसर है।
- प्रतिदिन सुबह-शाम दो-दो घंटे करती है अभ्यास
सुरक्षा प्रतिदिन शहर स्थित बलिदान स्टेडियम में आती है। यहां पर शाम को दो घंटे अभ्यास करके घर जाती है। सुबह का अभ्यास वह अपने गांव के मैदान में करती है। इसके बाद स्कूल जाती है।
ये हैं सुरक्षा की अब तक की उपलब्धियां
- मई-2023 में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में एक रजत और एक कांस्य पदक।
- जनवरी-2025 में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक।
- फरवरी-2023 में आयोजित स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक।
- दिसंबर-2024 में आयोजित स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो पदक।
फोटो-33
पदक जीतने के बाद माला पहने पैरा एथलीट सुरक्षा। स्रोत : कोच
फोटो- 34
मां नीलम व बहनों के साथ मौजूद पैरा एथलीट सुरक्षा। स्रोत : कोच
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चरखी गांव की रहने वाली 12वीं की छात्रा सुरक्षा एक पैर-एक हाथ कमजोर होने के बावजूद शॉटपुट और डिस्कस थ्रो में जीत रही पदक
पैरा एथलीट की प्रेरणा से 13 वर्ष की आयु में शुरू किया खेलना, अब राष्ट्रीय स्तर तक दिखा रही प्रतिभा
चरखी दादरी। दिव्यांग व्यक्ति का दुखी रहना स्वाभाविक है। गांव चरखी निवासी सुरक्षा एक हाथ-एक पैर से कमजोर होने के साथ ही ठीक से बोल भी नहीं पाती है। उसकी दो बहनें फुटबाल खेलती हैं। उन्हें खेलते देखकर वह निराश रहती थी। एक पैरा एथलीट की प्रेरणा से उसने अपने मन में बैठी असुरक्षा की भावना को दूर किया। आज सुरक्षा राष्ट्रीय पैरा एथेलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीत रही है।
सुरक्षा गांव चरखी निवासी किसान कृष्ण कुमार की बेटी है। कृष्ण कुमार के पांच बच्चे हैं। इनमें चार बेटियां और एक बेटा है। उनकी बड़ी बेटी घर पर रहती है। दूसरे नंबर की निशा, मंझली सुरक्षा और छोटी दिव्या खेल क्षेत्र में भविष्य बना रही हैं। निशा और दिव्या फुटबाल टीम में शामिल हैं।
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सुरक्षा 12वीं की छात्रा है। उसने साल 2022 में खेलना शुरू किया। इससे पहले वह खुद को कमजोर मानती थी। अपनी बहनों को खेलते देखकर उसके मन में भी खेलने की इच्छा होती थी। लेकिन, वह खेलने में असमर्थ थी।
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वर्ष 2022 में गांव चरखी में फुटबाल स्पर्धा थी। उस दौरान पैरा खिलाड़ी व कोच विक्की कुमार वहां गए थे। उन्होंने सुरक्षा को मैदान में देखा। उसकी इच्छा जानी और खेलने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद सुरक्षा उनके पास शॉटपुट व डिस्कस थ्रो के अभ्यास के लिए आने लगी। संवाद
- जन्म से ही पैर व हाथ में है दिक्कत
कोच विक्की कुमार ने बताया कि सुरक्षा जन्म से ही दिव्यांग है। उसका दाहिना हाथ व पैर अच्छे से काम नहीं करता। इस कारण उसे चलने-फिरने में दिक्कत होती है। साथ ही वह खुलकर बोल भी नहीं पाती है। लेकिन, उसने अपनी कमजोरियों को हराकर प्रतिभा को निखरने का मौका दिया है।
- पहली बार में ही जीता था स्वर्ण पदक
सुरक्षा ने फरवरी-2023 में सोनीपत में पहली बार शॉटपुट व डिस्कस थ्रो दो इवेंट में भाग लिया। इसमें उसने दोनों स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक हासिल किए। इसके बाद मई-2023 में दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लिया। यहां दो पदक जीतने पर उसका हौसला बढ़ा। अब वह निरंतर कामयाबी के पथ पर अग्रसर है।
- प्रतिदिन सुबह-शाम दो-दो घंटे करती है अभ्यास
सुरक्षा प्रतिदिन शहर स्थित बलिदान स्टेडियम में आती है। यहां पर शाम को दो घंटे अभ्यास करके घर जाती है। सुबह का अभ्यास वह अपने गांव के मैदान में करती है। इसके बाद स्कूल जाती है।
ये हैं सुरक्षा की अब तक की उपलब्धियां
- मई-2023 में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में एक रजत और एक कांस्य पदक।
- जनवरी-2025 में आयोजित राष्ट्रीय पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक।
- फरवरी-2023 में आयोजित स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक।
- दिसंबर-2024 में आयोजित स्टेट पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दो पदक।
फोटो-33
पदक जीतने के बाद माला पहने पैरा एथलीट सुरक्षा। स्रोत : कोच
फोटो- 34
मां नीलम व बहनों के साथ मौजूद पैरा एथलीट सुरक्षा। स्रोत : कोच