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Charkhi Dadri News: साढ़े 3 माह से नहीं गिरी बूंद, विभाग के पास 15 दिन के अंतराल में नवरोपित पौधों की सिंचाई का बजट नहीं

Fri, 06 Dec 2024 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Fri, 06 Dec 2024 01:37 AM IST
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No rain has fallen for 3 and a half months, the department does not have the budget to irrigate newly planted plants within a span of 15 days.
चरखी दादरी। जिला में 18 सितंबर के बाद बारिश नहीं हुई है जबकि ताजा रोपित पौधों को हर 15 दिन के अंतराल में पानी की जरूरत होती है। वहीं, बजट के अभाव में सिंचाई विभाग टैंकरों के जरिये भी निर्धारित समय अवधि के अंदर पौधों में पानी नहीं दे पा रहा है और मानसून सीजन में रोपित किए गए सैकड़ों पौधे मुरझाने की कगार पर पहुंच गए हैं।
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बता दें कि जिला में साढ़े तीन माह से बारिश नहीं हुई है। वहीं, वन विभाग ने मानसून सीजन में करीब चार लाख नए पौधे रोपित किए थे जो सिंचाई के अभाव में मुरझा जाएंगे। विभाग के अधिकारियोंं का कहना है कि सरकार की ओर से पौधरोपण के प्रथम वर्ष साल में पांच सिंचाई व दूसरे वर्ष तीन सिंचाई का ही प्रावधान है। इसी के अनुरूप बजट मिलता है। आमतौर पर सिंचाई के लिए बजट कम पड़ जाता है जिससे वन विभाग कई बार टैंकरों से भी सिंचाई नहीं करवाता है। सिंचाई ई-टेंडर के जरिये करवाई जाती है। विशेषज्ञों की मानें तो रेतीला क्षेत्र में रोपित पौधे जल्दी सूखते हैं। विभाग के लिए टैंकरों से पौधों की सिंचाई करना इतना आसान नहीं है
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विभाग ने एक अगस्त से शुरू हुए मानसून सीजन से पौधरोपण शुरू कर दिया था। सार्वजनिक स्थानों, पंचायती जमीन व सरकारी भू-क्षेत्र में पौधरोपण किया गया था। अब साढ़े तीन माह से बारिश नहीं होने पर सिंचाई का संकट पैदा हो गया है। ये छोटे पौधे अधिक समय तक सूखा झेलने की स्थिति में नहीं हैं। पौधों की सिंचाई के लिए वन विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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जिला वन अधिकारी ने नहीं उठाया फोन : इस संबंध में विभाग का पक्ष जानने के लिए जिला वन अधिकारी पुष्कर कुमार को दो दिन में चार बार फोन किए गए, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। वहीं, निचले स्तर के अधिकारी का कहना है पौधरोपण के बाद एक साल तक पांच सिंचाई का बजट मिलता है जबकि दूसरे साल तीन सिंचाई करने का ही बजट आता है। बजट राशि कम होने से 15 दिन के अंतराल में टैंकर से सिंचाई करना संभव नहीं है।
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