फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Charkhi Dadri News ›   nanak chand spent one year in jail

Charkhi Dadri News: एक साल चार माह जेल में रहकर नानकचंद ने सही थीं घोर यातनाएं

Sun, 10 Aug 2025 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी Updated Sun, 10 Aug 2025 12:27 AM IST
विज्ञापन
nanak chand spent one year in jail
स्वतंत्रता सेनानी नानकचंद। स्रोत: परिजन
फोटो 22
विज्ञापन

नानकचंद को मिला प्रशंसापत्र। स्रोत : परिजन
फोटो 23
स्वतंत्रता सेनानी नानकचंद। स्रोत : परिजन
- बोरी में डालकर की जाती थी पिटाई, पानी की जगह पीने के लिए दिया जाता था पेशाब
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के गांव फतेहगढ़ निवासी स्वतंत्रता सेनानी नानकचंद एक साल चार माह तक जेल में रहे। जेल में उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया जाता था। बोरी में डालकर पीटा जाता था। पानी मांगने पर पेशाब दिया जाता था।
स्वतंत्रता सेनानी के परिजनों ने बताया कि नानकचंद ने जेल में बंद रहते भी अंग्रेजी सेना का मुकाबला किया। जब वह छह साल तक घर नहीं आए और न ही उनकी कोई सूचना मिली तो परिजनों ने यह मानकर सब्र कर लिया कि अब वह जिंदा नहीं हैं। जब वह अचानक गांव पहुंचे तो उनके पिता जवाहर अपने बेटे नानकचंद को पहचान भी नहीं पाए थे। उनका चेहरा एवं रंग-रूप आदि बदला हुआ था।
विज्ञापन

दरअसल, नानकचंद यातनाओं से डरकर पीछे नहीं हटे। नानकचंद ने आजादी हिंद फौज में रहते हुए नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ पैदल मोर्चा संभाले रखा। जब कई मील पैदल चलने पर भूख लगती थी तो घास को उबालकर खाते थे। उन्होंने अंग्रेजी सेना को खूब छकाया। वह चंटगांव जेल में भी रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

- 3 जनवरी 1922 को हुआ था जन्म
नानकचंद का जन्म तीन जनवरी 1922 को गांव फतेहगढ़ में हुआ था। उनके पिता जवाहर सिंह थे। तीन जनवरी 1940 को नानकचंद सेना में भर्ती हो गए थे। बाद में वह आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। आजाद हिंद फौज में देश की आजादी के लिए लड़ते हुए वह कई बार जेल गए।

- यहां डटकर किया अंग्रेजी हुकूमत का मुकाबला
नानकचंद ने सिंगापुर, वर्मा, कोहिमा, रंगून, इम्फाल में रहकर अंग्रेजी हुकूमत का डटकर मुकाबला किया। आजाद हिंद फौज में वह गरिल्ला रेजिमेंट में थे। उन्हें भारत सरकार की ओर से सम्मान के तौर पर ताम्रपत्र मिला। हरियाणा सरकार ने भी उनको सम्मान दिया। सेना से घर आने के बाद उनका विवाह चावली देवी के साथ हुआ। चावली देवी 92 साल अभी जीवित हैं। नानक के एक पुत्र सुरेंद्र सिंह व एक पुत्री सुनीता हैं। सेना से घर आने के बाद उन्होंने रेलवे पुलिस की नौकरी भी की। 1980 में रेलवे से रिटायर हुए। दो मार्च 1994 को नानकचंद का निधन हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed