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Charkhi Dadri News: ग्रैप-3 लागू होते ही जिले में माइनिंग व क्रशर यूनिट्स बंद, 25 हजार लोगों पर पड़ेगा असर
Sat, 17 Jan 2026 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 17 Jan 2026 12:01 AM IST
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दादरी जिले में संचालित क्रशर यूनिट।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। दिल्ली व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के तीसरे चरण की पाबंदियों को दादरी सहित एनसीआर के जिलों में एक बार फिर से लागू कर दिया गया है। ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू होने पर जिले में संचालित स्टोन क्रशर यूनिट्स व माइनिंग को भी बंद कर दिया गया है। जिले में स्टोन क्रशर यूनिट्स व माइनिंग बंद होने से जोन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब 25 हजार लोगों का कारोबार प्रभावित होगा। शुक्रवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से आदेश जारी किए गए हैं।
शुक्रवार को जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 278 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। ग्रैप-3 लागू होने के बाद जिले में माइनिंग व क्रशर गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इन गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को और खराब कर सकता है।
ग्रैप-3 के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कार्यों पर भी सख्ती की गई है। खुले में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य, सड़क खुदाई, मिट्टी भराई या मलबा डालने पर रोक रहेगी। ईंट-भट्ठों, हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर जैसी इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा खुले में कूड़ा, पत्ते या किसी भी प्रकार का कचरा जलाने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी।
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बता दें कि जिले के गांव खेड़ी बत्तर, कलियाणा, कलाली, असावरी, रामलवास, झोझू, गुड़ाना, पिचौपा, अटेला, बिरही, पांडवान और मानकावास में क्रशर जोन संचालित हैं। जिले में 343 क्रशर के पास एनओसी हैं, लेकिन मौजूदा समय में करीब 273 क्रशर संचालित हैं। इन क्रशरों से हर रोज करीब पांच हजार भारी वाहन निर्माण सामग्री की दिल्ली के अलावा एनसीआर के अन्य जिलों में ट्रांसपोर्टेशन करते हैं। प्रत्येक ट्रक में करीब 40 टन निर्माण सामग्री होती है।
करीब 25 हजार लोग होंगे प्रभावित
स्टोन क्रशर यूनिट्स व माइनिंग पर पाबंदी लगने से इन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब 25 हजार लोगों के कारोबार पर असर पड़ेगा। स्टोन क्रशर यूनिट्स और माइनिंग जोन में कई हजार लोग बतौर श्रमिक काम करते हैं। इनके अलावा जिन गांवों में क्रशर जोन हैं, वहां काफी संख्या में दुकानें भी हैं। अधिकांश दुकानों पर कारोबार भी यहीं से जुड़ा हुआ है। मैकेनिक्स का काम भी प्रभावित होगा। वहीं निर्माण सामग्री की ट्रांसपोर्टेशन करने वाले भारी वाहनों के चालकों, परिचालक भी इस कदम से प्रभावित होंगे।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर दादरी में यूनिट्स बंद करना सरासर गलत : सांगवान
स्टोन क्रशर ऑनर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अधिवक्ता नवीन सांगवान का कहना है कि सरकार अपनी नाकामी को छिपाने के लिए बार-बार ग्रैप की पाबंदियां लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर दादरी में क्रशर यूनिट्स बंद करना सरासर गलत है। दिल्ली सरकार को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में कदम उठाने चाहिए। क्रशर व माइनिंग बंद होने से 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित होते हैं।
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शुक्रवार को जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स 278 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है। ग्रैप-3 लागू होने के बाद जिले में माइनिंग व क्रशर गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। केवल आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों को ही अनुमति दी जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इन गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को और खराब कर सकता है।
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ग्रैप-3 के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़े कार्यों पर भी सख्ती की गई है। खुले में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य, सड़क खुदाई, मिट्टी भराई या मलबा डालने पर रोक रहेगी। ईंट-भट्ठों, हॉट मिक्स प्लांट और स्टोन क्रशर जैसी इकाइयों को अस्थायी रूप से बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा खुले में कूड़ा, पत्ते या किसी भी प्रकार का कचरा जलाने पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी।
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बता दें कि जिले के गांव खेड़ी बत्तर, कलियाणा, कलाली, असावरी, रामलवास, झोझू, गुड़ाना, पिचौपा, अटेला, बिरही, पांडवान और मानकावास में क्रशर जोन संचालित हैं। जिले में 343 क्रशर के पास एनओसी हैं, लेकिन मौजूदा समय में करीब 273 क्रशर संचालित हैं। इन क्रशरों से हर रोज करीब पांच हजार भारी वाहन निर्माण सामग्री की दिल्ली के अलावा एनसीआर के अन्य जिलों में ट्रांसपोर्टेशन करते हैं। प्रत्येक ट्रक में करीब 40 टन निर्माण सामग्री होती है।
करीब 25 हजार लोग होंगे प्रभावित
स्टोन क्रशर यूनिट्स व माइनिंग पर पाबंदी लगने से इन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े करीब 25 हजार लोगों के कारोबार पर असर पड़ेगा। स्टोन क्रशर यूनिट्स और माइनिंग जोन में कई हजार लोग बतौर श्रमिक काम करते हैं। इनके अलावा जिन गांवों में क्रशर जोन हैं, वहां काफी संख्या में दुकानें भी हैं। अधिकांश दुकानों पर कारोबार भी यहीं से जुड़ा हुआ है। मैकेनिक्स का काम भी प्रभावित होगा। वहीं निर्माण सामग्री की ट्रांसपोर्टेशन करने वाले भारी वाहनों के चालकों, परिचालक भी इस कदम से प्रभावित होंगे।
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने पर दादरी में यूनिट्स बंद करना सरासर गलत : सांगवान
स्टोन क्रशर ऑनर वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान अधिवक्ता नवीन सांगवान का कहना है कि सरकार अपनी नाकामी को छिपाने के लिए बार-बार ग्रैप की पाबंदियां लागू कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर दादरी में क्रशर यूनिट्स बंद करना सरासर गलत है। दिल्ली सरकार को प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में कदम उठाने चाहिए। क्रशर व माइनिंग बंद होने से 25 हजार से अधिक लोग प्रभावित होते हैं।