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त्याग से बड़ा होता है मनुष्य : शंकरराय
Mon, 18 Mar 2024 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 18 Mar 2024 01:39 AM IST
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गांव माजरा में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में पुस्तक का विमोचन करते हुए शिक्षाविद। स्रोत: आयोजक
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। गांव माजरा-दूबलधन स्थित जटेला धाम में स्वामी नितानंद का सामाजिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक दर्शन विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। यह आयोजन स्वामी नितानंद वाणी प्रचार प्रसार समिति व हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला की ओर से करवाया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ स्वामी नितानंद की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया।
सर्वप्रथम संयोजक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि प्रथम सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ से हिंदी विभाग के सहआचार्य डॉ. सिद्धार्थ शंकरराय ने बीज वक्ता के रूप में अपना वक्तव्य दिया। सिद्धार्थ शंकरराय ने बताया कि संत नितानंद ने सभी प्रकार की साधनाओं, बोलियों, शैलियों, राग-रागनियों का समाहार करते हुए भारत निर्माण की चेष्टा की है। उनकी वाणियों पर अनेक क्षेत्रों में शोध की अपार गुंजाइश है। उन्होंने बताया कि मनुष्य त्याग से बड़ा होता है।
इस सत्र में डॉ. मनमोहन शर्मा, डॉ. दयानंद कादयान, रोहित, डॉ. हेमलता शर्मा ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में रोहतक मेडिकल कॉलेज के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी गुप्ता ने आयुर्वेद एवं एलोपैथी में समुचित समन्वय साधने की बात कही। उन्होंने संत नितानंद वाणी प्रचार प्रसार समिति को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
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पीठाधीश्वर महंत राजेन्द्र दास ने अध्यक्षीय अभिभाषण में कहा कि स्वामी नितानंद की वाणी मनुष्य का कल्याण करने वाली है। डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि इस दौरान डॉ. दयानंद कादयान की पुस्तक स्मार्टफोन मीडिया : एक सार्वभौम माध्यम और राजपाल कादयान की आत्म चिंतन, परमार्थ का रास्ता पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
दूसरे सत्र में राजपाल कादयान ने मुख्य वक्तव्य दिया। जनता महाविद्यालय से एमए हिंदी की आशु, रश्मि, पूजा, मनीषा आदि छात्राओं ने अपने शोध- पत्र प्रस्तुत किए। इनके अतिरिक्त प्राध्यापिका ओमपति, डॉ. सुमन कुंडू, डॉ. रवीना कादयान, डॉ. तरसेम, अजय आदि ने भी अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में 50 प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
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चरखी दादरी। गांव माजरा-दूबलधन स्थित जटेला धाम में स्वामी नितानंद का सामाजिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक दर्शन विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। यह आयोजन स्वामी नितानंद वाणी प्रचार प्रसार समिति व हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला की ओर से करवाया गया। संगोष्ठी का शुभारंभ स्वामी नितानंद की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर किया।
सर्वप्रथम संयोजक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि प्रथम सत्र में केंद्रीय विश्वविद्यालय महेंद्रगढ़ से हिंदी विभाग के सहआचार्य डॉ. सिद्धार्थ शंकरराय ने बीज वक्ता के रूप में अपना वक्तव्य दिया। सिद्धार्थ शंकरराय ने बताया कि संत नितानंद ने सभी प्रकार की साधनाओं, बोलियों, शैलियों, राग-रागनियों का समाहार करते हुए भारत निर्माण की चेष्टा की है। उनकी वाणियों पर अनेक क्षेत्रों में शोध की अपार गुंजाइश है। उन्होंने बताया कि मनुष्य त्याग से बड़ा होता है।
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इस सत्र में डॉ. मनमोहन शर्मा, डॉ. दयानंद कादयान, रोहित, डॉ. हेमलता शर्मा ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में रोहतक मेडिकल कॉलेज के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी गुप्ता ने आयुर्वेद एवं एलोपैथी में समुचित समन्वय साधने की बात कही। उन्होंने संत नितानंद वाणी प्रचार प्रसार समिति को हर संभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
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पीठाधीश्वर महंत राजेन्द्र दास ने अध्यक्षीय अभिभाषण में कहा कि स्वामी नितानंद की वाणी मनुष्य का कल्याण करने वाली है। डॉ. महेंद्र सिंह ने बताया कि इस दौरान डॉ. दयानंद कादयान की पुस्तक स्मार्टफोन मीडिया : एक सार्वभौम माध्यम और राजपाल कादयान की आत्म चिंतन, परमार्थ का रास्ता पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
दूसरे सत्र में राजपाल कादयान ने मुख्य वक्तव्य दिया। जनता महाविद्यालय से एमए हिंदी की आशु, रश्मि, पूजा, मनीषा आदि छात्राओं ने अपने शोध- पत्र प्रस्तुत किए। इनके अतिरिक्त प्राध्यापिका ओमपति, डॉ. सुमन कुंडू, डॉ. रवीना कादयान, डॉ. तरसेम, अजय आदि ने भी अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी में 50 प्रतिभागियों ने अपने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।