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Charkhi Dadri News: चरखी दादरी के मेजर मोहित सांगवान को वीरता के लिए मिलेगा सेना पदक
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मेजर मोहित सांगवान। स्रोत : परिजन
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले के गांव डोहकी निवासी मेजर मोहित सांगवान को उनकी बहादुरी के लिए सेना मेडल मिलेगा। 25 जनवरी को ही इसकी घोषणा हुई है। मेजर मोहित सांगवान की तैनाती इस समय असम में है। वे सेना के 20 से ज्यादा सफल ऑपरेशन कर चुके हैं। मोहित सांगवान के परिवार की चौथी पीढ़ी सेना में है।
12वीं पास करते ही वर्ष 2010 में मोहित सांगवान का चयन सेना में बतौर लेफ्टिनेंट हुआ था। वर्ष 2014 में उन्होंने कमीशन प्राप्त किया। शुरुआत में उनकी तैनाती उत्तरी क्षेत्र में रही। इसके बाद नॉर्थ ईस्ट उनकी तैनाती की गई। नॉर्थ ईस्ट में उन्होंने सेना के कई सफल ऑपरेशन किए। उनके पराक्रम की बदौलत ही उनका सेना मेडल के लिए चयन हुआ।
मेजर मोहित सांगवान के पिता बिजेंद्र सांगवान ने बताया कि वे भी रिटायर्ड सैनिक हैं और इस समय रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में कार्यरत्त हैं। मेजर मोहित सांगवान का परिवार रोहतक के सेक्टर-34 में रहता है।
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परदादा ने लड़ा था दूसरा विश्व युद्ध
मेजर मोहित सांगवान के पिता एवं भूतपूर्व सैनिक बिजेंद्र सांगवान ने बताया कि मोहित के रूप में उनके परिवार की चौथी पीढ़ी सेना में अपनी सेवा दे रही है। बिजेंद्र सांगवान ने बताया कि उनके पिता नेतराम एयरफोर्स में थे, जबकि दादा भोलाराम भी सेना में थे। उन्होंने दूसरा विश्व युद्ध लड़ा है और मोहित सांगवान को सेना में जाने की प्रेरणा परिजनों से ही मिली।
यहां से प्राप्त की मेजर मोहित ने शिक्षा
मेजर मोहित सांगवान ने यूकेजी तक की शिक्षा गांव डोहकी में प्राप्त की। इसके बाद जबलपुर, जोधपुर, उधमपुर, मिसामरी व हिसार आर्मी स्कूल में पढ़ाई की। हिसार आर्मी स्कूल से 12वीं करते ही उनका चयन बतौर लेफ्टिनेंट सेना में हुआ।
पिता बोले- बेटे की उपलब्धि पर फक्र
भूतपूर्व सैनिक बिजेंद्र सांगवान ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। बेटा सेना में है, जबकि बेटी शिक्षिका है। उन्होंने कहा कि वो खुद सैनिक रहे हैं और बेटे को सेना मेडल मिलने की खुशी को वो शब्दों में बयान नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि बेटे मेजर मोहित सांगवान की उपलब्धि पर फक्र है।
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चरखी दादरी। जिले के गांव डोहकी निवासी मेजर मोहित सांगवान को उनकी बहादुरी के लिए सेना मेडल मिलेगा। 25 जनवरी को ही इसकी घोषणा हुई है। मेजर मोहित सांगवान की तैनाती इस समय असम में है। वे सेना के 20 से ज्यादा सफल ऑपरेशन कर चुके हैं। मोहित सांगवान के परिवार की चौथी पीढ़ी सेना में है।
12वीं पास करते ही वर्ष 2010 में मोहित सांगवान का चयन सेना में बतौर लेफ्टिनेंट हुआ था। वर्ष 2014 में उन्होंने कमीशन प्राप्त किया। शुरुआत में उनकी तैनाती उत्तरी क्षेत्र में रही। इसके बाद नॉर्थ ईस्ट उनकी तैनाती की गई। नॉर्थ ईस्ट में उन्होंने सेना के कई सफल ऑपरेशन किए। उनके पराक्रम की बदौलत ही उनका सेना मेडल के लिए चयन हुआ।
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मेजर मोहित सांगवान के पिता बिजेंद्र सांगवान ने बताया कि वे भी रिटायर्ड सैनिक हैं और इस समय रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में कार्यरत्त हैं। मेजर मोहित सांगवान का परिवार रोहतक के सेक्टर-34 में रहता है।
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परदादा ने लड़ा था दूसरा विश्व युद्ध
मेजर मोहित सांगवान के पिता एवं भूतपूर्व सैनिक बिजेंद्र सांगवान ने बताया कि मोहित के रूप में उनके परिवार की चौथी पीढ़ी सेना में अपनी सेवा दे रही है। बिजेंद्र सांगवान ने बताया कि उनके पिता नेतराम एयरफोर्स में थे, जबकि दादा भोलाराम भी सेना में थे। उन्होंने दूसरा विश्व युद्ध लड़ा है और मोहित सांगवान को सेना में जाने की प्रेरणा परिजनों से ही मिली।
यहां से प्राप्त की मेजर मोहित ने शिक्षा
मेजर मोहित सांगवान ने यूकेजी तक की शिक्षा गांव डोहकी में प्राप्त की। इसके बाद जबलपुर, जोधपुर, उधमपुर, मिसामरी व हिसार आर्मी स्कूल में पढ़ाई की। हिसार आर्मी स्कूल से 12वीं करते ही उनका चयन बतौर लेफ्टिनेंट सेना में हुआ।
पिता बोले- बेटे की उपलब्धि पर फक्र
भूतपूर्व सैनिक बिजेंद्र सांगवान ने बताया कि उनके दो बच्चे हैं। बेटा सेना में है, जबकि बेटी शिक्षिका है। उन्होंने कहा कि वो खुद सैनिक रहे हैं और बेटे को सेना मेडल मिलने की खुशी को वो शब्दों में बयान नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि बेटे मेजर मोहित सांगवान की उपलब्धि पर फक्र है।