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जमीन का पानी खारा, नहरी पानी की मांग रहेगी मुख्य चुनावी मुद्दा
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खेड़ी सनसनवाल की गली में बने घर।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर स्थित गांव खेड़ी सनसनसवाल में सरपंची चुनाव के दौरान उम्मीदवारों का खर्च काफी कम रहता है। यह सब इस गांव के जागरूक मतदाताओं की बदौलत ही संभव है। चुनावी खर्च मामले में यह गांव अन्य पंचायतों के लिए भी नजीर है। गत योजना की बात करें तो सरपंच पद के दावेदार आजाद सिंह के महज छह हजार रुपये खर्च हुए थे और यह रुपये भी सरपंच बनने के बाद चाय-पानी की सेवा पर खर्च किए गए थे। इसकी पुष्टि निवर्तमान सरपंच आजाद सिंह ने की है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस बार चुनाव में महंगाई के अनुसार अधिकतम खर्च सीमा 50 हजार रुपये तक पहुंचने का अनुमान है जबकि सरपंच पद के लिए चुनावी खर्च बजट की सीमा तीन लाख रुपये निर्धारित है। ग्रामीणों का कहना है गांव में चुनावों में अनावश्यक रूप से पैसा खर्च नहीं होता है। चुनाव परिणाम आने पर खुशी में मिठाई आदि वितरण में ही कुछ पैसा खर्च होता है। गांव में 1350 मतदाता हैं। गांव में अब तक महिला एक ही बार सरपंच बनी है। खेड़ी सनसनसवाल में सनसनवाल गोत्र के ज्यादा लोग हैं और यहां एक बार सर्वसहमति से सरपंच चुना गया है।
करीब दो हजार की आबादी वाले इस गांव के बाशिंदे सरपंची चुनाव बड़े ही संयम से निपटाते हैं। गांव में पंच पद के लिए 8 वार्ड हैं। इस बार सामान्य वर्ग महिला के लिए सरपंच पद आरक्षित है। गांव में सनसनवाल के अलावा बलौदा, रूहेल, कालेहर व जाखड़ गोत्र के लोग हैं। सबसे ज्यादा करीब 400 मतदाता सनसनवाल गोत्र से हैं। अहीर समुदाय से करीब 100 मतदाता हैं। गांव में अनुसूचित जाति वर्ग के भी करीब 100 मतदाता हैं। संवाद
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- अब तक ये बन चुके हैं सरपंच
ग्रामीणों के अनुसार गांव में अब तक सनसनवाल गोत्र से ही ज्यादा बार सरपंच चुने गए हैं। गांव में कप्तान चंदगीराम एक योजना सरपंच रह चुके हैं। इसी प्रकार राम सिंह ने दो योजना सरपंची की है। बिहारी ने भी एक योजना में गांव की एक चौधर की है। इसके बाद शिवलाल व मंदरुप गांव के सरपंच रहे। बलौदा गोत्र से लखीराम सरपंच चुने गए। उसके बाद प्रेम देवी व ओमप्रकाश गांव के सरपंच रह चुके हैं। अहीर गोत्र से रामफल सरपंच रहे। निवर्तमान सरपंच आजाद अनुसूचित जाति वर्ग से है। अब तक गांव में सरपंच पद के लिए एक उम्मीदवार ने ही नामांकन भरा है व दो और उम्मीदवारों के नामों की चर्चाएं हैं।
- जमीनी पानी खारा, नहरी पानी की मांग रहेगी चुनावी मुद्दा
ग्रामीणों के अनुसार गांव में सिंचाई के लिए खारा पानी से संकट बना हुआ है। इस रेतीले क्षेत्र में फसलों की सिंचाई बिजली के बोरिंग ट्यूबवेल से ही होती है। अब ट्यूबवेल का जमीनी पानी खारा होने की वजह से संकट ज्यादा बढ़ गया है। नए सरपंच के लिए यह मुद्दा हावी रहेगी। गांव में माइनर का पानी पहुंचने पर ही सिंचाई का संकट खत्म हो सकता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि इस बार चुनाव में महंगाई के अनुसार अधिकतम खर्च सीमा 50 हजार रुपये तक पहुंचने का अनुमान है जबकि सरपंच पद के लिए चुनावी खर्च बजट की सीमा तीन लाख रुपये निर्धारित है। ग्रामीणों का कहना है गांव में चुनावों में अनावश्यक रूप से पैसा खर्च नहीं होता है। चुनाव परिणाम आने पर खुशी में मिठाई आदि वितरण में ही कुछ पैसा खर्च होता है। गांव में 1350 मतदाता हैं। गांव में अब तक महिला एक ही बार सरपंच बनी है। खेड़ी सनसनसवाल में सनसनवाल गोत्र के ज्यादा लोग हैं और यहां एक बार सर्वसहमति से सरपंच चुना गया है।
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करीब दो हजार की आबादी वाले इस गांव के बाशिंदे सरपंची चुनाव बड़े ही संयम से निपटाते हैं। गांव में पंच पद के लिए 8 वार्ड हैं। इस बार सामान्य वर्ग महिला के लिए सरपंच पद आरक्षित है। गांव में सनसनवाल के अलावा बलौदा, रूहेल, कालेहर व जाखड़ गोत्र के लोग हैं। सबसे ज्यादा करीब 400 मतदाता सनसनवाल गोत्र से हैं। अहीर समुदाय से करीब 100 मतदाता हैं। गांव में अनुसूचित जाति वर्ग के भी करीब 100 मतदाता हैं। संवाद
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- अब तक ये बन चुके हैं सरपंच
ग्रामीणों के अनुसार गांव में अब तक सनसनवाल गोत्र से ही ज्यादा बार सरपंच चुने गए हैं। गांव में कप्तान चंदगीराम एक योजना सरपंच रह चुके हैं। इसी प्रकार राम सिंह ने दो योजना सरपंची की है। बिहारी ने भी एक योजना में गांव की एक चौधर की है। इसके बाद शिवलाल व मंदरुप गांव के सरपंच रहे। बलौदा गोत्र से लखीराम सरपंच चुने गए। उसके बाद प्रेम देवी व ओमप्रकाश गांव के सरपंच रह चुके हैं। अहीर गोत्र से रामफल सरपंच रहे। निवर्तमान सरपंच आजाद अनुसूचित जाति वर्ग से है। अब तक गांव में सरपंच पद के लिए एक उम्मीदवार ने ही नामांकन भरा है व दो और उम्मीदवारों के नामों की चर्चाएं हैं।
- जमीनी पानी खारा, नहरी पानी की मांग रहेगी चुनावी मुद्दा
ग्रामीणों के अनुसार गांव में सिंचाई के लिए खारा पानी से संकट बना हुआ है। इस रेतीले क्षेत्र में फसलों की सिंचाई बिजली के बोरिंग ट्यूबवेल से ही होती है। अब ट्यूबवेल का जमीनी पानी खारा होने की वजह से संकट ज्यादा बढ़ गया है। नए सरपंच के लिए यह मुद्दा हावी रहेगी। गांव में माइनर का पानी पहुंचने पर ही सिंचाई का संकट खत्म हो सकता है।