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Charkhi Dadri News: 20 स्कूलों में एक साल बाद भी डिब्बों से बाहर नहीं आए वाद्य यंत्र
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जगवीर शर्मा
चरखी दादरी। सरकारी स्कूलों में एक साल पहले संगीत विषय के विद्यार्थियों के लिए पहुंचे वाद्य यंत्र और अन्य सामान आज भी डिब्बों में बंद हैं। इसका कारण जिले के 20 स्कूलों में संगीत अध्यापक का पद खाली होना है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब चार हजार विद्यार्थियों को संगीत विषय की पढ़ाई में दिक्कतें भी आ रही हैं। उन्हें न तो कोई वाद्य यंत्रों की जानकारी देने वाला है और न ही इन्हें प्रयोग करने की कला सीखाने वाला। आलम ये है कि मॉडल संस्कृति स्कूलों में भी संगीत के शिक्षक नहीं हैं।
बता दें कि संगीत विषय की हाई व सीनियर सेकेंडरी स्तर पर शिक्षा बोर्ड की ऐच्छिक परीक्षा भी होती है। संगीत स्कोरर विषय होने की वजह से विद्यार्थी इसमें ज्यादा रुचि लेते हैं। संवाददाता ने इन स्कूलों में डिब्बा बंद रखे सामान की पड़ताल की तो सामने आया कि प्रत्येक स्कूल को करीब 85 हजार रुपये के बजट से संगीत का सामान उपलब्ध करवाया गया था। 25 मिडिल स्कूलों में भी यह सामान उपलब्ध करवाया गया है। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए वेशभूषा भी उपलब्ध करवाई करवाई हुई है।
शिक्षा विभाग सूत्रों के अनुसार इस समय शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, राजकीय हाई स्कूल समसपुर सहित पांच स्कूलों में ही संगीत शिक्षक कार्यरत हैं। जिले में 19 राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल हैं जिनमें से एक में भी संगीत शिक्षक नहीं हैं।
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- सहगामी क्रियाएं कराने की योजना नहीं चढ़ रही परवान
सरकारी स्कूलों में शिक्षा के साथ अन्य सहगामी क्रियाओं पर भी शिक्षा विभाग का ध्यान है। संगीत शिक्षक की कमी के चलते सहगामी क्रियाएं कराने की योजना भी परवान नहीं चढ़ पा रही। सहगामी क्रियाओं में संगीत कला से जुड़ी गतिविधियों से एक ओर जहां मनोरंजन होता है तो दूसरी ओर विषय एवं कला का भी ज्ञान होता है। संगीत से संवेगात्मक, भावात्मक एवं मानसिक विकास भी होता है।
- सामान मुहैया कराने का ये था मकसद
जिले के मिडिल स्कूलों मे तबला, ढोलक समेत अन्य वाद्ययंत्र उपलब्ध करवाए गए थे ताकि विद्यार्थी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी भी आसानी से कर सकें। स्कूलों में समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस लिहाज से भी संगीत का सामान जरूरी माना जाता है। स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस के अलावा अन्य सरकारी कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति करवाई जाती है। इसे देखते हुए विभाग ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए वेशभूषा भी उपलब्ध करवा रखी हैं।
- संगीत सामान की खरीद पर खर्च हुआ मोटा बजट : संजय
सरकार को स्कूलों में संगीत विषय के शिक्षक तैनात करने चाहिए। संगीत का अन्य कई विषयों से गहरा संबंध है। संगीत कला का ज्ञान विद्यार्थी के लिए जरूरी है। इस समय जिला के चुनिंदा स्कूलों में ही संगीत के शिक्षक तैनात हैं जबकि प्रत्येक स्कूल में संगीत शिक्षक होना चाहिए। पिछले एक साल पहले पहुंचा संगीत का सामान अधिकतर स्कूलों में आज भी बंद पैकिंग में रखा हुआ है जबकि इस पर मोटा बजट खर्च हुआ है।
-संजय शास्त्री, प्रधान, राजकीय विद्यालय अध्यापक संघ
अभी यह मामला मेरा संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा तो पता लगाऊंगा और समस्या का जल्द समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। संसाधनों का लाभ विद्यार्थियों को अवश्य मिलना चाहिए।
नवीन नारा, डीईईओ, शिक्षा विभाग
चरखी दादरी। सरकारी स्कूलों में एक साल पहले संगीत विषय के विद्यार्थियों के लिए पहुंचे वाद्य यंत्र और अन्य सामान आज भी डिब्बों में बंद हैं। इसका कारण जिले के 20 स्कूलों में संगीत अध्यापक का पद खाली होना है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले करीब चार हजार विद्यार्थियों को संगीत विषय की पढ़ाई में दिक्कतें भी आ रही हैं। उन्हें न तो कोई वाद्य यंत्रों की जानकारी देने वाला है और न ही इन्हें प्रयोग करने की कला सीखाने वाला। आलम ये है कि मॉडल संस्कृति स्कूलों में भी संगीत के शिक्षक नहीं हैं।
बता दें कि संगीत विषय की हाई व सीनियर सेकेंडरी स्तर पर शिक्षा बोर्ड की ऐच्छिक परीक्षा भी होती है। संगीत स्कोरर विषय होने की वजह से विद्यार्थी इसमें ज्यादा रुचि लेते हैं। संवाददाता ने इन स्कूलों में डिब्बा बंद रखे सामान की पड़ताल की तो सामने आया कि प्रत्येक स्कूल को करीब 85 हजार रुपये के बजट से संगीत का सामान उपलब्ध करवाया गया था। 25 मिडिल स्कूलों में भी यह सामान उपलब्ध करवाया गया है। इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए वेशभूषा भी उपलब्ध करवाई करवाई हुई है।
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शिक्षा विभाग सूत्रों के अनुसार इस समय शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, राजकीय हाई स्कूल समसपुर सहित पांच स्कूलों में ही संगीत शिक्षक कार्यरत हैं। जिले में 19 राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल हैं जिनमें से एक में भी संगीत शिक्षक नहीं हैं।
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- सहगामी क्रियाएं कराने की योजना नहीं चढ़ रही परवान
सरकारी स्कूलों में शिक्षा के साथ अन्य सहगामी क्रियाओं पर भी शिक्षा विभाग का ध्यान है। संगीत शिक्षक की कमी के चलते सहगामी क्रियाएं कराने की योजना भी परवान नहीं चढ़ पा रही। सहगामी क्रियाओं में संगीत कला से जुड़ी गतिविधियों से एक ओर जहां मनोरंजन होता है तो दूसरी ओर विषय एवं कला का भी ज्ञान होता है। संगीत से संवेगात्मक, भावात्मक एवं मानसिक विकास भी होता है।
- सामान मुहैया कराने का ये था मकसद
जिले के मिडिल स्कूलों मे तबला, ढोलक समेत अन्य वाद्ययंत्र उपलब्ध करवाए गए थे ताकि विद्यार्थी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी भी आसानी से कर सकें। स्कूलों में समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस लिहाज से भी संगीत का सामान जरूरी माना जाता है। स्वतंत्रता दिवस व गणतंत्र दिवस के अलावा अन्य सरकारी कार्यक्रमों में स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति करवाई जाती है। इसे देखते हुए विभाग ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए वेशभूषा भी उपलब्ध करवा रखी हैं।
- संगीत सामान की खरीद पर खर्च हुआ मोटा बजट : संजय
सरकार को स्कूलों में संगीत विषय के शिक्षक तैनात करने चाहिए। संगीत का अन्य कई विषयों से गहरा संबंध है। संगीत कला का ज्ञान विद्यार्थी के लिए जरूरी है। इस समय जिला के चुनिंदा स्कूलों में ही संगीत के शिक्षक तैनात हैं जबकि प्रत्येक स्कूल में संगीत शिक्षक होना चाहिए। पिछले एक साल पहले पहुंचा संगीत का सामान अधिकतर स्कूलों में आज भी बंद पैकिंग में रखा हुआ है जबकि इस पर मोटा बजट खर्च हुआ है।
-संजय शास्त्री, प्रधान, राजकीय विद्यालय अध्यापक संघ
अभी यह मामला मेरा संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा तो पता लगाऊंगा और समस्या का जल्द समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा। संसाधनों का लाभ विद्यार्थियों को अवश्य मिलना चाहिए।
नवीन नारा, डीईईओ, शिक्षा विभाग