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ढाणी फौगाट में पहली बार एससी वर्ग की महिला के हाथ चौधर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 20 Oct 2022 11:30 PM IST
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For the first time in Dhani Phogat, a woman from the SC category has a wide hand
चरखी दादरी। करीब 10 हजार की आबादी वाले गांव ढाणी फौगाट में फौगाट गोत्र ने लंबे समय तक सरपंची की है। फौगाट बाहुल्य गांव में एक बार ही महिला सरपंच बनी है। इतना ही नहीं अनुसूचित जाति वर्ग को भी एक बार ही चौधर हाथ लगी है। गांव निवासी प्रताप सिंह और अमर सिंह तीन बार सरपंच चुने जा चुके हैं।
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ढाणी फौगाट गांव में करीब चार हजार मतदाता है जिनमें 1900 महिला मतदाता शामिल हैं। गांव में आजादी के बाद से आज तक चकबंदी नहीं होने से मुख्य रास्ते नहीं हैं, जिसके चलते ग्रामीण परेशान हैं। इसके अलावा गांव में दूषित पानी की निकासी व पेयजल समस्या के मुद्दे मौजूदा पंचायत चुनाव में हावी रहेंगे। इस बार गांव में अनुसूचित जाति वर्ग में महिला के लिए सरपंच पद आरक्षित है। गांव के मौजिज लोगों ने बताया कि अब तक चार महिला उम्मीदवारों के नाम चर्चा में हैं।
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शहर से सटे गांव ढाणी फौगाट में फौगाट गोत्र के अलावा, चाहर, महला व अन्य गोत्र के लोग भी रहते हैं लेकिन गांव फौगाट गोत्र बाहुल्य है। अब तक फौगाट गोत्र के लोगों के पास ही ज्यादा समय तक सरपंची रही है। प्रताप सिंह फौगाट गांव के 3 बार सरपंच बने। प्रताप सिंह एक बार ब्लॉक समिति के चेयरमैन भी चुने गए थे। इसी प्रकार अमर सिंह ने भी गांव में तीन योजना सरपंची की। अमर सिंह ब्लॉक पंचायत समिति के चेयरमैन व महेंद्रगढ़ जिला परिषद के वाइस चेयरमैन भी रहे थे। अमर सिंह ने 10 वर्ष से अधिक समय तक भारतीय सेना में भी नौकरी की थी।
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ये भी रह चुके गांव के सरपंच
गांव में अनुसूचित जाति वर्ग से एक बार ही महिला सरपंच बनी है। महला गोत्र को भी एक बार सरपंच हाथ लगी है। महला गोत्र से अशोक कुमार सरपंच रह चुके हैं। इसी प्रकार नंबरदार किला सिंह फौगाट की मां भतेरी भी सामान्य वर्ग से सरपंच रह चुकी हैं। फौगाट गोत्र से ही जगजीत सिंह व प्रताप पुत्र तूहीराम भी सरपंच रहे हैं। पिछले योजना में मंदीप फौगाट सरपंच रहे। इस प्रकार करीब 45 साल से अधिक समय तक गांव में फौगाट गोत्र ने ही चौधर की है।
चकबंदी न होने से ग्रामीण झेल रहे दिक्कतें
गांव में आजादी के बाद से चकबंदी नहीं होने से रास्ते व फिरनी की समस्या बनी हुई है। मेन रास्ते नहीं होने से किसान व आम लोगों को परेशानी हो रही है। सभी सरकारी विभाग ऑनलाइन होने की वजह से इस समय गांव में चकबंदी करवाने की सख्त जरूरत है ताकि पूरा जमीनी रिकार्ड दुरुस्त हो सके और ग्रामीणों को किसी प्रकार की कोई कठिनाई न झेलनी पड़े।

ग्रामीण बोले: पेयजल भंडारण क्षमता बढ़ाने की अब दरकार
ग्रामीण मंदीप, शेर सिंह, दिलबाग, सतीश, नवीन, मांगेराम आदि का कहना है कि गांव की आबादी के अनुरूप पेयजल की क्षमता काफी कम है। गांव में जलघर है जिसमें एक वाटर टैंक बना है। गांव में एक और वाटर टैंक बनाए जाने की जरूरत है ताकि पानी की स्टोरेज क्षमता बढ़ जाए और पानी की प्रतिदिन सप्लाई हो सके। इस समय दो से तीन दिन में एक बार सप्लाई हो रही है। गर्मी सीजन में लोग टैंकर से पानी खरीदने को विवश हैं। दूषित पानी की निकासी मुद्दा भी इन पंचायती चुनावों में छाया रहेगा।
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