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नौ साल से कागजी नींबू की बढ़िया पैदावार से मोटा मुनाफा कमा रहा किसान रमेश
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गांव ढाणी फौगाट निवासी किसान रमेश कुमार खेत में नींबू की फसल दिखाते हुए।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। गांव ढाणी फौगाट निवासी किसान रमेश कुमार सर्दी सीजन में लगने वाले कागजी नींबू की खेती कर बढ़िया मुनाफा कमा रहा है। नींबू के साथ किसान इसी खेत में मटर की फसल लेने के साथ हरा चारा भी उगाते हैं। किसान ने पंजाब से नींबू के बीज की किस्म मंगवाई थी।
जागरूक किसान रमेश कुमार ने सन् 2013 से गांव के समीप ही बाहरी सीमा में स्थित अपने खेत में कागजी नींबू लगा रखे हैं। यह सर्दी मौसम की फसल है। किसान रमेश कुमार ने बताया कि अक्तूबर माह में नींबू के फल लगने शुरू हो जाते हैं। फरवरी तक नींबू की बढ़िया पैदावार मिलती है। रमेश कुमार ने बताया कि सर्दी मौसम में नींबू का भाव ठीक मिल जाता है। प्रति एकड़ एक से सवा लाख रुपये तक की पैदावार एक सीजन में मिल जाती है। किसान रमेश कुमार ने बताया कि वह समय-समय पर नींबू के पौधों में देशी डालता है। देशी खाद से पौधे की वृद्धि एवं विकास ठीक प्रकार से होता है। पौधे को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल जाते हैं जिससे औसत पैदावार बढ़िया मिलती है।
नियमित रूप से करता है सफाई
नींबू के इस बाग में किसान नियमित रूप से सफाई करता है, ताकि रोगों को बढ़ावा नहीं मिल सके। बाग आदि की नियमित सफाई एवं नलाई होने पर रोगों की संभावना 75 प्रतिशत तक कम हो जाती है। रमेश कुमार ने बताया रोग लगने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर कीटनाशक दवा का छिड़काव जरूर करना पड़ता है। जरूरत के अनुसार पौधों की सिंचाई की जाती है। इस पौधे में कई बार सूंडी का प्रकोप बन जाता है।
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पंजाब से मंगवाई थी नींबू की किस्म
नींबू की यह किस्म पंजाब से मंगवाई थी। रमेश कुमार ने बताया कि यह किस्म काफी गुणकारी है। इसके पौधे का फुटाव अच्छा है। गर्मी सीजन में सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती है। बारिश सीजन में सिंचाई की स्वत: ही पूर्ति हो जाती है। बारिश सीजन खत्म होने के बाद अक्टूबर माह में फल लगने शुरू हो जाते हैं।
वर्जन
क्षेत्र के किसानों को चाहिए कि वे बागवानी के अलावा तिलहन व दलहन की खेती पर ज्यादा दें। कुदरती खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। नींबू की इस क्षेत्र में किसान बढ़िया पैदावार ले सकते हैं। मिट्टी व पानी की समय-समय पर जांच करवाएं। रसायनिक खादों के बजाय गोबर, जैविक खाद का इस्तेमाल करें।
डॉ.जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी।
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जागरूक किसान रमेश कुमार ने सन् 2013 से गांव के समीप ही बाहरी सीमा में स्थित अपने खेत में कागजी नींबू लगा रखे हैं। यह सर्दी मौसम की फसल है। किसान रमेश कुमार ने बताया कि अक्तूबर माह में नींबू के फल लगने शुरू हो जाते हैं। फरवरी तक नींबू की बढ़िया पैदावार मिलती है। रमेश कुमार ने बताया कि सर्दी मौसम में नींबू का भाव ठीक मिल जाता है। प्रति एकड़ एक से सवा लाख रुपये तक की पैदावार एक सीजन में मिल जाती है। किसान रमेश कुमार ने बताया कि वह समय-समय पर नींबू के पौधों में देशी डालता है। देशी खाद से पौधे की वृद्धि एवं विकास ठीक प्रकार से होता है। पौधे को सभी आवश्यक पोषक तत्व मिल जाते हैं जिससे औसत पैदावार बढ़िया मिलती है।
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नियमित रूप से करता है सफाई
नींबू के इस बाग में किसान नियमित रूप से सफाई करता है, ताकि रोगों को बढ़ावा नहीं मिल सके। बाग आदि की नियमित सफाई एवं नलाई होने पर रोगों की संभावना 75 प्रतिशत तक कम हो जाती है। रमेश कुमार ने बताया रोग लगने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर कीटनाशक दवा का छिड़काव जरूर करना पड़ता है। जरूरत के अनुसार पौधों की सिंचाई की जाती है। इस पौधे में कई बार सूंडी का प्रकोप बन जाता है।
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पंजाब से मंगवाई थी नींबू की किस्म
नींबू की यह किस्म पंजाब से मंगवाई थी। रमेश कुमार ने बताया कि यह किस्म काफी गुणकारी है। इसके पौधे का फुटाव अच्छा है। गर्मी सीजन में सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती है। बारिश सीजन में सिंचाई की स्वत: ही पूर्ति हो जाती है। बारिश सीजन खत्म होने के बाद अक्टूबर माह में फल लगने शुरू हो जाते हैं।
वर्जन
क्षेत्र के किसानों को चाहिए कि वे बागवानी के अलावा तिलहन व दलहन की खेती पर ज्यादा दें। कुदरती खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। नींबू की इस क्षेत्र में किसान बढ़िया पैदावार ले सकते हैं। मिट्टी व पानी की समय-समय पर जांच करवाएं। रसायनिक खादों के बजाय गोबर, जैविक खाद का इस्तेमाल करें।
डॉ.जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी।