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एमसीएच में एक करोड़ से बनेगा नेत्र जांच का ब्लॉक, ऑपरेशन भी होंगे शुरू
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सिविल अस्पताल में मरीज की आंख की जांच करता विशेषज्ञ।
- फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। जिला मुख्यालय पर जल्द ही नेत्र जांच सुविधाओं में विस्तार होने जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने एमसीएच (मातृ-शिशु अस्पताल) में नया ब्लॉक बनाने की योजना तैयार की है। सकारात्मक बात यह है कि विभाग को इसके निर्माण के लिए एक करोड़ का बजट मिल चुका है। करीब 2250 वर्गगज जमीन पर ब्लॉक का निर्माण करवाया जाना है। आंखों का ब्लॉक बनने से एक माह में 1500 मरीजों को लाभ मिलेगा और उन्हें उपचार के लिए दूसरे जिलों की खाक नहीं छाननी पड़ेगी।
सिविल अस्पताल को करीब छह माह पहले ही आंखों का विशेषज्ञ मिला था। जिले में ऑपरेशन थिएटर न होने से फिलहाल आंखों के ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। ऑपरेशन की स्थिति वाले मरीज को प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद दूसरे जिला अस्पतालों में रेफर किया जाता है। प्रतिमाह जिले से करीब 250 मरीज आंखों के ऑपरेशन के लिए दूसरे जिलों की भागदौड़ करने को विवश हैं। इन मरीजों को आने वाले समय में इस भागदौड़ से छुटकारा मिलने की उम्मीद है।
जिला स्वास्थ्य विभाग ने करीब छह माह पहले आंखों के ब्लॉक के निर्माण की योजना तैयार की थी। पहले इस ब्लॉक का निर्माण सिविल अस्पताल में करवाया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अब सरकार के निर्देशों पर इस योजना में फेरबदल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग पिछले सप्ताह ही नए प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए सरकार के पास भेज चुका है। स्वीकृति मिलते ही पीडब्ल्यूडी को बजट ट्रांसफर कर दिया जाएगा और इसके बाद टेंडर प्रक्रिया के जरिये ब्लॉक का निर्माण करवाया जाएगा।
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प्रतिदिन 70 के करीब है दैनिक ओपीडी
सिविल अस्पताल के पुराने भवन में आंखों का विशेषज्ञ इस समय ओपीडी देख रहा है। यहां दैनिक ओपीडी 60 से 70 है। प्रतिदिन सात से आठ मरीजों को ऑपरेशन के लिए यहां से भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। इस लिहाज से एक माह में करीब 250 मरीज आंखों के ऑपरेशन के लिए दूसरे जिलों में भेजे जा रहे हैं। आंखों का ब्लॉक बनने के बाद मरीजों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पांच से 30 हजार है निजी अस्पतालों में ऑपरेशन का खर्च
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मरीजों के परिजन दूसरे जिलों की भागदौड़ से बचने के लिए निजी अस्पतालों में जाकर भी ऑपरेशन करवा रहे हैं। एक निजी अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन का खर्च पांच से लेकर 30 हजार तक आता है। गरीब तबके के लिए ये खर्च उठाना संभव नहीं है।
नए ब्लॉक में ये मिलेगी सुविधा
नया ब्लॉक 2250 वर्गगज जगह पर बनाया जाएगा। इसमें ऑपरेशन थिएटर की भी व्यवस्था होगी। मरीजों के तीमारदारों के लिए प्रतीक्षालय कक्ष के अलावा शौचालय और पेयजल का प्रबंध किया जाएगा। इस ब्लॉक में दस बेड की भी व्यवस्था होगी, जिन पर ऑपरेशन के बाद मरीजों को शिफ्ट किया जाएगा।
कोर्ट केस के चलते सरकार ने अब बदलवाई जगह
सरकार करीब छह माह पहले इसके लिए एक करोड़ का बजट जारी कर चुकी है। उस समय आंखों का ब्लॉक सिविल अस्पताल परिसर में बनाया जाना था। सूत्रों के अनुसार यहां कोर्ट केस की अड़चन है और इसे देखते हुए अब सरकार ने जगह बदलने के साथ जल्द ही इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
आंखों के ब्लॉक निर्माण के लिए एक करोड़ का बजट हमें मिल चुका है। नई जगह का प्रपोजल तैयार कर हमने हेड ऑफिस भेज दिया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही ब्लॉक निर्माण के लिए राशि पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर कर देंगे।
डॉक्टर संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ
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सिविल अस्पताल को करीब छह माह पहले ही आंखों का विशेषज्ञ मिला था। जिले में ऑपरेशन थिएटर न होने से फिलहाल आंखों के ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। ऑपरेशन की स्थिति वाले मरीज को प्राथमिक उपचार के तुरंत बाद दूसरे जिला अस्पतालों में रेफर किया जाता है। प्रतिमाह जिले से करीब 250 मरीज आंखों के ऑपरेशन के लिए दूसरे जिलों की भागदौड़ करने को विवश हैं। इन मरीजों को आने वाले समय में इस भागदौड़ से छुटकारा मिलने की उम्मीद है।
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जिला स्वास्थ्य विभाग ने करीब छह माह पहले आंखों के ब्लॉक के निर्माण की योजना तैयार की थी। पहले इस ब्लॉक का निर्माण सिविल अस्पताल में करवाया जाना प्रस्तावित था, लेकिन अब सरकार के निर्देशों पर इस योजना में फेरबदल किया गया है। स्वास्थ्य विभाग पिछले सप्ताह ही नए प्रस्ताव को स्वीकृति के लिए सरकार के पास भेज चुका है। स्वीकृति मिलते ही पीडब्ल्यूडी को बजट ट्रांसफर कर दिया जाएगा और इसके बाद टेंडर प्रक्रिया के जरिये ब्लॉक का निर्माण करवाया जाएगा।
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प्रतिदिन 70 के करीब है दैनिक ओपीडी
सिविल अस्पताल के पुराने भवन में आंखों का विशेषज्ञ इस समय ओपीडी देख रहा है। यहां दैनिक ओपीडी 60 से 70 है। प्रतिदिन सात से आठ मरीजों को ऑपरेशन के लिए यहां से भिवानी या रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। इस लिहाज से एक माह में करीब 250 मरीज आंखों के ऑपरेशन के लिए दूसरे जिलों में भेजे जा रहे हैं। आंखों का ब्लॉक बनने के बाद मरीजों को रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
पांच से 30 हजार है निजी अस्पतालों में ऑपरेशन का खर्च
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार मरीजों के परिजन दूसरे जिलों की भागदौड़ से बचने के लिए निजी अस्पतालों में जाकर भी ऑपरेशन करवा रहे हैं। एक निजी अस्पताल में आंखों के ऑपरेशन का खर्च पांच से लेकर 30 हजार तक आता है। गरीब तबके के लिए ये खर्च उठाना संभव नहीं है।
नए ब्लॉक में ये मिलेगी सुविधा
नया ब्लॉक 2250 वर्गगज जगह पर बनाया जाएगा। इसमें ऑपरेशन थिएटर की भी व्यवस्था होगी। मरीजों के तीमारदारों के लिए प्रतीक्षालय कक्ष के अलावा शौचालय और पेयजल का प्रबंध किया जाएगा। इस ब्लॉक में दस बेड की भी व्यवस्था होगी, जिन पर ऑपरेशन के बाद मरीजों को शिफ्ट किया जाएगा।
कोर्ट केस के चलते सरकार ने अब बदलवाई जगह
सरकार करीब छह माह पहले इसके लिए एक करोड़ का बजट जारी कर चुकी है। उस समय आंखों का ब्लॉक सिविल अस्पताल परिसर में बनाया जाना था। सूत्रों के अनुसार यहां कोर्ट केस की अड़चन है और इसे देखते हुए अब सरकार ने जगह बदलने के साथ जल्द ही इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
आंखों के ब्लॉक निर्माण के लिए एक करोड़ का बजट हमें मिल चुका है। नई जगह का प्रपोजल तैयार कर हमने हेड ऑफिस भेज दिया है। वहां से स्वीकृति मिलते ही ब्लॉक निर्माण के लिए राशि पीडब्ल्यूडी को ट्रांसफर कर देंगे।
डॉक्टर संजय गुप्ता, डिप्टी सीएमओ