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Charkhi Dadri News: हर गांव को नहरी पानी उपलब्ध कराएगा विभाग
Thu, 09 Jan 2025 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 09 Jan 2025 11:20 PM IST
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ट्यूबवेल की आपूर्ति से काम चलाने वाले 50 से अधिक गांवों को मिलेगी राहत, दो लाख की आबादी होगी लाभान्वित
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले में अब एक भी ऐसा गांव नहीं बचेगा, जहां पेयजल के लिए रॉ वाटर यानी नहरी पानी उपलब्ध न हो। जहां बोरिंग ट्यूबवेल से आपूर्ति की जा रही है, वहां भी विभाग नहरी पानी की उपलब्धता करवाने पर काम कर रहा है।
जिले में ऐसे 50 से अधिक गांव हैं। नहरी पानी उपलब्ध होने पर दो लाख की आबादी को राहत मिलेगी। इसके तहत जलघरों के लिए विशेष पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं और परियोजना पर काम पूरा होने के बाद लोगों को ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति समेत पेयजल संकट से राहत मिलेगी।
शहर के अलावा गांवों में पेयजल आपूर्ति में सुधार करने, दूषित पानी की आपूर्ति व पानी की बर्बादी रोकने जैसे बिंदुओं पर विभाग अब कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत पेयजल सुविधाओं में विस्तार किया जा रहा है। शहर में पेयजल का संकट हर मौसम में बना रहता है। शहर में पेयजल क्षमता कम होने की वजह से दिक्कत बन रही है। दूषित पेयजल आपूर्ति की हर वार्ड से शिकायतें मिलती आ रही हैं।
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सभी जलघरों में पानी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता करवाने के लिए मोटे आकार की पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं। अब तक एक लाख मीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। पहले विभाग खुले सीमेंट के नालों के माध्यम से जलघरोंं में पानी भरता था। अब भूमिगत पाइप लाइन बिछाई जा रही है। नालों से पानी का रिसाव होता था और रास्ते में किसान खेतों की सिंचाई कर लेते थे।
- अब केवल नहरी पानी ही बचा विकल्प
आज से तीन दशक पहले लोग कुएं, बावड़ी व जोहड़ के पानी से काम चला लेते थे। पेयजल के लिए कुओं का पानी अमृत के समान होता था जबकि आज यह जहर बना हुआ है। पहले जलघर भी इतनी संख्या में नहीं होते थे। सरकार को जलघरों के निर्माण की जरूरत ही नहीं थी। अब गांवस्तर पर जलघर बनवाने पड़ रहे हैं। इनमें नहरी पानी की उपलब्धता करवानी पड़ रही है। इसे देखते हुए विभाग अब केवल नहरी पानी हर गांव तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है।
- नहर के पानी की गुणवत्ता ट्यूबवेल से बेहतर
पानी में न्यूट्रेंस के रूप में मुख्य तत्व ऑक्सीजन, आयरन, सल्फर, फ्लोराइड व फास्फेट के अलावा अन्य ऑर्गेनिक भी होते हैं। इनका संतुलित मात्रा में पानी में मौजूद होना जरूरी है। मानव शरीर में 75 प्रतिशत पानी जलवाष्प के रूप में बाहर निकलता है। ऐसे में पोषकयुक्त पानी का सेवन ही फायदा पहुंचाता है। खारा पानी का सेवन करने से पेट संबंधी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं। पेचिश रोग की भी शिकायत हो जाती है। शरीर में सोडिक की मात्रा बढ़ जाती है। आंत संबंधी रोगों को बढ़ावा मिलता है।
वर्सन
नहरी पानी की उपलब्धता पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। गांवस्तर पर नहरी पानी की आपूर्ति करने की दिशा में काम चल रहा है। जहां ट्यूबवेल से आपूर्ति होती थी, वहां भी नहरी पानी की उपलब्धता करवाई जानी है।
-मोहनलाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
फोटो 01
शहर के जलघर में निर्माणाधीन पानी भंडारण टैंक। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिले में अब एक भी ऐसा गांव नहीं बचेगा, जहां पेयजल के लिए रॉ वाटर यानी नहरी पानी उपलब्ध न हो। जहां बोरिंग ट्यूबवेल से आपूर्ति की जा रही है, वहां भी विभाग नहरी पानी की उपलब्धता करवाने पर काम कर रहा है।
जिले में ऐसे 50 से अधिक गांव हैं। नहरी पानी उपलब्ध होने पर दो लाख की आबादी को राहत मिलेगी। इसके तहत जलघरों के लिए विशेष पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं और परियोजना पर काम पूरा होने के बाद लोगों को ट्यूबवेल के पानी की आपूर्ति समेत पेयजल संकट से राहत मिलेगी।
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शहर के अलावा गांवों में पेयजल आपूर्ति में सुधार करने, दूषित पानी की आपूर्ति व पानी की बर्बादी रोकने जैसे बिंदुओं पर विभाग अब कदम उठाने जा रहा है। इसके तहत पेयजल सुविधाओं में विस्तार किया जा रहा है। शहर में पेयजल का संकट हर मौसम में बना रहता है। शहर में पेयजल क्षमता कम होने की वजह से दिक्कत बन रही है। दूषित पेयजल आपूर्ति की हर वार्ड से शिकायतें मिलती आ रही हैं।
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सभी जलघरों में पानी की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता करवाने के लिए मोटे आकार की पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं। अब तक एक लाख मीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। पहले विभाग खुले सीमेंट के नालों के माध्यम से जलघरोंं में पानी भरता था। अब भूमिगत पाइप लाइन बिछाई जा रही है। नालों से पानी का रिसाव होता था और रास्ते में किसान खेतों की सिंचाई कर लेते थे।
- अब केवल नहरी पानी ही बचा विकल्प
आज से तीन दशक पहले लोग कुएं, बावड़ी व जोहड़ के पानी से काम चला लेते थे। पेयजल के लिए कुओं का पानी अमृत के समान होता था जबकि आज यह जहर बना हुआ है। पहले जलघर भी इतनी संख्या में नहीं होते थे। सरकार को जलघरों के निर्माण की जरूरत ही नहीं थी। अब गांवस्तर पर जलघर बनवाने पड़ रहे हैं। इनमें नहरी पानी की उपलब्धता करवानी पड़ रही है। इसे देखते हुए विभाग अब केवल नहरी पानी हर गांव तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है।
- नहर के पानी की गुणवत्ता ट्यूबवेल से बेहतर
पानी में न्यूट्रेंस के रूप में मुख्य तत्व ऑक्सीजन, आयरन, सल्फर, फ्लोराइड व फास्फेट के अलावा अन्य ऑर्गेनिक भी होते हैं। इनका संतुलित मात्रा में पानी में मौजूद होना जरूरी है। मानव शरीर में 75 प्रतिशत पानी जलवाष्प के रूप में बाहर निकलता है। ऐसे में पोषकयुक्त पानी का सेवन ही फायदा पहुंचाता है। खारा पानी का सेवन करने से पेट संबंधी कई प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं। पेचिश रोग की भी शिकायत हो जाती है। शरीर में सोडिक की मात्रा बढ़ जाती है। आंत संबंधी रोगों को बढ़ावा मिलता है।
वर्सन
नहरी पानी की उपलब्धता पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है। गांवस्तर पर नहरी पानी की आपूर्ति करने की दिशा में काम चल रहा है। जहां ट्यूबवेल से आपूर्ति होती थी, वहां भी नहरी पानी की उपलब्धता करवाई जानी है।
-मोहनलाल, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग
फोटो 01
शहर के जलघर में निर्माणाधीन पानी भंडारण टैंक। संवाद