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Charkhi Dadri News: ट्यूबवेल से सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ बनाएगा बिजली निगम
Sat, 28 Dec 2024 12:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 28 Dec 2024 12:52 AM IST
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चरखी दादरी। जिले में ट्यूबवेल से सिंचाई व्यवस्था को बिजली निगम सुदृढ़ बनाएगा। इसके लिए जिलेभर में 469 नए ट्रांसफार्मर लगाए जाएंगे। इनसे ट्यूबवेलों को बिजली की आपूर्ति की जाएगी। ऐसे में किसानों के लिए फसल की सिंचाई करना सुगम हो जाएगा। नए ट्रांसफार्मर किसानों के लिए मंगवाए जा रहे हैं। बिजली निगम इस काम को जनवरी अंत तक शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है।
रेतीले एरिया में किसान बिजली चालित ट्यूबवेल से ही फसल की सिंचाई करते हैं। रेतीले भागों में भूमिगत जलस्तर 400 फीट नीचे तक हैं। ऐसे में मोटर के जरिये पानी की उठान करनी पड़ती है। जिले में 55 प्रतिशत कृषि क्षेत्र रेतीला है। यहां सिंचाई का साधन जमीनी पानी ही है। हालांकि, नहरें भी गुजरती हैं, जिनसे सिंचाई पूरी तरह से संभव नहीं है।
रेत के टीले होने की वजह से नहरी पानी से सिंचाई करना मुश्किल होता है। खरीफ सीजन की फसल तो पूरी तरह से मानसून की बारिश पर ही निर्भर करती हैं। कई सालों से बारिश कम होने की वजह से इस क्षेत्र का भूमिगत जलस्तर ऊपर आने के बजाय नीचे जा रहा है।
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यह आने वाली पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है। आने वाले समय में यहां पेयजल संकट भी गहराने के आसार बनने लगे हैं। नहरी पानी की उपलब्धता वैसे ही कम है। जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान ज्यादा बने रहने पर ग्लेशियर पिघल रहे हैं। ऐसे में नदियों में भी पानी कम होता जा रहा है।
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रेतीले एरिया में किसान बिजली चालित ट्यूबवेल से ही फसल की सिंचाई करते हैं। रेतीले भागों में भूमिगत जलस्तर 400 फीट नीचे तक हैं। ऐसे में मोटर के जरिये पानी की उठान करनी पड़ती है। जिले में 55 प्रतिशत कृषि क्षेत्र रेतीला है। यहां सिंचाई का साधन जमीनी पानी ही है। हालांकि, नहरें भी गुजरती हैं, जिनसे सिंचाई पूरी तरह से संभव नहीं है।
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रेत के टीले होने की वजह से नहरी पानी से सिंचाई करना मुश्किल होता है। खरीफ सीजन की फसल तो पूरी तरह से मानसून की बारिश पर ही निर्भर करती हैं। कई सालों से बारिश कम होने की वजह से इस क्षेत्र का भूमिगत जलस्तर ऊपर आने के बजाय नीचे जा रहा है।
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यह आने वाली पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है। आने वाले समय में यहां पेयजल संकट भी गहराने के आसार बनने लगे हैं। नहरी पानी की उपलब्धता वैसे ही कम है। जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान ज्यादा बने रहने पर ग्लेशियर पिघल रहे हैं। ऐसे में नदियों में भी पानी कम होता जा रहा है।