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Charkhi Dadri News: पंचायतों को रास नहीं आ रही व्यायामशालाओं में हिस्सेदारी की शर्त
Tue, 06 Feb 2024 03:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Tue, 06 Feb 2024 03:10 AM IST
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बाढड़ा खंड की व्यायामशाला में अभ्यास करते युवा।
चरखी दादरी। व्यायामशाला निर्माण योजना में सरकार ने पिछले वर्ष फेरबदल कर ग्राम पंचायतों की हिस्सेदारी तय की है। इसके तहत 20 प्रतिशत हिस्सेदारी की शर्त ग्राम पंचायतों को रास नहीं आ रही है।
यही कारण है कि नए निर्देश जारी होने के बाद गांव में व्यायामशाला निर्माण के लिए पंचायत आगे नहीं आ रही हैं। पंचायतों के रुझान न लेने और सरकार के हिस्सेदारी की शर्त न हटने से ग्रामीणों को व्यायामशाला जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी से वंचित रहना पड़ रहा है। सरपंचों का कहना है कि सरकार को ये शर्त हटानी चाहिए।
जिले में 169 ग्राम पंचायतें हैं और इनमें से कई गांवों में पहले से व्यायामशालाएं बनीं हैं। किसी का कार्य अधूरा है और कोई देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुकी है। सरकार के नियम में बदलाव के कारण पंचायतें व्यायामशाला निर्माण के लिए आगे नहीं आ रही हैं।
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सरपंचों का कहना है कि पंचायत में जो भी बजट आता है वह गांव के विकास कार्यों में ही पूरा हो जाता है। पंचायत के पास आमदनी का अन्य कोई साधन भी नहीं है, जिससे वे सरकार की इस परियोजना में अपनी हिस्सेदारी तय कर सकें।
सरकार को इस तरह के कार्य स्वयं ही करने चाहिए। उनका ये भी कहना है कि सरकार ने अपनी पूर्व घोषित योजनाएं पूरी नहीं की है, किसी का कार्य अधूरा है और किसी की शुरुआत ही नहीं हुई है।
- दो श्रेणियों में बनवाई जाती है व्यायामशाला
गांवों में व्यायामशालाओं का निर्माण दो श्रेणी में करवाया जाता है। एक श्रेणी में दो एकड़ जमीन पर जबकि दूसरी श्रेणी में चार एकड़ जमीन पर व्यायामशाला का निर्माण करवाया जाता है। श्रेणी का चयन गांव की आबादी के अनुसार होता है।
- सरकार ने बजट राशि बढ़ाने के साथ हिस्सेदारी की तय
सरकार ने गत वर्ष व्यायामशाला निर्माण की बजट राशि बढ़ाई है। पहले सरकार ने दो एकड़ में व्यायामशाला निर्माण के लिए 27 लाख की राशि तय कर रखी थी, लेकिन इसे बढ़ाकर 45 लाख रुपये कर दिया। इस राशि में से 20 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्राम पंचायत की होगी।
सरपंच बोले : आमदनी ही नहीं तो कैसे करें पंचायतें हिस्सेदारी
पंचायत के पास न कोई आमदनी नहीं है और न ही कोई इतना बजट होता है जिससे वह अपनी हिस्सेदारी व्यायामशाला में कर सके। सरकार को यह नियम पहले जैसा रखना चाहिए। सरकार को व्यायामशाला निर्माण के लिए पूरा बजट अपने कोष से देना चाहिए। - राज सिंह, सरपंच, चंदेनी
सरकार से जो राशि मिलती है वह गांव के अन्य विकास कार्याें में खर्च हो जाती है। पंचायत कोष में ज्यादा पैसा नहीं बचता, जिससे वे अन्य कार्याें में लगा सकें। व्यायामशालाओं के निर्माण के लिए पूरी राशि सरकार की ओर से ही जारी की जानी चाहिए। - ओमप्रकाश, सरपंच, सांकरोड़।
पंचायत के पास बजट का पहले ही अभाव है। 20 प्रतिशत व्यायामशालाओं में हिस्सेदारी पंचायतों के लिए बेहद मुश्किल है। सरकार को ये शर्त हटानी चाहिए और व्यायामशाला निर्माण के लिए पूरा बजट स्वयं वहन करना चाहिए। - प्रवीन कुमार, सरपंच, सांतौर।
ग्राम पंचायतें केवल भूमि उपलब्ध करा सकती हैं। निर्माण कार्य में राशि का सहयोग करना पंचायत के लिए संभव नहीं है। सरकार को इस तरह की योजना लागू नहीं करनी चाहिए थी। - कृष्ण कुमार, सरपंच, भांडवा।
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यही कारण है कि नए निर्देश जारी होने के बाद गांव में व्यायामशाला निर्माण के लिए पंचायत आगे नहीं आ रही हैं। पंचायतों के रुझान न लेने और सरकार के हिस्सेदारी की शर्त न हटने से ग्रामीणों को व्यायामशाला जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी से वंचित रहना पड़ रहा है। सरपंचों का कहना है कि सरकार को ये शर्त हटानी चाहिए।
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जिले में 169 ग्राम पंचायतें हैं और इनमें से कई गांवों में पहले से व्यायामशालाएं बनीं हैं। किसी का कार्य अधूरा है और कोई देखरेख के अभाव में जर्जर हो चुकी है। सरकार के नियम में बदलाव के कारण पंचायतें व्यायामशाला निर्माण के लिए आगे नहीं आ रही हैं।
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सरपंचों का कहना है कि पंचायत में जो भी बजट आता है वह गांव के विकास कार्यों में ही पूरा हो जाता है। पंचायत के पास आमदनी का अन्य कोई साधन भी नहीं है, जिससे वे सरकार की इस परियोजना में अपनी हिस्सेदारी तय कर सकें।
सरकार को इस तरह के कार्य स्वयं ही करने चाहिए। उनका ये भी कहना है कि सरकार ने अपनी पूर्व घोषित योजनाएं पूरी नहीं की है, किसी का कार्य अधूरा है और किसी की शुरुआत ही नहीं हुई है।
- दो श्रेणियों में बनवाई जाती है व्यायामशाला
गांवों में व्यायामशालाओं का निर्माण दो श्रेणी में करवाया जाता है। एक श्रेणी में दो एकड़ जमीन पर जबकि दूसरी श्रेणी में चार एकड़ जमीन पर व्यायामशाला का निर्माण करवाया जाता है। श्रेणी का चयन गांव की आबादी के अनुसार होता है।
- सरकार ने बजट राशि बढ़ाने के साथ हिस्सेदारी की तय
सरकार ने गत वर्ष व्यायामशाला निर्माण की बजट राशि बढ़ाई है। पहले सरकार ने दो एकड़ में व्यायामशाला निर्माण के लिए 27 लाख की राशि तय कर रखी थी, लेकिन इसे बढ़ाकर 45 लाख रुपये कर दिया। इस राशि में से 20 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्राम पंचायत की होगी।
सरपंच बोले : आमदनी ही नहीं तो कैसे करें पंचायतें हिस्सेदारी
पंचायत के पास न कोई आमदनी नहीं है और न ही कोई इतना बजट होता है जिससे वह अपनी हिस्सेदारी व्यायामशाला में कर सके। सरकार को यह नियम पहले जैसा रखना चाहिए। सरकार को व्यायामशाला निर्माण के लिए पूरा बजट अपने कोष से देना चाहिए। - राज सिंह, सरपंच, चंदेनी
सरकार से जो राशि मिलती है वह गांव के अन्य विकास कार्याें में खर्च हो जाती है। पंचायत कोष में ज्यादा पैसा नहीं बचता, जिससे वे अन्य कार्याें में लगा सकें। व्यायामशालाओं के निर्माण के लिए पूरी राशि सरकार की ओर से ही जारी की जानी चाहिए। - ओमप्रकाश, सरपंच, सांकरोड़।
पंचायत के पास बजट का पहले ही अभाव है। 20 प्रतिशत व्यायामशालाओं में हिस्सेदारी पंचायतों के लिए बेहद मुश्किल है। सरकार को ये शर्त हटानी चाहिए और व्यायामशाला निर्माण के लिए पूरा बजट स्वयं वहन करना चाहिए। - प्रवीन कुमार, सरपंच, सांतौर।
ग्राम पंचायतें केवल भूमि उपलब्ध करा सकती हैं। निर्माण कार्य में राशि का सहयोग करना पंचायत के लिए संभव नहीं है। सरकार को इस तरह की योजना लागू नहीं करनी चाहिए थी। - कृष्ण कुमार, सरपंच, भांडवा।