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सफाई व्यवस्था बदहाल, पार्षद और नप सफाई कर्मी आमने-सामने
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बैठक में ईओ के सामने अपनी समस्याएं रखते पार्षद।
- फोटो : CharkhiDadri
15 दिन से सफाई कर्मियों के वार्डों में नहीं पहुंचने से शहर की सफाई व्यवस्था बेपटरी है। अधिकारियों के फोन न उठाने से खफा 12 पार्षद लामबंद होकर सोमवार सुबह नगर परिषद कार्यालय में ही धरने पर बैठ गए। इसके तुरंत बाद ईओ ने उन्हें बैठक के लिए बुला लिया। बैठक की शुरुआत में ही पार्षदों ने नप अधिकारियों पर फोन न उठाने के आरोप लगाए और इसके कुछ देर बाद ही सफाई कर्मियों ने भी नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर पार्षदों के खिलाफ धरना शुरू कर दिया। सफाई कर्मचारी यूनियन ने आरोप लगाते हुए कहा कि पार्षद उन्हें धक्का मारते हैं और काम न करने का ताना देते हैं। सफाई कर्मियों के एकाएक धरना शुरू करने की बात पार्षदों को अखर गई और उन्होंने बैठक में ईओ से इस मामले की जांच कराने की मांग भी की। इसकी पुष्टी बैठक से बाहर पार्षद महेश गुप्ता, विरेंद्र पप्पू, कुलदीप गांधी आदि पार्षदों ने की। पार्षदों ने किसी अधिकारी का नाम तो नहीं लिया लेकिन स्पष्ट कहा कि यह किसी की शह पर हुआ है, जो जांच का विषय है। वहीं, नगर परिषद ईओ ने इस संबंध में कुछ भी बोलने से मना कर दिया है। सोमवार सुबह बेपटरी सफाई व्यवस्था को लेकर नप कार्यालय में हाई वॉल्टेज ड्रामा चला। एक तरफ अधिकारियों के रवैये से खफा पार्षदों ने चंद मिनट धरना दिया तो इसके कुछ देर बाद पार्षदों के खिलाफ करीब तीस सफाई कर्मियों ने मोर्चा खोल लिया। सफाई कर्मी पार्षदों के खिलाफ धरने पर बैठ गए। सुबह करीब दस बजे वाइस चेयरमैन बबलू श्योराण, पार्षद महेश गुप्ता, पार्षद दिनेश जांगड़ा, पार्षद विरेंद्र पप्पू, पार्षद रोहित राजपूत, पार्षद मनोज वर्मा सहित पार्षद प्रतिनिधि सुभाष स्वामी, प्रवीन सैनी, एडवोकेट विक्रम श्योराण, विरेंद्र चरखी, सतबीर चौहान, दीपक कुमार ने इकट्ठे होकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। उन्होंने प्रथम तल पर सीढ़ियों के पास ही दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया। इसके कुछ देर बाद ही ईओ अभेसिंह यादव ने उन्हें बैठक के लिए अपने कार्यालय में बुला लिया। वहीं, मीडिया को बैठक से दूर रखा गया। मीडियाकर्मियों के वहां पहुंचने पर कमरे के गेट तक बंद करवा दिए गए। नप सूत्रों की मानें तो बैठक में काफी गहमागहमी हुई और पार्षदों ने शहर की बेपटरी सफाई व्यवस्था के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया।
पार्षदों ने कहा कि पिछले 15 दिनों से वार्डों के डंपिंग प्वाइंटों से कचरे का उठान नहीं हुआ है। पहले सीएम का राज्य स्तरीय कार्यक्रम और फिर स्वतंत्रता दिवस का हवाला देकर सफाई कर्मी कचरे का उठान करने नहीं पहुंच रहे हैं। जब वो अधिकारियों के पास फोन करते हैं तो उनकी कॉल तक रिसीव नहीं की जाती। वहीं, वार्ड के लोग कूड़ा निस्तारण संबंधी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं लेकिन वो उन्हें कोई आश्वासन नहीं दे पा रहे। पार्षदों ने कहा कि अगर किसी प्रशासनिक कार्यक्रम के लिए कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है तो नगर परिषद वार्डों से सफाई कर्मचारी हटाकर वहां भेज देते हैं। इससे वार्ड की सफाई व्यवस्था चौपट हो जाती है। पार्षदों ने ईओ से मांग करते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने, इसके लिए नगर परिषद एक या दो दिन के लिए ठेकेदार की मार्फत कर्मचारी हायर करे। इस मांग को ईओ ने भी मान लिया। बैठक में नगर परिषद चेयरमैन संजय छपारिया भी मौजूद थे।
कर्मचारियों के धरने पर बैठने की भी होगी जांच : ईओ से बैठक के बाद बाहर आए पार्षदों ने कहा कि सफाई कर्मचारियों अपने आप से नहीं बल्कि किसी के कहने से धरने पर बैठे हैं। पार्षदों ने सफाई कर्मियों द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि ईओ से उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच करवाई जाए। पार्षदों की मानें तो ईओ ने इसके लिए जांच के आदेश भी दे दिए हैं। वहीं, ईओ अभेसिंह यादव ने इसे विभाग का अंदरुनी मामला बताते हुए कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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दस दिन में समस्या का समाधान कराने के आश्वासन पर सिरे चढ़ी बात : सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई बैठक दोपहर एक बजे तक चली। बैठक के दौरान पार्षदों ने अपनी समस्याएं ईओ के सामने रखीं। पार्षदों ने कहा कि पिछले 15 दिनों से डोर-टू-डोर कचरा उठान सेवा ठप पड़ी है। इसके अलावा वार्ड के डंपिंग प्वाइंटों से कचरा नहीं उठाया जा रहा। शहर की प्रमुख सड़कों पर भी कचरे के ढेर लगे हुए हैं।
पार्षदों और सफाई कर्मचारियों के बीच सफाई व्यवस्था को लेकर विवाद था। मैंने आज पार्षदों के साथ बैठक कर मामला सुलझवा दिया है। आगामी कुछ दिन में नए ऑटो टीपर हमारे पास पहुंच जाएंगे और दस दिन में सफाई व्यवस्था सृदुढ़ करने का आश्वासन पार्षदों को दिया गया है। -अभेसिंह यादव, ईओ, नगर परिषद।
पार्षद सफाई कर्मियों का शोषण करते हैं। हमारे साथ धक्का-मुक्की तक की जाती है। पार्षद हमें बताते हैं कि इस गली की सफाई करनी है, किसकी नहीं। हमारी मांग है कि हमें काम संबंधी दिशा-निर्देश पार्षद या पार्षद प्रतिनिधियों की बजाय अधिकार ही दें। इस मांग को लेकर हम धरने पर बैठे हैं। - सुरेंद्र, सफाई कर्मी यूनियन प्रधान।
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पार्षदों ने कहा कि पिछले 15 दिनों से वार्डों के डंपिंग प्वाइंटों से कचरे का उठान नहीं हुआ है। पहले सीएम का राज्य स्तरीय कार्यक्रम और फिर स्वतंत्रता दिवस का हवाला देकर सफाई कर्मी कचरे का उठान करने नहीं पहुंच रहे हैं। जब वो अधिकारियों के पास फोन करते हैं तो उनकी कॉल तक रिसीव नहीं की जाती। वहीं, वार्ड के लोग कूड़ा निस्तारण संबंधी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं लेकिन वो उन्हें कोई आश्वासन नहीं दे पा रहे। पार्षदों ने कहा कि अगर किसी प्रशासनिक कार्यक्रम के लिए कर्मचारियों की जरूरत पड़ती है तो नगर परिषद वार्डों से सफाई कर्मचारी हटाकर वहां भेज देते हैं। इससे वार्ड की सफाई व्यवस्था चौपट हो जाती है। पार्षदों ने ईओ से मांग करते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने, इसके लिए नगर परिषद एक या दो दिन के लिए ठेकेदार की मार्फत कर्मचारी हायर करे। इस मांग को ईओ ने भी मान लिया। बैठक में नगर परिषद चेयरमैन संजय छपारिया भी मौजूद थे।
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कर्मचारियों के धरने पर बैठने की भी होगी जांच : ईओ से बैठक के बाद बाहर आए पार्षदों ने कहा कि सफाई कर्मचारियों अपने आप से नहीं बल्कि किसी के कहने से धरने पर बैठे हैं। पार्षदों ने सफाई कर्मियों द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि ईओ से उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच करवाई जाए। पार्षदों की मानें तो ईओ ने इसके लिए जांच के आदेश भी दे दिए हैं। वहीं, ईओ अभेसिंह यादव ने इसे विभाग का अंदरुनी मामला बताते हुए कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
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दस दिन में समस्या का समाधान कराने के आश्वासन पर सिरे चढ़ी बात : सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई बैठक दोपहर एक बजे तक चली। बैठक के दौरान पार्षदों ने अपनी समस्याएं ईओ के सामने रखीं। पार्षदों ने कहा कि पिछले 15 दिनों से डोर-टू-डोर कचरा उठान सेवा ठप पड़ी है। इसके अलावा वार्ड के डंपिंग प्वाइंटों से कचरा नहीं उठाया जा रहा। शहर की प्रमुख सड़कों पर भी कचरे के ढेर लगे हुए हैं।
पार्षदों और सफाई कर्मचारियों के बीच सफाई व्यवस्था को लेकर विवाद था। मैंने आज पार्षदों के साथ बैठक कर मामला सुलझवा दिया है। आगामी कुछ दिन में नए ऑटो टीपर हमारे पास पहुंच जाएंगे और दस दिन में सफाई व्यवस्था सृदुढ़ करने का आश्वासन पार्षदों को दिया गया है। -अभेसिंह यादव, ईओ, नगर परिषद।
पार्षद सफाई कर्मियों का शोषण करते हैं। हमारे साथ धक्का-मुक्की तक की जाती है। पार्षद हमें बताते हैं कि इस गली की सफाई करनी है, किसकी नहीं। हमारी मांग है कि हमें काम संबंधी दिशा-निर्देश पार्षद या पार्षद प्रतिनिधियों की बजाय अधिकार ही दें। इस मांग को लेकर हम धरने पर बैठे हैं। - सुरेंद्र, सफाई कर्मी यूनियन प्रधान।

धरने पर बैठे सफाई कर्मचारी पार्षदों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए।- फोटो : CharkhiDadri

शहर में सड़क किनारे बने डंपिंग प्वाइंट पर पड़ा कचरा।- फोटो : CharkhiDadri