{"_id":"6abaaa9f8bbea696da01f027","slug":"commission-agents-say-gate-passes-are-being-issued-at-the-mandi-while-cotton-is-reaching-the-mills-directly-charkhi-dadri-news-c-126-1-cdr1004-160927-2026-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Charkhi Dadri News: आढ़ती बोले-गेटपास मंडी में कट रहे, कपास सीधे मिलों में पहुंच रही","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Charkhi Dadri News: आढ़ती बोले-गेटपास मंडी में कट रहे, कपास सीधे मिलों में पहुंच रही
Mon, 28 Sep 2026 11:27 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Mon, 28 Sep 2026 11:27 PM IST
विज्ञापन
मार्केट कमेटी कार्यालय के बाहर विरोध जताते आढ़ती।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। अनाज मंडी में कपास की खरीद को लेकर आढ़तियों और मार्केट कमेटी प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। आढ़तियों ने मार्केट कमेटी प्रशासन और कपास मिल संचालकों पर मिलीभगत कर मंडी के बाहर कपास की खरीद करवाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कागजों में कपास मंडी में पहुंच रही है और गेटपास भी मंडी में कट रहे हैं लेकिन वास्तविकता में कपास सीधे मिलों में पहुंचाई जा रही है।
इससे मंडी में आढ़तियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और किसानों को भी उचित बोली का लाभ नहीं मिल पा रहा। समस्या को लेकर आढ़तियों ने पूर्व प्रधान रामकुमार रिटोलिया के नेतृत्व में बैठक की। इसके बाद उन्होंने मार्केट कमेटी सचिव विद्यासागर से मुलाकात कर मामले में तत्काल रोक लगाने और कपास की खरीद प्रक्रिया की जांच करवाने की मांग की। आढ़तियों ने साफ कहा कि यदि मंडी के बाहर कपास की खरीद का सिलसिला नहीं रुका तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
मंडी में 8700 तक नहीं पहुंच रही बोली, मिलों में 9000 में खरीद
बैठक में आढ़तियों ने आरोप लगाया कि मंडी में कपास की बोली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है। पूर्व प्रधान रामकुमार रिटोलिया ने कहा कि मंडी में कपास की बोली 8700 रुपये प्रति क्विंटल तक भी नहीं पहुंच पा रही जबकि मिल संचालक करीब 9000 रुपये प्रति क्विंटल में कपास खरीद रहे हैं। ऐसे में किसान मंडी में कपास लेकर आने के बजाय सीधे मिलों का रुख कर रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि स्थिति यह हो गई है कि मंडी में 25 पल्ली कपास भी नहीं बिक पा रही है। इससे आढ़तियों के सामने कारोबार चलाने का संकट पैदा हो गया है। आढ़तियों का सवाल है कि यदि मंडी में खरीद ही नहीं होगी तो वे अपनी दुकानें खोलकर किसका इंतजार करेंगे।
120 करोड़ का कारोबार घटकर 12 लाख पर पहुंचा
आढ़तियों ने बैठक में मंडी के कपास कारोबार में आई कथित गिरावट का आंकड़ा भी रखा। रामकुमार रिटोलिया के अनुसार वर्ष 2024-25 में चरखी दादरी अनाज मंडी से करीब 120 करोड़ रुपये तक की कपास बेची गई थी। वर्तमान में यह आंकड़ा घटकर महज करीब 12 लाख रुपये रह गया है। आढ़तियों का कहना है कि इतनी बड़ी गिरावट केवल बाजार की स्थिति से नहीं समझी जा सकती। उनके अनुसार मंडी के बाहर होने वाली खरीद की जांच की जानी चाहिए। आढ़तियों ने कहा कि मंडी में आने वाले किसानों को बोली, तौल और भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था मिलनी चाहिए। यदि कपास मंडी के बजाय सीधे मिलों में पहुंचती रही तो मंडी व्यवस्था का उद्देश्य ही प्रभावित होगा।
300 दुकानों पर ताला लगाकर गेट पर बैठेंगे
आढ़तियों ने बाजार कमेटी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि मंडी की करीब 300 दुकानों को बंद कर ताला लगाया जाएगा और सभी आढ़ती गेट के सामने धरने पर बैठेंगे।
आढ़तियों का कहना है कि वे किसी किसान या मिल संचालक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन मंडी में लागू नियमों का पालन होना चाहिए। यदि गेटपास मंडी में कटता है तो कपास की वास्तविक आवक और बिक्री भी मंडी व्यवस्था के तहत होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से गेटपास की जांच, मंडी के बाहर कपास की खरीद की निगरानी और संदिग्ध आवक की जांच कराने की मांग की।
मंडी में हो चुकी 19 हजार से अधिक क्विंटल की आवक
अनाज मंडी में कपास की आवक एक सितंबर से शुरू हुई थी। सोमवार को 38 किसान 980 क्विंटल कपास मंडी में लेकर आए। वहीं सोमवार तक कुल 19,138 क्विंटल कपास की आवक हो चुकी है। जिसके लिए करीब 900 किसानों के नाम पोर्टल से गेटपास जारी किए गए हैं।
वर्जन:
मंडी में बोली लगाने वाले मिलर नियमानुसार कपास की खरीद कर रहे हैं। कोई भी कर्मचारी अवैध कपास की बिक्री नहीं करवा रहा है। आढ़तियों के आरोप बेबुनियाद है। आढ़ती बाजरा की खरीद को लेकर आए थे, इस दौरान उन्होंने कपास खरीद का भी मुद्दा उठाया है हम आढ़तियों की शिकायत अनुसार मिलों के बाहर गश्त बढ़ाई जाएगी। वहीं मिल में ऐसा मिलने पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।-- विद्या सागर, सचिव बाजार कमेटी,
विज्ञापन
इससे मंडी में आढ़तियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है और किसानों को भी उचित बोली का लाभ नहीं मिल पा रहा। समस्या को लेकर आढ़तियों ने पूर्व प्रधान रामकुमार रिटोलिया के नेतृत्व में बैठक की। इसके बाद उन्होंने मार्केट कमेटी सचिव विद्यासागर से मुलाकात कर मामले में तत्काल रोक लगाने और कपास की खरीद प्रक्रिया की जांच करवाने की मांग की। आढ़तियों ने साफ कहा कि यदि मंडी के बाहर कपास की खरीद का सिलसिला नहीं रुका तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
विज्ञापन
मंडी में 8700 तक नहीं पहुंच रही बोली, मिलों में 9000 में खरीद
बैठक में आढ़तियों ने आरोप लगाया कि मंडी में कपास की बोली अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है। पूर्व प्रधान रामकुमार रिटोलिया ने कहा कि मंडी में कपास की बोली 8700 रुपये प्रति क्विंटल तक भी नहीं पहुंच पा रही जबकि मिल संचालक करीब 9000 रुपये प्रति क्विंटल में कपास खरीद रहे हैं। ऐसे में किसान मंडी में कपास लेकर आने के बजाय सीधे मिलों का रुख कर रहे हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि स्थिति यह हो गई है कि मंडी में 25 पल्ली कपास भी नहीं बिक पा रही है। इससे आढ़तियों के सामने कारोबार चलाने का संकट पैदा हो गया है। आढ़तियों का सवाल है कि यदि मंडी में खरीद ही नहीं होगी तो वे अपनी दुकानें खोलकर किसका इंतजार करेंगे।
120 करोड़ का कारोबार घटकर 12 लाख पर पहुंचा
आढ़तियों ने बैठक में मंडी के कपास कारोबार में आई कथित गिरावट का आंकड़ा भी रखा। रामकुमार रिटोलिया के अनुसार वर्ष 2024-25 में चरखी दादरी अनाज मंडी से करीब 120 करोड़ रुपये तक की कपास बेची गई थी। वर्तमान में यह आंकड़ा घटकर महज करीब 12 लाख रुपये रह गया है। आढ़तियों का कहना है कि इतनी बड़ी गिरावट केवल बाजार की स्थिति से नहीं समझी जा सकती। उनके अनुसार मंडी के बाहर होने वाली खरीद की जांच की जानी चाहिए। आढ़तियों ने कहा कि मंडी में आने वाले किसानों को बोली, तौल और भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था मिलनी चाहिए। यदि कपास मंडी के बजाय सीधे मिलों में पहुंचती रही तो मंडी व्यवस्था का उद्देश्य ही प्रभावित होगा।
300 दुकानों पर ताला लगाकर गेट पर बैठेंगे
आढ़तियों ने बाजार कमेटी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे सामूहिक आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि मंडी की करीब 300 दुकानों को बंद कर ताला लगाया जाएगा और सभी आढ़ती गेट के सामने धरने पर बैठेंगे।
आढ़तियों का कहना है कि वे किसी किसान या मिल संचालक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन मंडी में लागू नियमों का पालन होना चाहिए। यदि गेटपास मंडी में कटता है तो कपास की वास्तविक आवक और बिक्री भी मंडी व्यवस्था के तहत होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से गेटपास की जांच, मंडी के बाहर कपास की खरीद की निगरानी और संदिग्ध आवक की जांच कराने की मांग की।
मंडी में हो चुकी 19 हजार से अधिक क्विंटल की आवक
अनाज मंडी में कपास की आवक एक सितंबर से शुरू हुई थी। सोमवार को 38 किसान 980 क्विंटल कपास मंडी में लेकर आए। वहीं सोमवार तक कुल 19,138 क्विंटल कपास की आवक हो चुकी है। जिसके लिए करीब 900 किसानों के नाम पोर्टल से गेटपास जारी किए गए हैं।
वर्जन:
मंडी में बोली लगाने वाले मिलर नियमानुसार कपास की खरीद कर रहे हैं। कोई भी कर्मचारी अवैध कपास की बिक्री नहीं करवा रहा है। आढ़तियों के आरोप बेबुनियाद है। आढ़ती बाजरा की खरीद को लेकर आए थे, इस दौरान उन्होंने कपास खरीद का भी मुद्दा उठाया है हम आढ़तियों की शिकायत अनुसार मिलों के बाहर गश्त बढ़ाई जाएगी। वहीं मिल में ऐसा मिलने पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।