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नगर परिषद ने सवा एकड़ जगह करवाई साफ, डंपिंग यार्ड पर ही डाला जाएगा कचरा
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शहर से कचरे का उठान करती नप टीम।
- फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। रानिया वाला जोहड़ कचरा निस्तारण केंद्र पर कचरा निस्तारण को लेकर नगर परिषद और एजेंसी के बीच शुरू हुए गतिरोध पर आखिरकार विराम लग गया है। नगर परिषद ने बीच का रास्ता निकालते ही डंपिंग यार्ड पर करीब सवा एकड़ जमीन साफ करवा दी है और अब यहां शहर के कचरा डाला जा रहा है। नप सूत्रों के अनुसार पुराने कचरे के ढेर पर नया कचरा न डालने से एजेंसी को भी कोई एतराज नहीं है। पिछले करीब चार दिनों से चली आ रही कचरा निस्तारण की समस्या का समाधान हो गया है।
गौरतलब है कि नगर परिषद ने रानिया वाला जोहड़ डंपिंग यार्ड पर पड़े कचरे के निस्तारण का टेंडर एक एजेंसी को अलॉट किया है। यह टेंडर करीब डेढ़ साल पहले कचरे की मात्रा के अनुसार तय हुआ था। करीब चार दिन पहले एजेंसी ने यहां और कचरा डालने पर एतराज जताते हुए कचरा डालने पहुंचे वाहनों को लौटा दिया था। कचरा निस्तारण की समस्या पैदा होने पर शहर में सफाई व्यवस्था बेपटरी थी। घरों से भी कचरे का उठान नहीं हो रहा था, जिसके चलते 80 हजार की आबादी परेशान थी। अमर उजाला ने चार सितंबर के संस्करण में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। अमर उजाला ने ‘डंपिंग यार्ड पर टेंडर से दोगुनी मात्रा, एजेंसी ने नहीं डालने दिया कचरा’ नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
राहत की बात यह है कि नगर परिषद अधिकारियों ने इस गतिरोध पर विराम लगाते हुए कचरा निस्तारण का प्रबंध कर लिया है। एक अधिकारी ने बताया कि डंपिंग यार्ड करीब चार एकड़ में है। एजेंसी का काम आधी जगह पर चल रहा है। करीब सवा एकड़ जमीन अब साफ करवाई गई है,। इस व्यवस्था से एजेंसी भी संतुष्ट है और अब नप ने यहां दोबारा से कचरा डालना शुरू कर दिया है। इससे पहले लगातार तीन दिन तक कचरे से भरे ऑटो टीपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों और नप कार्यालय में ही खड़े रहे। गतिरोध खत्म होने पर वार्डों में 15 हजार से अधिक घरों में रहने वाले लोग प्रभावित थे।
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शहर से प्रतिदिन निकलता है 65 वाहन कचरा
शहर से प्रतिदिन 15 ट्रैक्टर-ट्रॉली और 50 ऑटो टीपर कचरा निकलता है। नगर परिषद के 23 ऑटो टीपर के अलावा पांच ट्रैक्टर-ट्रॉली पर तैनात टीमें शहर के डंपिंग प्वाइंट और घरों से कचरे का उठान करती हैं। हालांकि अप्रैल से नगर परिषद ने वेस्ट उठान की एवज में यूजर चार्ज लेना भी शुरू किया है और यह चार्ज कैटेगरी के हिसाब से तय है।
मॉनीटरिंग के लिए दूसरी एजेंसी का इंतजार
डंपिंग यार्ड पर 50 हजार टन से अधिक कचरा पड़ा है। इस कचरे के निस्तारण कार्य की मॉनीटरिंग एक अन्य एजेंसी को करनी है। हालांकि अभी यह टेंडर अलॉट नहीं हुआ है और दूसरी ओर नगर परिषद ऐसे में डंपिंग यार्ड पर पहले से पड़े कचरे का निस्तारण कार्य भी शुरू नहीं करवा रही है। इस प्रोजेक्ट पर दो करोड़ से अधिक की लागत आनी है।
डंपिंग यार्ड पर करीब सवा एकड़ जमीन खाली है और अब हमने वहीं कचरा डालना शुरू कर दिया है। अब टीमें नियमित वार्डों और सड़कों से कचरे का उठान कर रही हैं।
प्रशांत पाराशर, सचिव, नगर परिषद
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गौरतलब है कि नगर परिषद ने रानिया वाला जोहड़ डंपिंग यार्ड पर पड़े कचरे के निस्तारण का टेंडर एक एजेंसी को अलॉट किया है। यह टेंडर करीब डेढ़ साल पहले कचरे की मात्रा के अनुसार तय हुआ था। करीब चार दिन पहले एजेंसी ने यहां और कचरा डालने पर एतराज जताते हुए कचरा डालने पहुंचे वाहनों को लौटा दिया था। कचरा निस्तारण की समस्या पैदा होने पर शहर में सफाई व्यवस्था बेपटरी थी। घरों से भी कचरे का उठान नहीं हो रहा था, जिसके चलते 80 हजार की आबादी परेशान थी। अमर उजाला ने चार सितंबर के संस्करण में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। अमर उजाला ने ‘डंपिंग यार्ड पर टेंडर से दोगुनी मात्रा, एजेंसी ने नहीं डालने दिया कचरा’ नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
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राहत की बात यह है कि नगर परिषद अधिकारियों ने इस गतिरोध पर विराम लगाते हुए कचरा निस्तारण का प्रबंध कर लिया है। एक अधिकारी ने बताया कि डंपिंग यार्ड करीब चार एकड़ में है। एजेंसी का काम आधी जगह पर चल रहा है। करीब सवा एकड़ जमीन अब साफ करवाई गई है,। इस व्यवस्था से एजेंसी भी संतुष्ट है और अब नप ने यहां दोबारा से कचरा डालना शुरू कर दिया है। इससे पहले लगातार तीन दिन तक कचरे से भरे ऑटो टीपर और ट्रैक्टर-ट्रॉली सड़कों और नप कार्यालय में ही खड़े रहे। गतिरोध खत्म होने पर वार्डों में 15 हजार से अधिक घरों में रहने वाले लोग प्रभावित थे।
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शहर से प्रतिदिन निकलता है 65 वाहन कचरा
शहर से प्रतिदिन 15 ट्रैक्टर-ट्रॉली और 50 ऑटो टीपर कचरा निकलता है। नगर परिषद के 23 ऑटो टीपर के अलावा पांच ट्रैक्टर-ट्रॉली पर तैनात टीमें शहर के डंपिंग प्वाइंट और घरों से कचरे का उठान करती हैं। हालांकि अप्रैल से नगर परिषद ने वेस्ट उठान की एवज में यूजर चार्ज लेना भी शुरू किया है और यह चार्ज कैटेगरी के हिसाब से तय है।
मॉनीटरिंग के लिए दूसरी एजेंसी का इंतजार
डंपिंग यार्ड पर 50 हजार टन से अधिक कचरा पड़ा है। इस कचरे के निस्तारण कार्य की मॉनीटरिंग एक अन्य एजेंसी को करनी है। हालांकि अभी यह टेंडर अलॉट नहीं हुआ है और दूसरी ओर नगर परिषद ऐसे में डंपिंग यार्ड पर पहले से पड़े कचरे का निस्तारण कार्य भी शुरू नहीं करवा रही है। इस प्रोजेक्ट पर दो करोड़ से अधिक की लागत आनी है।
डंपिंग यार्ड पर करीब सवा एकड़ जमीन खाली है और अब हमने वहीं कचरा डालना शुरू कर दिया है। अब टीमें नियमित वार्डों और सड़कों से कचरे का उठान कर रही हैं।
प्रशांत पाराशर, सचिव, नगर परिषद