चरखी दादरी में चिकित्सकों की हड़ताल: महिला की जान पर बनी तो प्रदर्शन छोड़ फर्ज निभाने पहुंचे डॉक्टर
हरि नगर निवासी 21 साल की युवती ने मंगलवार सुबह घर पर संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगा ली। महिला की जान पर बनी तो डायल 112 टीम ने सूचना मिलने ही 22 मिनट में 5 किमी का सफर तय कर अस्पताल पहुंचाया तो वहीं हड़ताल पर बैठे चिकित्सक भी फर्ज निभाने दौड़े। जिले में मांगों को लेकर जिले के 56 सरकारी चिकित्सक रहे सामूहिक अवकाश पर रहे। फिर भी नौ इमरजेंसी केस अटेंड किए लेकिन फंदे पर लटकी महिला की जान नहीं बचा सके।
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लापरवाही के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले पुलिस व चिकित्सकों ने मंगलवार को हरियाणा के चरखी दादरी में कर्तव्य निष्ठता और इंसानियत की नजीर पेश की है। शहर के हरि नगर निवासी 21 वर्षीय एक युवती ने मंगलवार सुबह घर पर संदिग्ध परिस्थितियों में फंदा लगा लिया।
इसकी सूचना मिलने पर डायल 112 की टीम ने 22 मिनट में 5 किलोमीटर का सफर तय कर महिला को फंदे से उतार कर अस्पताल पहुंचाया। वहीं, मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठे चिकित्सकों को जैसे ही मामले की सूचना मिली वह भी फर्ज निभाने तुंरत इमरजेंसी कक्ष पहुंचे और मरीज की जान बचाने का प्रयास किया, हालांकि महिला को बचाया नहीं जा सका।
सिविल अस्पताल में हड़ताल के बावजूद सुबह से शाम तक चिकित्सकों ने 9 इमरजेंसी केस अटेंड किए। इनमें फंदा लगाने वाली महिला, हादसों व झगड़ों में गंभीर रूप से घायल लोग शामिल रहे। 56 सरकारी चिकित्सकों के सामूहिक अवकाश से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों पर करीब 2000 की ओपीडी प्रभावित हुई। चिकित्सकों ने कहा कि अगर दो दिन के अंदर सरकार ने मांगें पूरी नहीं की तो फिर 14 जनवरी से वो पूर्णतया हड़ताल शुरू कर देंगे।
सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल में शामिल चिकित्सकों ने सिविल अस्पताल के मुख्य गेट पर बैठकर रोष जताया। खास बात यह रही कि हड़ताल में शामिल सभी चिकित्सकों ने सामाजिक दूरी और मास्क संबंधी हिदायत का ख्याल रखा। सिविल अस्पताल में 16, एमसीएच में 3, तीनों पीएचसी पर 5-5 और 12 पीएचसी पर 22 चिकित्सक तैनात हैं।
यूं प्रभावित हुई दो हजार की ओपीडी
सिविल अस्पताल की दैनिक ओपीडी इस समय करीब 800 है। मातृ-शिशु अस्पताल की ओपीडी भी 150 से पार है। वहीं, जिले में तीन सीएचसी हैं और एक सीएचसी की दैनिक ओपीडी इस समय 90 तक पहुंची हुई है। जिले में 12 पीएचसी भी हैं और एक पीएचसी की दैनिक ओपीडी 40 से पार रहती है। इस प्रकार से जिले में अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को मिलाकर दो हजार की ओपीडी प्रभावित होने का अनुमान है।
चिकित्सकों की प्रमुख मांगें
4, 9, 13 और 20 साल पर एससीपी दी जाए। स्पेशल कैडर और सीधे एसएमओ की भर्ती पर रोक लगे। चिकित्सकों का कहना है कि ये तीन मांगें पूरी होने पर ज्यादा से ज्यादा चिकित्सक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवाएं देंगे।
हड़ताल से मरीजों को झेलनी पड़ी परेशानी
केस-1 : शहर के वार्ड-9 निवासी मनीष ने बताया कि मंगलवार सुबह अपने दोनों बेटों की तबीयत खराब होने पर वो 10:45 पर वह अस्पताल पहुंचा था। ओपीडी देखने वाला कोई चिकित्सक नहीं मिला। एक बेटे को खांसी की शिकायत दी थी तो दूसरे को चक्कर आने की। डॉक्टर्स न मिलने के कारण अब निजी अस्पताल में जाकर उपचार करवाना पड़ेगा।
केस-2 : खुडाना निवासी सतीश ने बताया कि वो अपनी पत्नी को उपचार के लिए दादरी सिविल अस्पताल लाया था। चिकित्सकों की हड़ताल की उसे जानकारी नहीं थी और अस्पताल पहुंचने पर यह बात उसे पता चली। उसने बताया कि पत्नी की डिलिवरी होनी है और उसे चिकित्सक के पास दिखाने के लिए दादरी सिविल अस्पताल लाया था और निजी अस्पताल लेकर जाऊंगा।
इमरजेंसी केस आने पर चिकित्सकों ने मरीज का उपचार भी किया है। जिले के सभी सरकारी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। अगर सरकार दो दिन में मांगें पूरी नहीं करती है तो 14 जनवरी से चिकित्सक पूर्णतया हड़ताल कर देंगे। - डॉ. आशीष मान, एचसीएमएस, महासचिव