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Charkhi Dadri News: महिला अधिवक्ताओं के लिए आरक्षित हों चैंबर, विश्राम कक्ष भी मिले
Fri, 08 Nov 2024 12:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 08 Nov 2024 12:15 AM IST
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बार एसोसिएशन कार्यालय में आयोजित संवाद में मौजूद अधिवक्ता। संवाद
संवाद
- दादरी कोर्ट परिसर में महिलाओं अधिवक्ताओं के लिए सुविधाओं की कमी, अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में खुलकर रखीं समस्याएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। कोर्ट परिसर स्थित बार एसोसिएशन कार्यालय में वीरवार को अमर उजाला की ओर से अपराजिता के तहत संवाद आयोजित किया गया। इसमें महिला अधिवक्ताओं ने महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। साथ ही परिसर में विश्राम कक्ष व चैंबर बनवाने की मांग की।
संवाद में महिला अधिवक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। उन्हें कानून संबंधी जानकारी भी होनी चाहिए। ताकि, वे किसी अपराध या घरेलू हिंसा की शिकार न होने पाएं। संवाद के दौरान महिला अधिवक्ताओं ने अपनी समस्याएं रखीं। कहा कि परिसर में प्राथमिक उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए। कहा कि कई बार गर्भवती अधिवक्ताओं को चक्कर आ जाते हैं तो उन्हें अस्पताल लेकर जाना पड़ता है। साथ ही विश्राम कक्ष बनवाने की भी मांग रखी।
संवाद के दौरान मौजूद रहे बार एसोसिएशन के प्रधान नसीब राणा ने एसोसिएशन की ओर से जल्द इन मांगों को पूरा कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार को भी नए चैंबर्स में महिला अधिवक्ताओं के लिए रिजर्वेशन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। सप्ताह में एक अधिवक्ता समस्या निवारण शिविर का भी आयोजन किया जाना चाहिए।
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- महिला अधिवक्ताओं के लिए हो क्रेच की घोषणा
दादरी कोर्ट में महिला अधिवक्ताओं के लिए क्रैच (शिशुगृह ) की सुविधा होनी चाहिए। दंपती अधिवक्ता को सबसे ज्यादा मुश्किल होती है। अब भी दो अधिवक्ता अपने बच्चों को घर छोड़कर कोर्ट में आ रही हैं।
-नरेश कुमारी, अधिवक्ता
- प्राथमिक चिकित्सा होनी बहुत जरूरी है। प्रतिदिन किसी महिला अधिवक्ता को समस्या नहीं होती, लेकिन, कई बार गर्भवती महिलाओं की तबीयत अचानक खराब हो जाती है।
-मोनिका मलिक, अधिवक्ता
- वॉशरूम की सुविधा पुरुषों और महिलाओं के लिए आसपास की गई है। वॉशरूम का आकार भी छोटा है। महिला अधिवक्ताओं के लिए पुरुषों के स्थान से थोड़ा हटकर वॉशरूम होने चाहिए।
-कमलेश जटराणा, अधिवक्ता
- अधिवक्ताओं व उनके मुलजिमों का डीसी से मिलने के लिए विशेष समय तय होना चाहिए। समय तय न होने के कारण उन्हें कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार तो मुलाकात भी नहीं होती।
-शर्मिला राणा, अधिवक्ता
- महिलाओं के लिए अलग से विश्राम कक्ष होना चाहिए। इसमें वे एक साथ बैठकर लंच कर सकती है। कुछ देर के लिए आराम भी कर सकती हैं। वे पुरुषों के साथ ही लाइब्रेरी में बैठकर लंच करती हैं।
-मोनिका महला, अधिवक्ता
- चैंबर्स की फिलहाल कमी बनी हुई है। कुछ महिलाओं को चैंबर भी नहीं मिले हैं। इसलिए वे पुरुष अधिवक्ताओं के साथ साझेदारी में रहती हैं। महिला अधिवक्ताओं को भी चैंबर मिलने चाहिए।
-रेणू सांगवान, अधिवक्ता
- महिला अधिवक्ताओं के लिए कार्यक्रम आयोजन के लिए कोई सुविधा नहीं है। पुरुषों के लिए बड़े हॉल की व्यवस्था है, लेकिन, महिला अधिवक्ताओं को उनके समान ही यह अधिकार व सुविधा मिलनी चाहिए।
-पूनम महला, महिला अधिवक्ता
वर्सन:
बार से संबंधित सभी समस्याओं का जल्द समाधान कराया जाएगा। महिलाओं को कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन, सरकार को भी नए चैंबर्स में महिलाओं के रिजर्वेशन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। महिलाओं के लिए कुछ चैंबर रिजर्व रखने चाहिए। इनके अलावा सप्ताह में एक अधिवक्ता समस्या निवारण शिविर का भी आयोजन किया जाना चाहिए।
-नसीब राणा, प्रधान, दादरी बार एसोसिएशन
फोटो-01
नरेश कुमारी
फोटो- 02
पूनम मलिक
फोटो- 03
मोनिका महला
फोटो-04
रेणू सांगवान
फोटो-05
शर्मिला जटराणा
फोटो-06
कमलेश राणा
फोटो-07
पूनम महला
फोटो-08
नसीब राणा।
फोटो 09
बार एसोसिएशन कार्यालय में आयोजित संवाद में मौजूद अधिवक्ता। संवाद
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- दादरी कोर्ट परिसर में महिलाओं अधिवक्ताओं के लिए सुविधाओं की कमी, अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में खुलकर रखीं समस्याएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। कोर्ट परिसर स्थित बार एसोसिएशन कार्यालय में वीरवार को अमर उजाला की ओर से अपराजिता के तहत संवाद आयोजित किया गया। इसमें महिला अधिवक्ताओं ने महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। साथ ही परिसर में विश्राम कक्ष व चैंबर बनवाने की मांग की।
संवाद में महिला अधिवक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। उन्हें कानून संबंधी जानकारी भी होनी चाहिए। ताकि, वे किसी अपराध या घरेलू हिंसा की शिकार न होने पाएं। संवाद के दौरान महिला अधिवक्ताओं ने अपनी समस्याएं रखीं। कहा कि परिसर में प्राथमिक उपचार की सुविधा मिलनी चाहिए। कहा कि कई बार गर्भवती अधिवक्ताओं को चक्कर आ जाते हैं तो उन्हें अस्पताल लेकर जाना पड़ता है। साथ ही विश्राम कक्ष बनवाने की भी मांग रखी।
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संवाद के दौरान मौजूद रहे बार एसोसिएशन के प्रधान नसीब राणा ने एसोसिएशन की ओर से जल्द इन मांगों को पूरा कराने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि सरकार को भी नए चैंबर्स में महिला अधिवक्ताओं के लिए रिजर्वेशन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। सप्ताह में एक अधिवक्ता समस्या निवारण शिविर का भी आयोजन किया जाना चाहिए।
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- महिला अधिवक्ताओं के लिए हो क्रेच की घोषणा
दादरी कोर्ट में महिला अधिवक्ताओं के लिए क्रैच (शिशुगृह ) की सुविधा होनी चाहिए। दंपती अधिवक्ता को सबसे ज्यादा मुश्किल होती है। अब भी दो अधिवक्ता अपने बच्चों को घर छोड़कर कोर्ट में आ रही हैं।
-नरेश कुमारी, अधिवक्ता
- प्राथमिक चिकित्सा होनी बहुत जरूरी है। प्रतिदिन किसी महिला अधिवक्ता को समस्या नहीं होती, लेकिन, कई बार गर्भवती महिलाओं की तबीयत अचानक खराब हो जाती है।
-मोनिका मलिक, अधिवक्ता
- वॉशरूम की सुविधा पुरुषों और महिलाओं के लिए आसपास की गई है। वॉशरूम का आकार भी छोटा है। महिला अधिवक्ताओं के लिए पुरुषों के स्थान से थोड़ा हटकर वॉशरूम होने चाहिए।
-कमलेश जटराणा, अधिवक्ता
- अधिवक्ताओं व उनके मुलजिमों का डीसी से मिलने के लिए विशेष समय तय होना चाहिए। समय तय न होने के कारण उन्हें कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार तो मुलाकात भी नहीं होती।
-शर्मिला राणा, अधिवक्ता
- महिलाओं के लिए अलग से विश्राम कक्ष होना चाहिए। इसमें वे एक साथ बैठकर लंच कर सकती है। कुछ देर के लिए आराम भी कर सकती हैं। वे पुरुषों के साथ ही लाइब्रेरी में बैठकर लंच करती हैं।
-मोनिका महला, अधिवक्ता
- चैंबर्स की फिलहाल कमी बनी हुई है। कुछ महिलाओं को चैंबर भी नहीं मिले हैं। इसलिए वे पुरुष अधिवक्ताओं के साथ साझेदारी में रहती हैं। महिला अधिवक्ताओं को भी चैंबर मिलने चाहिए।
-रेणू सांगवान, अधिवक्ता
- महिला अधिवक्ताओं के लिए कार्यक्रम आयोजन के लिए कोई सुविधा नहीं है। पुरुषों के लिए बड़े हॉल की व्यवस्था है, लेकिन, महिला अधिवक्ताओं को उनके समान ही यह अधिकार व सुविधा मिलनी चाहिए।
-पूनम महला, महिला अधिवक्ता
वर्सन:
बार से संबंधित सभी समस्याओं का जल्द समाधान कराया जाएगा। महिलाओं को कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन, सरकार को भी नए चैंबर्स में महिलाओं के रिजर्वेशन की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। महिलाओं के लिए कुछ चैंबर रिजर्व रखने चाहिए। इनके अलावा सप्ताह में एक अधिवक्ता समस्या निवारण शिविर का भी आयोजन किया जाना चाहिए।
-नसीब राणा, प्रधान, दादरी बार एसोसिएशन
फोटो-01
नरेश कुमारी
फोटो- 02
पूनम मलिक
फोटो- 03
मोनिका महला
फोटो-04
रेणू सांगवान
फोटो-05
शर्मिला जटराणा
फोटो-06
कमलेश राणा
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पूनम महला
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नसीब राणा।
फोटो 09
बार एसोसिएशन कार्यालय में आयोजित संवाद में मौजूद अधिवक्ता। संवाद