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एक ऐसा भी गांव... जहां बेटी जन्म पर आंगनवाड़ी वर्कर मां को देती है 101 रुपये शगुन
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A village too ... where an Anganwadi worker gives Rs 101 of mother on birth of daughter
- फोटो : CharkhiDadri
कमोद गांव के लिंगानुपात में सुधार करने के लिए आंगनबाड़ी वर्कर राजवंती की शगुन मुहिम कारगर साबित हुई है। कन्या जन्म पर आंगनबाड़ी वर्कर मां को अपने पास से 101 रुपये का शगुन देती हैं और संभवत: ऐसा करने वाला कमोद जिले का पहला गांव है। पिछले पांच सालों से वह लगातार यह मुहिम चलाए हुए हैं और अब तक बेटियों को जन्म देने वालीं एक हजार से अधिक महिलाओं को सम्मानित कर चुकी हैं। ग्राम पंचायत ने भी आंगनबाड़ी वर्कर की इस मुहिम को सराहा है।
अमर उजाला से बातचीत में आंगनबाड़ी वर्कर राजवंती ने बताया कि 2015 में गांव का लिंगानुपात गिरकर 477 पर पहुंच गया था। इसमें सुधार लाने के लिए उन्होंने शगुन योजना शुरू की थी, जो अब तक जारी है। इसके तहत कन्या जन्म पर नवजात के कपड़ों के अलावा आंगनबाड़ी वर्कर मां को 101 रुपये का शगुन देती है। अगर किसी महिला को दूसरी या तीसरी बेटी हो जाए तो राजवंती दादी को भी शॉल के अलावा 101 रुपये का शगुन देती है। आंगनबाड़ी वर्कर की मुहिम और ग्राम पंचायत के प्रयासों के चलते पिछले पांच सालों से कमोद गांव का लिंगानुपात एक हजार से पार चल रहा है। इस साल गांव का लिंगानुपात 1100 है।
सेना में डॉक्टर से लेकर मुख्य सचिव का पद संभाल रहीं गांव की बेटियां
सरपंच सुदर्शन ने बताया कि गांव में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। 125 पूर्व सैनिकों के अलावा गांव में 49 मौजूदा सैनिक भी हैं। गांव की बेटी पूजा सेना में डॉक्टर हैं, जबकि अन्नूबाला महिला बाल विकास विभाग की मुख्य सचिव हैं। गांव निवासी बुजुर्ग धावक रामफल राज्य और राष्ट्र स्तरीय स्पर्धाओं में 25 मेडल जीत चुके हैं।
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ये हैं कमोद का पिछले छह सालों का लिंगानुपात
वर्ष- लिंगानुपात
2014- 1372
2015- 477
2016- 1300
2017- 1600
2018- 1500
2019-2222
2020- 1100
2015 में मैंन गांव में शगुन योजना शुरू की थी। दूसरी और तीसरी बेटी होने मैं नवजात की मां के अलावा दादी को भी सम्मानित करती हूं। पिछले पांच सालों से गांव का लिंगानुपात एक हजार से ऊपर रहा है।
राजवंती, आंगनबाड़ी वर्कर
आंगनबाड़ी वर्कर की यह मुहिम सराहनीय है। इसके चलते गांव के लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ है। गांव की बेटियां सेना और अन्य क्षेत्रों में जाकर माता-पिता के अलावा क्षेत्र का नाम भी रोशन कर रही हैं।
सुदर्शन, सरपंच
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अमर उजाला से बातचीत में आंगनबाड़ी वर्कर राजवंती ने बताया कि 2015 में गांव का लिंगानुपात गिरकर 477 पर पहुंच गया था। इसमें सुधार लाने के लिए उन्होंने शगुन योजना शुरू की थी, जो अब तक जारी है। इसके तहत कन्या जन्म पर नवजात के कपड़ों के अलावा आंगनबाड़ी वर्कर मां को 101 रुपये का शगुन देती है। अगर किसी महिला को दूसरी या तीसरी बेटी हो जाए तो राजवंती दादी को भी शॉल के अलावा 101 रुपये का शगुन देती है। आंगनबाड़ी वर्कर की मुहिम और ग्राम पंचायत के प्रयासों के चलते पिछले पांच सालों से कमोद गांव का लिंगानुपात एक हजार से पार चल रहा है। इस साल गांव का लिंगानुपात 1100 है।
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सेना में डॉक्टर से लेकर मुख्य सचिव का पद संभाल रहीं गांव की बेटियां
सरपंच सुदर्शन ने बताया कि गांव में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। 125 पूर्व सैनिकों के अलावा गांव में 49 मौजूदा सैनिक भी हैं। गांव की बेटी पूजा सेना में डॉक्टर हैं, जबकि अन्नूबाला महिला बाल विकास विभाग की मुख्य सचिव हैं। गांव निवासी बुजुर्ग धावक रामफल राज्य और राष्ट्र स्तरीय स्पर्धाओं में 25 मेडल जीत चुके हैं।
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ये हैं कमोद का पिछले छह सालों का लिंगानुपात
वर्ष- लिंगानुपात
2014- 1372
2015- 477
2016- 1300
2017- 1600
2018- 1500
2019-2222
2020- 1100
2015 में मैंन गांव में शगुन योजना शुरू की थी। दूसरी और तीसरी बेटी होने मैं नवजात की मां के अलावा दादी को भी सम्मानित करती हूं। पिछले पांच सालों से गांव का लिंगानुपात एक हजार से ऊपर रहा है।
राजवंती, आंगनबाड़ी वर्कर
आंगनबाड़ी वर्कर की यह मुहिम सराहनीय है। इसके चलते गांव के लिंगानुपात में काफी सुधार हुआ है। गांव की बेटियां सेना और अन्य क्षेत्रों में जाकर माता-पिता के अलावा क्षेत्र का नाम भी रोशन कर रही हैं।
सुदर्शन, सरपंच