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Charkhi Dadri News: 104 वर्षीय सुरसती देवी और 100 वर्षीय जीवनी देवी 1952 से लगातार कर रहीं मतदान
Fri, 27 Sep 2024 08:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 27 Sep 2024 08:56 PM IST
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शतायु मतदाता जीवनी देवी। स्रोत: परिजन
विशेष खबर :: 100 की उम्र में भी बूथ पर जाकर वोट डालती हैं सुरसती व जीवनी देवी
- रूदड़ोल निवासी दोनों बुजुर्ग महिलाएं हर साल बूथ पर जाकर करती हैं मतदान, इस बार भी घर बैठे मतदान करने से किया किनारा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मतदान प्रक्रिया में भाग लेना प्रत्येक नागरिक की लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। रूदड़ोल की रहने वाली 104 वर्षीय सुरसती देवी और 100 वर्षीय जीवनी देवी अपनी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं। दोनों गांव की बुजुर्ग महिला मतदाता हैं। ये हरियाणा के गठन के 14 साल पहले से मतदान कर रही हैं। दोनों बुजुर्ग महिलाओं के परिजनों की मानें तो उन्होंने पहला वोट वर्ष 1952 में डाला था। तब से अब तक एक बार भी मताधिकार का प्रयोग करने में पीछे नहीं रही हैं।
दरअसल, जिस उम्र में आज लोग चारपाई से नहीं उठ पाते, उस उम्र में दोनों शतायु महिला मतदाता प्रतिदिन सैर करती हैं। ये वोट डालने से भी कभी किनारा नहीं करतीं। आज 85 से 90 साल के लोग घर से मतदान कर रहे हैं। इन दोनों ने इस बार भी घर बैठे मतदान करने से किनारा किया है।
दोनों बुजुर्ग मतदाता एक ही तरह से चुनाव में प्रत्याशी का चयन करती हैं। चुनावी मैदान में मौजूद हर प्रत्याशी की कार्यशैली के आधार पर उनकी समीक्षा करती हैं। बाद में सही उम्मीदवार का चयन कर उसके पक्ष में मतदान करती हैं।
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- पहले चुनाव में हो जाते थे दंगे, अब बदल चुका माहौल : सुरसती देवी
सुरसती देवी 72 साल से मतदान कर देश के लोकतंत्र में अपनी सहभागिता निभा रही हैं। उन्होंने सबसे पहला वोट साल 1952 में डाला था। इसके बाद से वह हर चुनाव में हिस्सा ले रही हैं। आज भी उनमें पहले जैसा उत्साह व उमंग है।
सुरसती देवी ने बताया कि पहले चुनाव में दंगे होते थे। लोग अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए कमजोर ग्रामीणों पर साम, दाम, दंड भेद का प्रयोग करते थे। उस जमाने में उन्होंने स्वतंत्र व निष्पक्ष होकर मतदान किया। इस बार भी बूथ पर जाकर ही मतदान करेंगी।
- कभी किसी के दबाव में आकर वोट नहीं डाला : जीवनी देवी
जीवनी देवी भी 1952 से ही लोकतंत्र का हिस्सा बनी हुई हैं। आज वह 100 साल की हो चुकी हैं। लेकिन, उनकी तंदुरुस्ती अब भी बरकरार है। उन्होंने बताया कि कभी किसी के कहने पर वोट नहीं डाला। हमेशा अपनी मर्जी से मतदान किया है। ताउम्र मतदान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह सच व स्पष्ट बोलती हैं। जिस उम्मीदवार को उन्हें वोट नहीं देना होता, घर-घर दौरे के समय उन्हें वोट देने से मना कर देती हैं। अब वह मतदान केंद्र पर जाकर अपने पसंद के प्रत्याशी को वोट देंगी।
फोटो - 05
शतायु मतदाता सुरसती देवी। स्रोत : परिजन
फोटो - 06
शतायु मतदाता जीवनी देवी। स्रोत : परिजन
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- रूदड़ोल निवासी दोनों बुजुर्ग महिलाएं हर साल बूथ पर जाकर करती हैं मतदान, इस बार भी घर बैठे मतदान करने से किया किनारा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। मतदान प्रक्रिया में भाग लेना प्रत्येक नागरिक की लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है। रूदड़ोल की रहने वाली 104 वर्षीय सुरसती देवी और 100 वर्षीय जीवनी देवी अपनी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रही हैं। दोनों गांव की बुजुर्ग महिला मतदाता हैं। ये हरियाणा के गठन के 14 साल पहले से मतदान कर रही हैं। दोनों बुजुर्ग महिलाओं के परिजनों की मानें तो उन्होंने पहला वोट वर्ष 1952 में डाला था। तब से अब तक एक बार भी मताधिकार का प्रयोग करने में पीछे नहीं रही हैं।
दरअसल, जिस उम्र में आज लोग चारपाई से नहीं उठ पाते, उस उम्र में दोनों शतायु महिला मतदाता प्रतिदिन सैर करती हैं। ये वोट डालने से भी कभी किनारा नहीं करतीं। आज 85 से 90 साल के लोग घर से मतदान कर रहे हैं। इन दोनों ने इस बार भी घर बैठे मतदान करने से किनारा किया है।
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दोनों बुजुर्ग मतदाता एक ही तरह से चुनाव में प्रत्याशी का चयन करती हैं। चुनावी मैदान में मौजूद हर प्रत्याशी की कार्यशैली के आधार पर उनकी समीक्षा करती हैं। बाद में सही उम्मीदवार का चयन कर उसके पक्ष में मतदान करती हैं।
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- पहले चुनाव में हो जाते थे दंगे, अब बदल चुका माहौल : सुरसती देवी
सुरसती देवी 72 साल से मतदान कर देश के लोकतंत्र में अपनी सहभागिता निभा रही हैं। उन्होंने सबसे पहला वोट साल 1952 में डाला था। इसके बाद से वह हर चुनाव में हिस्सा ले रही हैं। आज भी उनमें पहले जैसा उत्साह व उमंग है।
सुरसती देवी ने बताया कि पहले चुनाव में दंगे होते थे। लोग अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए कमजोर ग्रामीणों पर साम, दाम, दंड भेद का प्रयोग करते थे। उस जमाने में उन्होंने स्वतंत्र व निष्पक्ष होकर मतदान किया। इस बार भी बूथ पर जाकर ही मतदान करेंगी।
- कभी किसी के दबाव में आकर वोट नहीं डाला : जीवनी देवी
जीवनी देवी भी 1952 से ही लोकतंत्र का हिस्सा बनी हुई हैं। आज वह 100 साल की हो चुकी हैं। लेकिन, उनकी तंदुरुस्ती अब भी बरकरार है। उन्होंने बताया कि कभी किसी के कहने पर वोट नहीं डाला। हमेशा अपनी मर्जी से मतदान किया है। ताउम्र मतदान करने की बात कही। उन्होंने कहा कि वह सच व स्पष्ट बोलती हैं। जिस उम्मीदवार को उन्हें वोट नहीं देना होता, घर-घर दौरे के समय उन्हें वोट देने से मना कर देती हैं। अब वह मतदान केंद्र पर जाकर अपने पसंद के प्रत्याशी को वोट देंगी।
फोटो - 05
शतायु मतदाता सुरसती देवी। स्रोत : परिजन
फोटो - 06
शतायु मतदाता जीवनी देवी। स्रोत : परिजन

शतायु मतदाता जीवनी देवी। स्रोत: परिजन