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मानसून की सम्मानजनक विदाई से 67 हजार किसानों को 10 करोड़ की बचत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2022 10:33 PM IST
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10 crore savings to 67 thousand farmers due to respectful farewell to monsoon
चरखी दादरी। मानसून की सम्मानजनक विदाई से 67 हजार किसानों को दस करोड़ की बचत हुई है। अब किसानों को सिंचाई करके गेहूं, जौ व सरसों की बिजाई नहीं करनी पड़ेगी। इससे जिले के किसानों का लागत खर्च कम होगा और बिजाई भी आसानी से हो जाएगी। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर है। इस बार रबी सीजन का बिजाई का रकबा भी बढ़ने के आसार बन गए हैं।
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जिले में रबी की फसलों के रूप में अधिकतर किसान गेहूूं, सरसों, जौ की ज्यादा मात्रा में बिजाई करते हैं। मानसून की विदाई के समय बढ़िया बारिश होने पर अब नवंबर माह के अंत तक खेतों में नमी यानी आल बनी रहेगी। इससे किसान बिना सिंचाई करके ही बिजाई कर पाएंगे। बता दें कि जिले का 55 प्रतिशत से अधिक एरिया रेतीला है। इस एरिया में तो बिजली चालित ट्यूबवेल से सिंचाई की जाती है। इन किसानों ने तो बारिश नहीं होने पर सरसों की बिजाई के लिए फव्वारा सिस्टम से सिंचाई भी शुरू कर दी थी ताकि सरसों की समय पर बिजाई की जा सके।
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कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की अगेती बिजाई का समय 15 अक्तूबर तक माना जाता है। श्राद्ध के बाद आमतौर पर किसान सरसों की बिजाई शुरू कर देते हैं लेकिन बिजाई के लिए अनुकूल तापमान भी विशेष महत्व रखता है। तापमान सामान्य से अधिक होने पर कई बार बिजाई में देरी भी करनी पड़ जाती है ताकि फसल शुरूआत में ही धोलिया नामक रोग की चपेट में न आए। ज्यादा तापमान में फसल में रोग का प्रकोप बढ़ जाता है।
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वहीं गेहूं की बिजाई का समय नवंबर प्रथम सप्ताह में शुरू हो जाता है जिसकी 25 नवंबर तक अगेती बिजाई की जा सकती है जिन किसानों ने धान की रोपाई कर रखी है उनमें धान कटने के बाद गेहूं की पछेती बिजाई 20 दिसंबर तक की जा सकेगी।
किसान बोले : प्रति एकड़ बचेगा 15 लीटर डीजल
किसान सोमबीर सिंह, टेकराम व सुरेंद्र सिंह का कहना है कि मानसून की विदाई बढ़िया हो गई है। क्षेत्र में बारिश की कमी बनी हुई थी और अब बारिश होने पर सरसों, जौ व गेहूं की बिजाई आसान हो जाएगी। रबी की फसलों की बिजाई करने से पहले किसानों को सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी और इससे प्रति एकड़ 15 लीटर डीजल के खर्च की बचत हो जाएगी।
ये है जिले का कृषि योग्य रकबा
जिले में हर साल औसतन 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं और करीब 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सरसों की बिजाई होती आ रही है। अब मानसून की बारिश बढ़िया होने की वजह से बिजाई का यह रकबा बढ़ने के आसार बन गए हैं क्योंकि बरानी एरिया में सिंचाई के साधन भी किसानों के पास नहीं हैं। बरानी एरिया तो पूरी तरह से बारिश पर ही निर्भर करता रहा है।
यूं होगी 10 करोड़ की बचत
जिले में सरसों का इस बार बिजाई योग्य रकबा करीब 55 हजार एकड़ रहने की उम्मीद है। इसके अलावा जौ व मेथी का रकबा करीब 20 हजार रहने की उम्मीद है। अगर बारिश नहीं होती तो प्रति एकड़ किसान पर बिजाई से पहले सिंचाई करने पर 1400 रुपये का आर्थिक बोझ पड़ता और इस लिहाज से 75 हजार एकड़ क्षेत्र में बिजाई से पहले सिंचाई करने पर करीब 10 करोड़ का डीजल खर्च होगा।

23 व 24 सितंबर को हुई बारिश से रबी की फसलों की बिजाई आसान हो जाएगी। अब नवंबर माह तक खेतों में नमी बनी रहेगी। बरानी एरिया में सरसों व चना की बिजाई का एरिया बढ़ने की उम्मीद है।
डॉ. जितेंद्र सिहाग, तकनीकी कृषि अधिकारी
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