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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Officials kept shuffling RTI application for 5 years; compensation must be paid.

Chandigarh-Haryana News: आरटीआई के आवेदन को 5 साल तक घूमाते रहे अफसर, देना होगा हर्जाना

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- फरीदाबाद नगर निगम को 30 दिन में 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आयोग ने दिया आदेश
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फरीदाबाद नगर निगम से 2020 में गौरी मौलेखी ने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी लेकिन जवाब के लिए उन्हें पांच साल से ज्यादा इंतजार करना पड़ा। अफसर आवेदन को फुटबॉल की तरह कभी नगर निगम तो कभी दूसरे विभाग के पाले में डालते रहे। अब हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने 30 दिन के अंदर नगर निगम को 10 हजार रुपये मुआवजा देने और जिम्मेदार अधिकारियों की विभागीय जांच कराने के आदेश दिए हैं।

मौलेखी ने 23 दिसंबर 2020 को पशु जन्म नियंत्रण नियम 2001 के पालन से जुड़ी जानकारी मांगी थी। इसमें निगरानी एवं क्रियान्वयन समिति के गठन, मास्टर प्लान, पशु जन्म नियंत्रण के लिए नियुक्त एजेंसी और भारतीय नस्ल के कुत्तों को गोद लेने को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी शामिल थी।
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मामला आयोग तक पहुंचा तो 2021 से 2026 तक कई बार आदेश जारी हुए। इसके बावजूद पूरी जानकारी समय पर नहीं मिली। कुछ जानकारी 21 अक्तूबर 2021 को और बाकी 17 जुलाई 2025 को दी गई। आयोग ने पाया कि बाद में दी गई जानकारी भी कुछ बिंदुओं पर अधूरी थी। आयोग ने कहा कि आरटीआई के आवेदन को अलग-अलग विभागों और शाखाओं में भेजते रहना सूचना नहीं देने का उचित कारण नहीं हो सकता। 11 सितंबर 2026 की सुनवाई में संबंधित सेनेटरी इंस्पेक्टर के बजाय सहायक सेनेटरी इंस्पेक्टर के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश होने पर भी आयोग ने नाराजगी जताई।
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आयोग ने दिए जांच के निर्देश
राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने कहा कि प्रशासनिक देरी से सूचना का अधिकार बेअसर नहीं किया जा सकता। निगम आयुक्त को जिम्मेदार अधिकारियों की विभागीय जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच दो महीने में पूरी कर 15 दिन में रिपोर्ट देनी होगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी स्थानीय निकाय विभाग को सभी निकायों में आरटीआई व्यवस्था दुरुस्त करने और विभागीय पत्राचार के नाम पर आवेदन लंबित न रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।


यह है नियम
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सामान्य आरटीआई आवेदन पर संबंधित जन सूचना अधिकारी को 30 दिनों के भीतर सूचना देनी होती है। जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ी सूचना के मामले में यह अवधि 48 घंटे है। तय समय में सूचना न देने पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई का प्रावधान है।
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