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टोक्यो की हार से सबक लेकर सुधारेंगे प्रदर्शन : मनीष
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अपने परिवार के साथ बॉक्सर मनीष कौशिक। संवाद
- फोटो : Bhiwani
नवनीत शर्मा
भिवानी। टोक्यो ओलंपिक के लिए देश के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों के रूप में चुना गया था। हालांकि मैच हार गया और इस बार पदक से चूक गया हूं, लेकिन इससे बहुत कुछ सीखने को भी मिला है। ओलंपिक में मिला अनुभव अगले ओलंपिक में पदक दिलाने में मददगार साबित होगा। यह कहना है दुनिया के छठे नंबर के बॉक्सर मनीष कौशिक का।
मनीष को पहले मैच में हार का सामना करना पड़ा थो। टोक्यो से लौटे अर्जुन अवॉर्डी मनीष कौशिक ने बताया कि वे इस बार पदक से चूके जरूर हैं, लेकिन हिम्मत नहीं हारे हैं। उनके हौसले आज भी बुलंद हैं।
विश्व के श्रेष्ठ खिलाड़ियों ने बताया - हार बुरा वक्त, इससे पार पाने के लिए करनी होगी कड़ी मेहनत
मनीष कौशिक ने कहा कि टोक्यो ओलंपिक के दौरान विश्व के श्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुलाकात हुई। उनके जीवन और खेल के खट्टे-मीठे अनुभव साझा किए। उस दौरान उनसे सीखने को मिला कि खिलाड़ी की हार एक बुरा वक्त है, जिसको पार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। ताकि रिंग में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। हार-जीत जीवन के दो ऐसे पहलू हैं जो बारी-बारी जीवन में सभी को मिलते हैं। ऐसे में अगर जीत प्राप्त करनी है तो इसके लिए पसीना भी बहाना होगा। मेरा पहला ओलंपिक था तो अनुभव बहुत हुआ है। मैच की व्यवस्था से लेकर खिलाड़ियों से मिलने पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
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गांव के स्टेडियम से ही शुरू कर रहे गोल्ड तक का सफर
बातचीत के दौरान मनीष कौशिक ने बताया कि टोक्यो में मिली हार को वे अगले मैच में गोल्ड मेडल में बदलना चाहते हैं। इसके लिए गांव के स्टेडियम में ही अभ्यास शुरू कर दिया है। इस बार नवंबर में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित अगले साल एशियन चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भाग लेंगे। खुद के विकास और बेहतरीन प्रदर्शन के लिए गांव में ही छह घंटे का अभ्यास शुरू कर दिया है। करीब 15 दिन बाद कैंप में जाकर गोल्ड मेडल के लिए रिंग में पसीना बहाएंगे। (संवाद)
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भिवानी। टोक्यो ओलंपिक के लिए देश के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों के रूप में चुना गया था। हालांकि मैच हार गया और इस बार पदक से चूक गया हूं, लेकिन इससे बहुत कुछ सीखने को भी मिला है। ओलंपिक में मिला अनुभव अगले ओलंपिक में पदक दिलाने में मददगार साबित होगा। यह कहना है दुनिया के छठे नंबर के बॉक्सर मनीष कौशिक का।
मनीष को पहले मैच में हार का सामना करना पड़ा थो। टोक्यो से लौटे अर्जुन अवॉर्डी मनीष कौशिक ने बताया कि वे इस बार पदक से चूके जरूर हैं, लेकिन हिम्मत नहीं हारे हैं। उनके हौसले आज भी बुलंद हैं।
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विश्व के श्रेष्ठ खिलाड़ियों ने बताया - हार बुरा वक्त, इससे पार पाने के लिए करनी होगी कड़ी मेहनत
मनीष कौशिक ने कहा कि टोक्यो ओलंपिक के दौरान विश्व के श्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुलाकात हुई। उनके जीवन और खेल के खट्टे-मीठे अनुभव साझा किए। उस दौरान उनसे सीखने को मिला कि खिलाड़ी की हार एक बुरा वक्त है, जिसको पार करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। ताकि रिंग में बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। हार-जीत जीवन के दो ऐसे पहलू हैं जो बारी-बारी जीवन में सभी को मिलते हैं। ऐसे में अगर जीत प्राप्त करनी है तो इसके लिए पसीना भी बहाना होगा। मेरा पहला ओलंपिक था तो अनुभव बहुत हुआ है। मैच की व्यवस्था से लेकर खिलाड़ियों से मिलने पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
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गांव के स्टेडियम से ही शुरू कर रहे गोल्ड तक का सफर
बातचीत के दौरान मनीष कौशिक ने बताया कि टोक्यो में मिली हार को वे अगले मैच में गोल्ड मेडल में बदलना चाहते हैं। इसके लिए गांव के स्टेडियम में ही अभ्यास शुरू कर दिया है। इस बार नवंबर में होने वाली वर्ल्ड चैंपियनशिप सहित अगले साल एशियन चैंपियनशिप और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भाग लेंगे। खुद के विकास और बेहतरीन प्रदर्शन के लिए गांव में ही छह घंटे का अभ्यास शुरू कर दिया है। करीब 15 दिन बाद कैंप में जाकर गोल्ड मेडल के लिए रिंग में पसीना बहाएंगे। (संवाद)