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Bhiwani News: कोई भी जीते बवानीखेड़ा को मिलेगा इस बार नया विधायक
Wed, 02 Oct 2024 02:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 02 Oct 2024 02:40 AM IST
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बवानीखेड़ा में चुनावी चर्चा करते ग्रामीण
नरेंद्र भाकर
बवानीखेड़ा। बवानीखेड़ा हलका में विधानसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही यहां से नए प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी भी पहली दफा ही मैदान में हैं। इससे एक बात तो तय है कि बवानीखेड़ा को इस बार विधायक का नया चेहरा ही मिलेगा।
यहां पार्टी प्रत्याशियों के बीच तो सीधा मुकाबला बना ही है और निर्दलीय प्रत्याशी भी कड़ी टक्कर देने में लगे हैं। कांग्रेस से बागी ही पार्टी प्रत्याशी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर रहे हैं। इसके अलावा यहां टिकट नहीं मिलने से नाराज नेताओं की भी लंबी फेहरिस्त है। इन नेताओं से भी भितरघात का डर बना है। दादू नगरी बवानीखेड़ा में इस बार चुनावी समीकरण ऐसे बने हैं कि भाजपा और कांग्रेस के साथ अन्य पार्टी प्रत्याशियों को भी पसीने छूटे हैं।
बवानीखेड़ा विधानसभा के चुनावी अखाड़े में कांग्रेस से प्रदीप नरवाल, भाजपा से कपूर वाल्मीकि, आम आदमी पार्टी से धर्मबीर कुगंड,जजपा से गुड्डी लांग्यान, बसपा से संदीप सिंह व आम आदमी परिवर्तन पार्टी से मंजू रानी सहित निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विकास, संदीप, रमेश कुमार, मास्टर सतबीर रतेरा चुनावी मैदान में डटे हैं। वहीं देखा जाए तो मुकाबला निर्दलीय बनाम पार्टी प्रत्याशियों के बीच बन गया है।
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निर्दलीय उम्मीदवार में शामिल मास्टर सतबीर रतेरा पिछले कई सालों से हलके में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। वहीं यह प्रत्याशी कांग्रेस का बागी नेता भी है। वहीं पूर्व विधायक रामकिशन फौजी भी मान मनोव्वल के बाद मान तो गए हैं, लेकिन चुनाव में ज्यादा सक्रिय नहीं दिख रहे हैं।पिछले पांच विधानसभा चुनाव में तीन बार जीत और दो बार हार चुके रामकिशन फौजी का रुख भी प्रत्याशी की जीत के लिए मायने रखेगा।
स्टार प्रचारकों के सहारे वोट साधने में जुटे नेता
वोट साधने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी हलके के गांव मिलकपुर में यादवों के गढ़ में चुनावी सभा कराई है। रविवार हलके के गांव खरक में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी राजपूत मतदाताओं को साधने पहुंचे। बवानीखेड़ा में राजपूत बाहुल्य कई गांव हैं जो यहां के प्रत्याशी के हार-जीत के समीकरणों को सीधे-सीधे प्रभावित करेगी।
यह है बवानीखेड़ा में मतदाताओं के जातीय समीकरण
जानने वाली बात यह भी है कि हलके में कुल 2,17,111 वोट हैं। इसमें से मुख्यतः 58,245 वोट जाट मतदाता, 30,175 चमार जाति के मतदाता व 34,769 राजपूत 24,238 ब्राह्मण समाज के हैं। वहीं दूसरी ओर हलके में 9,173 वाल्मीकि 8,128, धानक 7,818, पंजाबी 2,345, ओड 1,600, महाजन 7,530, यादव 4,648, खाती 3,966, गुर्जर 4,077, कुम्हार 3,122, नाई 3,244, सैनी 1610, लोहार 2435, सांसी 409, मुसलमान 312, बंजारा 160, सिख जट 180, सपेरा 1,260, सुनार 2,602, नायक 1,110, गोस्वामी 601, राय सिंह 566, जोगी 105, भाट 402, मनिहार 146, धोबी 822, झीमर 1308, दर्जी सहित 2,17,111 मतदाता हैं। देखना यह होगा कि कौन सी पार्टी कौन-कौन समाज के कितने वोट हासिल कर पाती है।
दो अक्तूबर को कांग्रेस कर सकती है बड़ी रैली
यह भी सुनने में आया है कि कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप नरवाल के लिए दो अक्तूबर को बवानीखेड़ा में प्रियंका गांधी की बड़ी रैली करने जा रही है। कांग्रेस के पैराशूट उम्मीदवार के चुनावी प्रचार में अब तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी कई चुनावी सभा कर चुके हैं। देखा जाए तो आज तक इस सीट की कभी पूछ नहीं हो पाई थी लेकिन अब की बार यह राज्य में हॉट सीट बन गई है। इस पर राज्य से लेकर केंद्र तक सभी बड़े नेताओं की नजरे लग गई हैं।
अब तक ये बन चुके हैं बवानीखेड़ा से विधायक
राजनीतिक जानकारों की माने तो 1967 में जगन्नाथ, 1968 में सूबेदार प्रभु सिंह, 1972 में अमर सिंह, 1977 में जगन्नाथ, 1982 में फिर अमर सिंह, 1987 में जगन्नाथ, 1991 में फिर अमर सिंह, 1996 में जगन्नाथ यहां से विधायक रह चुके हैं। फिर रामकिशन फौजी यहां से 2000, 2005 और 2009 में विधायक रहे हैं। यहां से 2014 व 2019 में बिशंबर वाल्मीकि ने जीत दर्ज की है।
- त्रिकोणीय मुकाबले में पार्टी नेताओं के छूटे पसीने, स्टार प्रचारकों के सहारे नैया पार लगाने की जुगत
-जातीय समीकरण बनाकर बहुसंख्यक मतदाताओं को भी साधने में जुटे नेता
चुनाव में बवानीखेड़ा कस्बा के मुद्दे काफी हावी रहेंगे। क्योंकि अधिकतर वार्डों में गंदे पानी की निकासी नहीं हो रही है। वहीं पीने के पानी की भी दिक्कत बनी रहती है। मूलभूत सुविधाओं के लिए कस्बे में जो उम्मीदवार काम कराएगा। उसे ही विधानसभा में भेजने का काम करेंगे। -संतोष देवी कस्बावासी
बवानीखेड़ा हलका में इस बार नए प्रत्याशी हैं। इन चुनावों में चाहे जो भी जीते, उससे यही उम्मीद है कि वह लोगों से किए वादे निभाए और इलाके में विकास कराए। चुनावों में भाईचारा बनाकर रखना बेहद जरूरी है। -जीतराम शर्मा कस्बावासी
विधानसभा चुनावों के दौरान बवानीखेड़ा पहले के मुकाबले इस बार काफी चर्चा में है, इसकी एक वजह यह है कि पुराने दावेदार बाहर हो गए हैं, नए चेहरे चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीति में नए लोगों को मौका मिलना भी जरूरी है ताकि उन्हें जनता अपनी कसौटी पर परख सके और इलाके में विकास कराए। -हनुमान पाराशर।
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बवानीखेड़ा। बवानीखेड़ा हलका में विधानसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही यहां से नए प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी भी पहली दफा ही मैदान में हैं। इससे एक बात तो तय है कि बवानीखेड़ा को इस बार विधायक का नया चेहरा ही मिलेगा।
यहां पार्टी प्रत्याशियों के बीच तो सीधा मुकाबला बना ही है और निर्दलीय प्रत्याशी भी कड़ी टक्कर देने में लगे हैं। कांग्रेस से बागी ही पार्टी प्रत्याशी के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर रहे हैं। इसके अलावा यहां टिकट नहीं मिलने से नाराज नेताओं की भी लंबी फेहरिस्त है। इन नेताओं से भी भितरघात का डर बना है। दादू नगरी बवानीखेड़ा में इस बार चुनावी समीकरण ऐसे बने हैं कि भाजपा और कांग्रेस के साथ अन्य पार्टी प्रत्याशियों को भी पसीने छूटे हैं।
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बवानीखेड़ा विधानसभा के चुनावी अखाड़े में कांग्रेस से प्रदीप नरवाल, भाजपा से कपूर वाल्मीकि, आम आदमी पार्टी से धर्मबीर कुगंड,जजपा से गुड्डी लांग्यान, बसपा से संदीप सिंह व आम आदमी परिवर्तन पार्टी से मंजू रानी सहित निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर विकास, संदीप, रमेश कुमार, मास्टर सतबीर रतेरा चुनावी मैदान में डटे हैं। वहीं देखा जाए तो मुकाबला निर्दलीय बनाम पार्टी प्रत्याशियों के बीच बन गया है।
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निर्दलीय उम्मीदवार में शामिल मास्टर सतबीर रतेरा पिछले कई सालों से हलके में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। वहीं यह प्रत्याशी कांग्रेस का बागी नेता भी है। वहीं पूर्व विधायक रामकिशन फौजी भी मान मनोव्वल के बाद मान तो गए हैं, लेकिन चुनाव में ज्यादा सक्रिय नहीं दिख रहे हैं।पिछले पांच विधानसभा चुनाव में तीन बार जीत और दो बार हार चुके रामकिशन फौजी का रुख भी प्रत्याशी की जीत के लिए मायने रखेगा।
स्टार प्रचारकों के सहारे वोट साधने में जुटे नेता
वोट साधने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी हलके के गांव मिलकपुर में यादवों के गढ़ में चुनावी सभा कराई है। रविवार हलके के गांव खरक में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी राजपूत मतदाताओं को साधने पहुंचे। बवानीखेड़ा में राजपूत बाहुल्य कई गांव हैं जो यहां के प्रत्याशी के हार-जीत के समीकरणों को सीधे-सीधे प्रभावित करेगी।
यह है बवानीखेड़ा में मतदाताओं के जातीय समीकरण
जानने वाली बात यह भी है कि हलके में कुल 2,17,111 वोट हैं। इसमें से मुख्यतः 58,245 वोट जाट मतदाता, 30,175 चमार जाति के मतदाता व 34,769 राजपूत 24,238 ब्राह्मण समाज के हैं। वहीं दूसरी ओर हलके में 9,173 वाल्मीकि 8,128, धानक 7,818, पंजाबी 2,345, ओड 1,600, महाजन 7,530, यादव 4,648, खाती 3,966, गुर्जर 4,077, कुम्हार 3,122, नाई 3,244, सैनी 1610, लोहार 2435, सांसी 409, मुसलमान 312, बंजारा 160, सिख जट 180, सपेरा 1,260, सुनार 2,602, नायक 1,110, गोस्वामी 601, राय सिंह 566, जोगी 105, भाट 402, मनिहार 146, धोबी 822, झीमर 1308, दर्जी सहित 2,17,111 मतदाता हैं। देखना यह होगा कि कौन सी पार्टी कौन-कौन समाज के कितने वोट हासिल कर पाती है।
दो अक्तूबर को कांग्रेस कर सकती है बड़ी रैली
यह भी सुनने में आया है कि कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप नरवाल के लिए दो अक्तूबर को बवानीखेड़ा में प्रियंका गांधी की बड़ी रैली करने जा रही है। कांग्रेस के पैराशूट उम्मीदवार के चुनावी प्रचार में अब तक पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी कई चुनावी सभा कर चुके हैं। देखा जाए तो आज तक इस सीट की कभी पूछ नहीं हो पाई थी लेकिन अब की बार यह राज्य में हॉट सीट बन गई है। इस पर राज्य से लेकर केंद्र तक सभी बड़े नेताओं की नजरे लग गई हैं।
अब तक ये बन चुके हैं बवानीखेड़ा से विधायक
राजनीतिक जानकारों की माने तो 1967 में जगन्नाथ, 1968 में सूबेदार प्रभु सिंह, 1972 में अमर सिंह, 1977 में जगन्नाथ, 1982 में फिर अमर सिंह, 1987 में जगन्नाथ, 1991 में फिर अमर सिंह, 1996 में जगन्नाथ यहां से विधायक रह चुके हैं। फिर रामकिशन फौजी यहां से 2000, 2005 और 2009 में विधायक रहे हैं। यहां से 2014 व 2019 में बिशंबर वाल्मीकि ने जीत दर्ज की है।
- त्रिकोणीय मुकाबले में पार्टी नेताओं के छूटे पसीने, स्टार प्रचारकों के सहारे नैया पार लगाने की जुगत
-जातीय समीकरण बनाकर बहुसंख्यक मतदाताओं को भी साधने में जुटे नेता
चुनाव में बवानीखेड़ा कस्बा के मुद्दे काफी हावी रहेंगे। क्योंकि अधिकतर वार्डों में गंदे पानी की निकासी नहीं हो रही है। वहीं पीने के पानी की भी दिक्कत बनी रहती है। मूलभूत सुविधाओं के लिए कस्बे में जो उम्मीदवार काम कराएगा। उसे ही विधानसभा में भेजने का काम करेंगे। -संतोष देवी कस्बावासी
बवानीखेड़ा हलका में इस बार नए प्रत्याशी हैं। इन चुनावों में चाहे जो भी जीते, उससे यही उम्मीद है कि वह लोगों से किए वादे निभाए और इलाके में विकास कराए। चुनावों में भाईचारा बनाकर रखना बेहद जरूरी है। -जीतराम शर्मा कस्बावासी
विधानसभा चुनावों के दौरान बवानीखेड़ा पहले के मुकाबले इस बार काफी चर्चा में है, इसकी एक वजह यह है कि पुराने दावेदार बाहर हो गए हैं, नए चेहरे चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीति में नए लोगों को मौका मिलना भी जरूरी है ताकि उन्हें जनता अपनी कसौटी पर परख सके और इलाके में विकास कराए। -हनुमान पाराशर।