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विजिलेंस ने नहीं मांगा रण सिंह यादव का दोबारा रिमांड, उठ रहे सवाल कैसे बरामद होंगे कुबूल किए 10.50 करोड़ रुपये
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रेलवे रोड स्थित नगर परिषद कार्यालय। संवाद
- फोटो : Bhiwani
भिवानी। नगर परिषद घोटाले में निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव ने 10.50 करोड़ रुपये लेने की बात कुबूली थी और बताया था कि यह राशि उसके दिल्ली में रहने वाले दोस्त के घर रखी है। साथ ही बताया था कि दिल्ली में ही एक अन्य दोस्त के पास उसकी कमीशन की राशि है।
चार दिन का रिमांड बीत गया, मगर विजिलेंस की टीम यह राशि बरामद नहीं कर पाई। इतना ही नहीं राशि बरामद करने के लिए दोबारा रिमांड के लिए अर्जी भी नहीं लगाई और रण सिंह यादव को तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव के साथ जेल भेज दिया गया। इससे विजिलेंस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। नप घोटाले के शिकायतकर्ता सुदर्शन जिंदल और भिवानी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुशील वर्मा ने भी विजिलेंस की जांच पर सवाल उठाते हुए घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की है।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को पूर्व पार्षद सुदर्शन जिंदल ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर नगर परिषद में करीब दो करोड़ के चेक घोटाले के आरोप लगाए थे। पुलिस की इकनॉमिक सेल ने जांच की तो पाया कि फर्जी फर्मों में चेक के माध्यम से राशि ट्रांसफर कर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। इसके बाद चार मार्च को व्यापारी विनोद, बैंक मैनेजर नितेश, नगर परिषद के कर्मचारियों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। पुलिस ने मामले में नप के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव, तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव, अकाउंटेंट संजय बंसल, सुरेश कुमार के अलावा चार अन्य को गिरफ्तार किया। बैंक मैनेजर नितेश से करीब 30 लाख रुपये भी बरामद किए गए हैं।
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विजिलेंस टीम ने 29 मार्च को नप के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव को रिमांड पर लेने के लिए जो बयान कोर्ट में प्रस्तुत किए, उनमें स्पष्ट था कि रण सिंह ने घोटाले में 10.50 करोड़ रुपये लिए हैं। बयान में बताया था कि उसने यह राशि दिल्ली के अपने दोस्त रमेश यादव के यहां छुपा रखी है। इसके अलावा कमीशन के रूप में जो राशि मिली वह दिल्ली के ही दोस्त दलीप के घर रखी है। आरोपी तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव ने साढ़े तीन लाख रुपये अपने जानकार के घर विद्यानगर गुरुग्राम में रखने की बात कुबूली थी। अब चार दिन के रिमांड के बाद न तो वे साढ़े 10 करोड़ रुपये बरामद किए गए और न ही अन्य कोई राशि। इतना ही नहीं यह राशि बरामद करने व आगे की पूछताछ के लिए विजिलेंस टीम ने दोनों आरोपियों का फिर से रिमांड तक नहीं मांगा, जो कि उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
विनोद गोयल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
मामले में नामजद व्यापारी विनोद गोयल फरार है। उसका नाम बैंक मैनेजर, अकाउंटेंट और पकड़े गए तीन अन्य आरोपियों ने भी लिया है। विनोद गोयल ने अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट में लगाई। विजिलेंस की ओर से भी मामले में जवाब लगाया गया कि उससे घोटाले की बड़ी राशि रिकवर करनी है। इसके बाद कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
रण सिंह को बचाने का प्रयास कर रही जांच टीम : सुशील वर्मा
भिवानी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुशील वर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस और स्टेट विजिलेंस ऊपर से आए दबाव के कारण मुख्य आरोपी रण सिंह यादव को बचाने का प्रयास कर रही है। इसी कारण बिना बरामदगी उन्हें जेल भेज दिया है। रण सिंह यादव ने खुद बताया था कि रुपये उसके दोस्त के घर दिल्ली रखे हैं। इतने बड़े घोटाले में बगैर कोई रिकवरी और बगैर कोई ठोस सुबूत बरामद किए पूर्व चेयरमैन की रिमांड की अप्लीकेशन कोर्ट के आगे नहीं लगाना। इससे साफ जाहिर हो रहा रहा है कि विजिलेंस भी आरोपी रण सिंह यादव और नगर परिषद के अधिकारियों को बचा चाह रही है। सारा आरोप बैंक कर्मचारियों पर डाल रही है। इस घोटाले में यह भी साबित हो चुका है कि लगभग 15 करोड़ रुपये का गबन फर्जी फर्मों के खातों में चेक डालकर किया गया है। अकाउंटेंट आरोपी संजय बंसल पुलिस के सामने कुबूल चुका है कि गबन की राशि में 60 प्रतिशत हिस्सा चेयरमैन का होता था। अगर सही पूरी जांच होती तो इसके अलावा फर्जी रसीद मामले, अवैध कब्जों, नकली पीआईडी, नक्शा पास करने के नाम पर करोड़ों का घोटाला सामने आता। स्टेट विजिलेंस की टीम से बहुत उम्मीद थी, लेकिन ऐसा लगता है कि अब इस घोटाले की सीबीआई से जांच के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
यह ठीक नहीं हुआ
नप में घोटाला 60 से 70 करोड़ का है। अब तक गिरफ्तार निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव, अकाउंटेंट संजय बंसल, सुरेश कुमार, बैंक मैनेजर नितेश खुद रुपये लेने की बात कुबूल कर चुकेेेे हैं। नितेश से करीब 30 लाख रुपये भी बरामद हो चुके है। रण सिंह के कुबूल किए जाने के बावजूद साढ़े 10 करोड़ की राशि बरामद नहीं की गई। यह तो बचाने के प्रयास हो रहे है। सिर्फ छोटों से रिकवरी की गई, बड़े निकाले जा रहे है।
-सुदर्शन जिंदल, शिकायतकर्ता।
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चार दिन का रिमांड बीत गया, मगर विजिलेंस की टीम यह राशि बरामद नहीं कर पाई। इतना ही नहीं राशि बरामद करने के लिए दोबारा रिमांड के लिए अर्जी भी नहीं लगाई और रण सिंह यादव को तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव के साथ जेल भेज दिया गया। इससे विजिलेंस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। नप घोटाले के शिकायतकर्ता सुदर्शन जिंदल और भिवानी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुशील वर्मा ने भी विजिलेंस की जांच पर सवाल उठाते हुए घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की है।
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उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को पूर्व पार्षद सुदर्शन जिंदल ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर नगर परिषद में करीब दो करोड़ के चेक घोटाले के आरोप लगाए थे। पुलिस की इकनॉमिक सेल ने जांच की तो पाया कि फर्जी फर्मों में चेक के माध्यम से राशि ट्रांसफर कर करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है। इसके बाद चार मार्च को व्यापारी विनोद, बैंक मैनेजर नितेश, नगर परिषद के कर्मचारियों पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। पुलिस ने मामले में नप के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव, तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव, अकाउंटेंट संजय बंसल, सुरेश कुमार के अलावा चार अन्य को गिरफ्तार किया। बैंक मैनेजर नितेश से करीब 30 लाख रुपये भी बरामद किए गए हैं।
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विजिलेंस टीम ने 29 मार्च को नप के निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव को रिमांड पर लेने के लिए जो बयान कोर्ट में प्रस्तुत किए, उनमें स्पष्ट था कि रण सिंह ने घोटाले में 10.50 करोड़ रुपये लिए हैं। बयान में बताया था कि उसने यह राशि दिल्ली के अपने दोस्त रमेश यादव के यहां छुपा रखी है। इसके अलावा कमीशन के रूप में जो राशि मिली वह दिल्ली के ही दोस्त दलीप के घर रखी है। आरोपी तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी संजय यादव ने साढ़े तीन लाख रुपये अपने जानकार के घर विद्यानगर गुरुग्राम में रखने की बात कुबूली थी। अब चार दिन के रिमांड के बाद न तो वे साढ़े 10 करोड़ रुपये बरामद किए गए और न ही अन्य कोई राशि। इतना ही नहीं यह राशि बरामद करने व आगे की पूछताछ के लिए विजिलेंस टीम ने दोनों आरोपियों का फिर से रिमांड तक नहीं मांगा, जो कि उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
विनोद गोयल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
मामले में नामजद व्यापारी विनोद गोयल फरार है। उसका नाम बैंक मैनेजर, अकाउंटेंट और पकड़े गए तीन अन्य आरोपियों ने भी लिया है। विनोद गोयल ने अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट में लगाई। विजिलेंस की ओर से भी मामले में जवाब लगाया गया कि उससे घोटाले की बड़ी राशि रिकवर करनी है। इसके बाद कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
रण सिंह को बचाने का प्रयास कर रही जांच टीम : सुशील वर्मा
भिवानी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुशील वर्मा ने आरोप लगाया कि पुलिस और स्टेट विजिलेंस ऊपर से आए दबाव के कारण मुख्य आरोपी रण सिंह यादव को बचाने का प्रयास कर रही है। इसी कारण बिना बरामदगी उन्हें जेल भेज दिया है। रण सिंह यादव ने खुद बताया था कि रुपये उसके दोस्त के घर दिल्ली रखे हैं। इतने बड़े घोटाले में बगैर कोई रिकवरी और बगैर कोई ठोस सुबूत बरामद किए पूर्व चेयरमैन की रिमांड की अप्लीकेशन कोर्ट के आगे नहीं लगाना। इससे साफ जाहिर हो रहा रहा है कि विजिलेंस भी आरोपी रण सिंह यादव और नगर परिषद के अधिकारियों को बचा चाह रही है। सारा आरोप बैंक कर्मचारियों पर डाल रही है। इस घोटाले में यह भी साबित हो चुका है कि लगभग 15 करोड़ रुपये का गबन फर्जी फर्मों के खातों में चेक डालकर किया गया है। अकाउंटेंट आरोपी संजय बंसल पुलिस के सामने कुबूल चुका है कि गबन की राशि में 60 प्रतिशत हिस्सा चेयरमैन का होता था। अगर सही पूरी जांच होती तो इसके अलावा फर्जी रसीद मामले, अवैध कब्जों, नकली पीआईडी, नक्शा पास करने के नाम पर करोड़ों का घोटाला सामने आता। स्टेट विजिलेंस की टीम से बहुत उम्मीद थी, लेकिन ऐसा लगता है कि अब इस घोटाले की सीबीआई से जांच के लिए संघर्ष करना पड़ेगा।
यह ठीक नहीं हुआ
नप में घोटाला 60 से 70 करोड़ का है। अब तक गिरफ्तार निवर्तमान चेयरमैन रण सिंह यादव, अकाउंटेंट संजय बंसल, सुरेश कुमार, बैंक मैनेजर नितेश खुद रुपये लेने की बात कुबूल कर चुकेेेे हैं। नितेश से करीब 30 लाख रुपये भी बरामद हो चुके है। रण सिंह के कुबूल किए जाने के बावजूद साढ़े 10 करोड़ की राशि बरामद नहीं की गई। यह तो बचाने के प्रयास हो रहे है। सिर्फ छोटों से रिकवरी की गई, बड़े निकाले जा रहे है।
-सुदर्शन जिंदल, शिकायतकर्ता।